पानी की बर्बादी का पता लगाएगी शिमला एमसी, वैपकॉस कंपनी से किया करार

Gulwant Thakur | ETV Haryana/HP
Updated: August 12, 2017, 7:53 PM IST
पानी की बर्बादी का पता लगाएगी शिमला एमसी, वैपकॉस कंपनी से किया करार
राजधानी शिमला में पानी की बर्बादी का दृश्य
Gulwant Thakur | ETV Haryana/HP
Updated: August 12, 2017, 7:53 PM IST
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को पहुंचने वाले पानी का पूरा इस्तेमाल नही हो रहा है. यहां सभी स्रोतों से जितना पानी मिल रहा है वह सारा वितरित नही हो रहा है. रास्ते में पानी की लीकेज और चोरी हो रही है. इसका पता लगाने के लिए नगर निगम ने कार्य शुरू कर दिया है. एमसी ने नॉन रेवेन्यू वॉटर का पता लगाने को वैपकॉस कंपनी को जिम्मा सौंपा है.

नगर निगम नॉन रेवेन्यू वॉटर कार्यक्रम के तहत यह पता लगाएगा कि पानी की खपत कहां हो रही है. नगर निगम शिमला को विभिन्न पेयजल स्त्रोतों से आने वाले रोजाना 35 से 40 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है. लेकिन पानी की आपूर्ति 25 से 30 एमएलडी ही हो पा रही है. बांकि पानी रास्ते में ही गायब हो रहा है. कुल सप्लाई का 25 फीसदी पानी वेस्ट जा रहा है.

एमसी ने नॉन रेवेन्यू वॉटर का पता लगाने को वैपकॉस कंपनी को जिम्मा सौंपा है. यह कम्पनी शहर के विभिन्न हिस्सों में जाकर नवीन तकनीक से पानी की लीकेज, चोरी आदि का पता लगाएगी और उसका समाधान करेगी.

प्राथमिकता के आधार पर कम्पनी शहर के ढली, जाखू, विकासनगर, फिन्गास्क, कैथू और न्यू शिमला क्षेत्रों में सर्वे करेगी. ग्रेटर वॉटर शिमला सर्कल के अधीक्षण अभियंता धर्मेन्द्र गिल ने बताया कि निगम के नॉन रेवन्यू वॉटर के बारे में पता लगाने के लिए एक सर्वे शुरू किया है.

इस सर्वे के पूरा होने के बाद शहर में पानी के वितरण का नए सिरे से प्लान बनाया जाएगा. साथ ही नई लाइनों को बिछाने की जरूरत पर भी काम किया जाएगा.
First published: August 12, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर