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शिमला: एशिया का पहला ओपन एयर आइस स्केटिंग रिंक में जल्‍द शुरू होगी स्‍केटिंग, बर्फ जमाने का काम शुरू

शिमला: एशिया का पहला ओपन एयर आइस स्केटिंग रिंक में जल्‍द शुरू होगी स्‍केटिंग, बर्फ जमाने का काम शुरू

पंकज प्रभाकर ने बताया कि पिछली बार आइस स्टेकिंग रिंक में स्टेकिंग के सुबह व शाम मिलाकर 86 सेशन हुए थे.

पंकज प्रभाकर ने बताया कि पिछली बार आइस स्टेकिंग रिंक में स्टेकिंग के सुबह व शाम मिलाकर 86 सेशन हुए थे.

शिमला के लक्कड़ बाजार स्थित आइस स्केटिंग रिंक (Air Ice Skating Rink) एशिया का पहला ओपन एयर रिंक है जहां आज भी प्राकृतिक रूप से बर्फ जमाई जाती है. इस रिंक को 1920 में अंग्रेजों ने बनाया था. तब से लेकर हर साल यहां पर सर्दियों में प्राकृतिक रूप से बर्फ जमा कर स्केटिंग करवाई जाती है. रिंक में स्केटिंग करने को लेकर खास कर बच्चों को साल भर से इंतजार रहता है.

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शिमला. पहाड़ों की राजधानी शिमला (Shimla) में एशिया का पहला प्राकृतिक ओपन एयर आइस स्केटिंग रिंक (Open Air Ice Skating Rink) एक बार फिर स्केटिंग के शौकीनों के लिए तैयार हो रहा है. नवंबर के अंतिम सप्ताह से शुरु होने जा रही आइस स्केटिंग के लिए आयोजकों ने तैयारी तेज कर दी है. मैदान को समतल करवाने के सभी तरह की तैयारियां की जा रही हैं. कल्ड की सदस्य ने बुधवार को स्केटिंग रिंक में रोलर चलाया. अब पानी की तीन परतें बर्फ जमाने के लिए बिछाई जानी है. पानी जमने के लिए यहां का न्यूनतम तापमान जमाव बिंदू के नीचे जाने जरुरी है जो इन दिनों शिमला का तापमान अनुकूल बना है. स्केटिंग का लुत्फ शहर के बच्चों के साथ सैलानी (Tourist) भी उठा सकेंगे.

आइस स्केटिंग रिंक के पदाधिकारी पंकज प्रभाकर ने बताया कि स्केटिंग के शौकीनों के लिए स्केटिंग की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. आज से पानी भी गिराया जाएगा, जिसमें एक समय पर 3000 हजार लीटर पानी की आवश्यकता रहती है. जैसे ही बर्फ जमती है वैसे ही स्केटिंग के शौकीनों को स्केटिंग करने का मौका मिलेगा. रोलर सुबह की बजाय दोपहर के समय चला है, इसलिए पानी के छिड़काव में देरी होने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि पहले यह एक सप्ताह पहले कार्य शुरू होना था लेकिन रोलर उपलब्ध न होने के कारण समय पर काम नहीं हो सका.

दो सौ रुपए की बढ़ौतरी की गई है
पंकज प्रभाकर ने बताया कि पिछली बार आइस स्टेकिंग रिंक में स्टेकिंग के सुबह व शाम मिलाकर 86 सेशन हुए थे. एक दिन में सुबह व शाम को दोनों समय आइस स्टेकिंग रिंक में स्केटिंग होने पर दो सेशन गिने जाते हैं. उन्होंने बताया कि बीते साल कोरोना वायरस के बीच भी 300 एंट्रीज आई थी और इस बार भी उम्मीद है कि सभी एंट्रीज भर जाएंगी. उन्होंने, बताया कि हालांकि इस बार एंट्री फीस में दो सौ रुपए की बढ़ौतरी की गई है.

सरकार उपलब्ध करवाए बेहतर सुविधाएं
उधर, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का जौहर दिखा चुके रजत ने बताया इस स्केटिंग रिंक से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं लेकिन अब धीरे- धीरे इस स्पोर्ट्स की ओर से लोगों में रुचि कम दिखाई दे रही है. फिर भी कोरोना काल से लेकर अब तक नए बच्चे भी स्केटिंग का गुर सिख रहे हैं. अब स्पीति में भी आइस स्केटिंग रिंक खुल गया है, जहां आईस स्केटिंग हॉकी प्रतियोगिता भी करवाई जा रही है. ऐसे में एशिया के पहले आइस स्केटिंग रिंक को बढ़ावा और सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर स्केटिंग के गुर सिखाए जा सकें.

1920 से क्लब द्वारा सिखाये जा रहे हैं स्केटिंग के गुर
बता दें कि शिमला के लक्कड़ बाजार स्थित आइस स्केटिंग रिंक एशिया का पहला ओपन एयर रिंक है जहां आज भी प्राकृतिक रूप से बर्फ जमाई जाती है. इस रिंक को 1920 में अंग्रेजों ने बनाया था. तब से लेकर हर साल यहां पर सर्दियों में प्राकृतिक रूप से बर्फ जमा कर स्केटिंग करवाई जाती है. रिंक में स्केटिंग करने को लेकर खास कर बच्चों को साल भर से इंतजार रहता है. आइस स्केटिंग रिंक में बर्फ जमाने के लिए पहले रोलर चला कर मैदान की सतह को मजबूत किया जाता है. इसके बाद पानी की छिड़काव तीन चरणों में किया जाता है. पहले चरण में एक हजार लीटर पानी की छिड़काव किया जाता है. एक से दो घंटे में पानी जमना शुरू हो जाता है. इसके बाद दूसरी सतह के लिए पानी का छिड़काव दो से तीन हजार लीटर किया जाता है. इसके जमने के दो घंटे के बाद तीसरी सतह के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है. जमाव बिंदू से तापमान नीचे होने पर साफ आसमान में पानी जमकर बर्फ में तबदील हो जाता है.

इस बार 10 फीसद कम होगा रिंक का आकार
रिंक की लंबाई व चौड़ाई को देखें तो 1325 वर्ग मीटर आकार के मैदान पर शहर के बच्चों से लेकर बड़े यहां पर खेल का हुनर सीखते हैं. हर साल छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यहां पर आते हैं. इनकी प्रतियोगिताएं करवाने के लिए सीखाने तक काम किया जाता है. इस बार रिंक के पास एस्कलेटर का काम चल रहा है. इसलिए दस फीसद जमीन इसके लिए छोड़ी है.

Tags: Himachal pradesh news, Shimla News

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