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स्वच्छता सर्वेक्षण में शिमला 100 शहरों की सूची से बाहर, कांग्रेस ने इसके लिए BJP को ठहराया जिम्मेदार

स्वच्छता सर्वेक्षण में शिमला 100 शहरों की सूची से बाहर, कांग्रेस ने इसके लिए BJP को ठहराया जिम्मेदार

वहीं, माकपा ने भी भाजपा शासित नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

वहीं, माकपा ने भी भाजपा शासित नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

संजय चौहान (Sanjay) ने कहा कि सरकार ने सभी विभागों में नियमित भर्तियों पर रोक लगा रखी है और आउटसोर्स ठेके पर भर्तियां की जा रही हैं. इनमें ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है. अधिकांश भर्तियां आउटसोर्स व अंशकालिक रूप से भर्ती की जा रही है. इसमें भी भाजपा चेहते ठेकेदारों की कंपनियों को फायदा देने के लिए कार्य कर रही है.

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शिमला. स्वच्छता सर्वेक्षण (cleanliness survey) में पहाड़ों की रानी शिमला (Shimla) के 100 शहरों की सूची से बाहर होने एक बाद राजनीति गरमा गई है. बीते वर्ष के 65वें रैंक से 102 रैंक पहुंचने पर कांग्रेस और माकपा ने भाजपा (BJP) शासित नगर निगम और प्रदेश सरकार पर कड़ा प्रहार किया है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने जहां भाजपा को दोषी करार दिया है, वहीं माकपा ने भी भाजपा शासित नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

माकपा नेता व पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि देश में किए स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2021 में प्रदेश की राजधानी शहर की रैंकिंग पिछले वर्ष 2020 में 65वें रैंक से इस वर्ष 102वें रैंक पर गिरने के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार व नगर निगम शिमला की लचर कार्यप्रणाली का परिणाम है. उनका कहना है कि वर्ष 2016 में जब भाजपा सत्ता में नहीं थी, उस समय स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में 26वां रैंक था, लेकिन जबसे भाजपा सरकार व नगर निगम में सत्तासीन हुई है, तबसे ही प्रदेश में निजीकरण की नीतियां तेजी से लागू कर रही है. सरकार ने सभी सेवाओं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सफाई जैसी जनता की मूलभूत आवश्यकताओं को भी निजी हाथों में सौंपने का कार्य किया है.

ठेकेदार व कम्पनियों का शोषण किया जा रहा है
संजय चौहान ने कहा कि सरकार ने सभी विभागों में नियमित भर्तियों पर रोक लगा रखी है और आउटसोर्स ठेके पर भर्तियां की जा रही हैं. इनमें ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है. अधिकांश भर्तियां आउटसोर्स व अंशकालिक रूप से भर्ती की जा रही है. इसमें भी भाजपा चेहते ठेकेदारों की कंपनियों को फायदा देने के लिए कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि आज केवल नगर निगम शिमला में ही 950 से अधिक सफ़ाई व अन्य कर्मियों के पद खाली हैं और सरकार इनको भरने के लिए कोई भी कार्य नहीं कर रही है. एक ओर इन निजीकरण की नीतियों से जनता पर अधिक टैक्स वसूली कर जनता पर और अधिक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है और दूसरी ओर इन कर्मियों का भी ठेकेदार व कम्पनियों का शोषण किया जा रहा है.

अधिकारियों को फील्ड में उतारा जाएगा
उधर, मेयर सत्या कौंडल ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग गिरना बहुत दुखद है. लेकिन रैंकिंग गिरने पर राजनीति कर रहे कोरोना काल मे गायब रहे न तो किसी ने सैहब कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया और न ही शहर को साफ रखने पर कोई सहयोग दिया. उन्होंने उल्टे माकपा और कांग्रेस पर पलटवार किया. मेयर ने कहा कि रैंकिंग गिरने पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और अधिकारियों को फील्ड में भेजा जाएगा.

Tags: BJP, Congress, Himachal pradesh news, Shimla News

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