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MC ने की रिव्यू मीटिंग: शिमला के कई माह से दुकानदारों ने नहीं दिया बढ़ा किराया

शिमला में दुकानों का किराये का मुद्दा.

शिमला में दुकानों का किराये का मुद्दा.

Shimla MC Property Rent: गौरतलब है कि निगम ने 987 सम्पत्ति का किराया स्क्वॉयर फ़ीट के हिसाब से बढ़ाने का फैसला लिया है. मेयर ने कहा कि निगम की आय बढ़ाने के साथ-साथ दुकानदारों पर बोझ न पड़े, इसका रास्ता निकाला जाएगा.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश के शिमला में वर्षों बाद भले ही नगर निगम ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किराए और लीज पर दी दुकानों, स्टालों और ढाबों के किराए में बढ़ोतरी की है, लेकिन तीन साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नगर निगम शिमला को अपनी ही संपत्ति से फूटी कौड़ी नहीं मिल रही है. निगम संपतियों के किराए में वृद्धि का शिमला व्यापार मंडल और दुकानदारों ने विरोध किया है और बढ़ा किराया देने से मना कर दिया है.अपनी ही सम्पत्तियों से किराया न वसूल पाने को लेकर नगर निगम शिमला एक बार फिर से रिव्यू करने की तैयारी कर रहा है, जिसको लेकर मेयर के नेतृत्व में एक बैठक की गई.

बैठक में फैसला लिया गया कि निगम ने अपनी आमदनी के लिए वर्षों बाद अपनी सम्पति का किराया पांच सौ से हजार गुना कर दिया है, जिसे देने में शहर के दुकानदार असमर्थ हैं. हालांकि, मंगलवार को हुई बैठक में कोई निर्णय नहीं हो पाया है. अब 14 अप्रैल को एक बार फिर बैठक होगी और किराए को लेकर हल निकला जाएगा. उधर, मेयर सत्या कौंडल ने कहा कि इस मसले पर जल्द समाधान निकाला जाएगा, ताकि निगम की भी आय हो और दुकानदारों को भी ज्यादा बोझ न पड़े.

कई साल बाद बढ़ाया था किराया, अब दोबारा होगा रिव्यू
नगर निगम शिमला ने कई साल बाद दिसंबर 2018 में अपनी संपतियों का किराया बढ़ाने का फैसला किया था, लेकिन तीन साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी निगम को अपनी ही संपति से आय नहीं हो रही है. इस मामले पर पहले संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया बाद में जब कमेटी ने वर्ग फुट के हिसाब से रेट तय किए तो फिर दुकानदारों ने तय दरों का विरोध कर दोबारा से दरें तय करने की मांग की. दुकानों के किराए को लेकर शहरी विकास मंत्री के आदेश पर मेयर सत्य कौंडल की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया. जो अब शहर के तीनों पार्षदों, व्यापार मंडल और नगर निगम आयुक्त के साथ मिलकर नए सिरे से निगम सम्पत्ति का किराया तय करेगी.
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व्यापार मंडल चाहता है बीच का रास्ता
उधर,व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह का कहना है कि नगर निगम शिमला ने कई साल बाद किराए और लीज दरों में वृद्धि की है. इससे कई गुना किराया और दरें बढ़ गई हैं. इतना किराया देना दुकानदारों के लिए संभव नहीं है और दुकानदार चाहते हैं कि निगम दुकानदारों की स्थिति को देखकर ही किराया बढ़ाए. निगम इस फैसले पर दोबारा विचार करे, ताकि निगम की आय में भी वृद्धि हो और दुकानदारों को भी राहत मिले.

वर्षों बाद निगम ने ये रेट तय किए थे
गौरतलब है कि निगम ने 987 सम्पतियों का किराया स्कवेयर फ़ीट के हिसाब से बढ़ाने का फैसला लिया है. मॉल रोड पर दुकानों के रेट 150 रुपए स्कवेयर फ़ीट, मिडिल बाज़ार में 35 रुपये , लोअर बाज़ार और लक्कड़ बाज़ार की कॉम्प्लेक्स दुकानों का किराया 40 रुपए वर्ग फुट, लोकल बस स्टैंड और राम बाज़ार का 35 रुपए , गंज बाज़ार सब्जी मंडी का रेट 25 रुपए प्रस्तावित किया गया है. शिमला के उपनगरों में ये रेट 30 रुपए वर्ग फुट प्रस्तावित था. हालांकि, चर्चा के बाद इसको 22 रुपए प्रति वर्ग फुट किया गया. जबकि गोदाम का किराया 7 रुपए वर्ग फुट किया गया. इसके अलावा गोदाम का रेट 10 रुपए रखा गया है इसमें गंज और सब्जी मंडी में गोदाम के रेट 7 रुपए तय किए है.
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