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शिमला का पहला बुक कैफे होगा बंद, अब यहां पर खुलेगी शहर की सबसे पुरानी टेस्टिंग लैब

शिमला की मेयर सत्या कौंडल ने बताया कि साल 2014 से एमसी के अधीन चल रही टेस्ट लैब बंद पड़ी है.

शिमला की मेयर सत्या कौंडल ने बताया कि साल 2014 से एमसी के अधीन चल रही टेस्ट लैब बंद पड़ी है.

Shimla News: शिमला नगर निगम की टीम ऐसी जगह पर लैब स्थापित करना चाह रही है, जहां लोगों को आने-जाने की सुविधा हो. इसके लिए रिज मैदान के टका बेंच पर स्थित शहर के सबसे पहले बुक कैफे में टेस्टिंग लैब खोलने का फैसला लिया गया है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का पहला और एकमात्र बुक कैफे (Book Café) बंद होगा. अब यहां पर नगर निगम (Municipal Corporation Shimla) अधीन बंद पड़ी स्वास्थ्य संबंधी सबसे पुरानी टेस्टिंग लैब (Health Testing Lab) खोली जायेगी. नगर निगम की टीम ने आज बुक कैफे का निरीक्षण किया है. कई सालों से बंद पड़ी इस लैब को चलाने के लिए नगर निगम द्वारा चिंहित किए गए स्थान में सैलाब आने के चलते अब नई जगह स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. जिसमें निगम की टीम जगह-जगह निरीक्षण कर रही है. निगम की टीम ऐसी जगह पर लैब स्थापित करना चाह रही है, जहां लोगों को आने-जाने की सुविधा हो.

नगर निगम शिमला ने रिज मैदान के टका बेंच पर स्थित शहर के सबसे पहले बुक कैफे में टेस्टिंग लैब खोलने का फैसला लिया है, जिसके लिए निगम की टीम ने दौरा किया है. इसके अलावा रानी झांसी पार्क के हॉल के भीतर भी दौरा किया है. लेकिन झांसी पार्क मॉल रोड और रिज मैदान से दूर होने के चलते फिलहाल इस पर सहमति नहीं बन पाई है. इसलिए अब नगर निगम शिमला बुक कैफे में ही लैब खोलने की तैयारी कर रहा है.

शिमलावासियों को जल्द मिलेगी टेस्ट लैब की सुविधा
शिमला की मेयर सत्या कौंडल ने बताया कि साल 2014 से एमसी के अधीन चल रही टेस्ट लैब बंद पड़ी है, जिसके चलते शहर के सीनियर सिटीजन और लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. एमसी कई सालों से इस लैब को चलाने का प्रयास कर रही है, लेकिन कई दिक्कतें आने के बाद इसे शुरू नहीं किया जा सका. अब एक बार फिर से इसे शुरू करने के लिए नई जगह की तलाश कर दी है. जहां जल्द लैब को सुचारू किया जाएगा, ताकि शहरवासियों को लैब का उचित दाम पर लाभ मिल सके.

कोरोना काल से बंद पड़ा है शहर का बुक कैफे
बता दें कि शिमला कि शहर का बुक कैफे काफी समय से बंद पड़ा हुआ है. जिस कंपनी को इसका टेंडर दिया था वे लॉकडाउन के बाद से ही इसे नहीं चला रहे हैं. ऐसे में इस कैफे के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई. निगम को बुक कैफे से जो 13 लाख रुपए सालाना आय होती थी, वह भी नहीं हो पाई है. अब ऐसे में इस बुक कैफे में लैब खोलने की तैयारी की जा रही है.

2017 में खुला था शहर का पहला बुक कैफे
बता दें कि 2017 में नगर निगम शिमला में टका बेंच पर बुक कैफे बनाया था और इस कैफे को कैदियों को चलाने के लिए दिया गया था, जिससे एक आकर्षण का केंद्र बना हुआ था. यहां पर पर्यटक और स्थानीय लोग काफी तादाद में आते थे, लेकिन नगर निगम ने इस कैफे का निजीकरण कर दिया और कंपनी को इस कैफे को चलाने के लिए दे दिया. इससे निगम को काफी आमदनी भी हो रही थी, लेकिन पिछले 1 साल से इस कैफे पर ताले लगे हुए हैं. ऐसे में ना तो शहर के लोग और ना ही पर्यटक इस कैफे में बैठने का लुत्फ उठा रहे हैं.

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