हिमाचल प्रदेश को विकास की सौगात, पांच वर्षों में SJVN करेगा 35 हजार करोड़ निवेश

SJVN के CMD नंदलाल शर्मा ने कहा कि आगामी पांच वर्षों के भीतर हिमाचल प्रदेश में 35 हजार करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा
SJVN के CMD नंदलाल शर्मा ने कहा कि आगामी पांच वर्षों के भीतर हिमाचल प्रदेश में 35 हजार करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा

देश की मिनी रत्न कंपनी सतलुज जल विद्युत निगम राहत (Satluj Jal Vidyut Nigam) के सीएमडी नंदलाल शर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) आर्थिक रूप से मजबूत होगा बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार (Job Opportunity) के अवसर भी मिलेंगे

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 8:08 PM IST
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शिमला. आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के लिए देश की मिनी रत्न कंपनी सतलुज जल विद्युत निगम राहत (Satluj Jal Vidyut Nigam) भरी खबर लेकर आई है. बुधवार को एसजेवीएन (SJVN) के सीएमडी नंदलाल शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि आगामी पांच वर्षों के भीतर राज्य में 35 हजार करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा. प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं के अलावा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी निवेश किया जाएगा. लाहौल-स्पिती के काजा में प्रस्तावित 1,000 मेगावाट के सोलर पार्क में निवेश की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है. हाल ही में एसजेवीएन के विशेषज्ञों की एक टीम ने इस क्षेत्र का दौरा किया है. बता दें कि एसजेवीएन हिमाचल प्रदेश और भारत सरकार का साझा उपक्रम है.

प्रदेश में इन परियोजनाओं में निवेश
एसजेवीएन की वर्तमान में दो बड़ी परियोजनाएं हिमाचल में बिजली उत्पादन कर रही हैं. 1,500 मेगावाट की नाथपा-झाकड़ी और 412 मेगावाट की रामपुर परियोजनाओं से विद्युत उत्पादन किया जा रहा है. 1810.56 करोड़ रूपए की 210 मेगावाट की लुहरी स्टेज 1 परियोजना कुल्लू और शिमला जिले में निर्माणाधीन है. इसके लिए हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने निवेश के लिए मंजूरी दी थी. हमीरपुर में 66 मेगावाट की घौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना, 172 मेगावाट की लुहरी स्टेज-2, 780 मेगावाट की जंगी थोपन पोवारी, चिनाब बेसिन में 210 मेगावाट की पुर्थी, 138 मेगावाट की बारदंग और 430 मेगावाट की रिओली दुगली जल विद्युत परियोजना में निवेश किया जाएगा.





प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे
एसजेवीएन के सीएमडी नंदलाल शर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल हिमाचल आर्थिक रूप से मजबूत होगा बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 तक 5,000 मेगावाट, वर्ष 2030 तक 12,000 मेगावाट और वर्ष 2040 तक 25,000 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली कंपनी बनने के लक्ष्य पर काम किया जा रहा है. सभी परियोजनाओं को तय समय और निर्धारित लागत पर पूरा किया जाएगा.

हिमाचल प्रदेश और भारत सरकार को लाभ
एसजेवीएन में भारत सरकार की हिस्सेदारी 59.8 फीसदी, हिमाचल सरकार की 26.85 और पब्लिक शेयर 13 फीसदी है. सीएमडी शर्मा के मुताबिक एसजेवीएन अपनी स्थापना के 32 वर्ष के दौरान केंद्र को अब तक 4,934 हजार करोड़ रूपए. और हिमाचल सरकार को 1,949 करोड़ रूपए का लाभ दे चुकी है. कंपनी ने बीते 15-16 वर्षों में 17,300 करोड़ रूपए का कुल लाभ प्राप्त किया है. वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान रिकार्ड 9,678 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया है जबकि लक्ष्य 8,700 मिलियन यूनिट का था. कोरोना के दौर में एसजेवीएन को भी अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा. लेबर (श्रमिकों) की कमी के चलते निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है.
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