Positive India: अस्पताल में भर्ती किए बिना मां-बाप को कोरोना से बचाया, भगवान बनकर आए ‘सुमित भाई’

Positive News: सुमित पेशे से वकील हैं और हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं. अपनी कमाई का 80 प्रतिशत हिस्सा समाजसेवा से जुड़े कामों में लगा रहे हैं. सुमित ने बताया कि कोरोना के इस दौर में उन्हें हर रोज 40 से 50 फोन कॉल्स आ रही हैं.

Positive News: सुमित पेशे से वकील हैं और हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं. अपनी कमाई का 80 प्रतिशत हिस्सा समाजसेवा से जुड़े कामों में लगा रहे हैं. सुमित ने बताया कि कोरोना के इस दौर में उन्हें हर रोज 40 से 50 फोन कॉल्स आ रही हैं.

Positive News: सुमित पेशे से वकील हैं और हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं. अपनी कमाई का 80 प्रतिशत हिस्सा समाजसेवा से जुड़े कामों में लगा रहे हैं. सुमित ने बताया कि कोरोना के इस दौर में उन्हें हर रोज 40 से 50 फोन कॉल्स आ रही हैं.

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शिमला. हिमाचल की राजधानी शिमला (Shimla) के खलिणी इलाके में रहने वाले इंद्रजीत सिंह के माता-पिता कोरोना संक्रमित (Corona Infected) हो गए थे. उनके पिता जी की देखभाल करने वाले एक युवक के संपर्क में आने से इंद्रजीत के 82 वर्षीय पिता हरभजन सिंह और 74 वर्षीय मां दलजीक कौर कोरोना संक्रमित हो गए. पिताजी पहले से ही काफी बीमार चल रहे थे और कोरोना ने मुश्किलों को और बढ़ा दिया. अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति बिल्कुल नहीं थी, क्योंकि उनके पिता का दिन में तीन बार डायलिसिस होता है. पिता को इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल के कोविड वार्ड (Covid Ward) में और मां को शहर के दूसरे अस्पताल रिपन में भर्ती करवाना पड़ता, जोकि किसी भी लिहाज से उन्हें ठीक नहीं लगा. इंद्रजीत और उसकी पत्नी उमंग बंगा ने होश खोने के बजाए हिम्मत और समझदारी से काम करने की ठानी. डॉक्टरों की सलाह पर इंद्रजीत ने ग्लब्स और डबल मास्क पहने और कोरोना संक्रमित अपने माता और पिता की देखभाल में जुट गए.

संक्रमित होने की पहली रात उनकी मां का ऑक्सीजन लेवल (Oxygen Level) 78 और पिता का ऑक्सीजन लेवल 68 पहुंच गया था. जैसे-तैसे एक ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर (Oxygen Concentrator) का इंतजाम किया. दूसरी मशीन कहीं नहीं मिली. अब स्थिति ये हो गई थी कि इंद्रजीत को आधा घंटा मां को ऑक्सीजन देनी पड़ रही थी और आधा घंटा अपने पिता को. इंद्रजीत बताते हैं कि बीच में ऐसी स्थिति बन रही थी कि मैं अपनी मां को बचाऊं या पिता को. मशीन एक ही थी और दोनों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी. रात भर इंद्रजीत रोते-रोते बारी-बारी से अपने मां और बाप को ऑक्सीजन देते रहे और उखड़ती सांसों को थामे रखा. शहर में ऑक्सीजन कन्संट्रेटर और सिलेंडर की भारी कमी चल रही थी.

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पैसा होने पर भी ऑक्सीजन नहीं
काफी पैसा होने के बावजूद ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं हो पा रहा था. इस बीच इंद्रजीत को किसी ने बताया कि समरहिल में रहने वाले सुमित शर्मा एक एनजीओ चलाते हैं, उनके पास ऑक्सीजन कन्सट्रेटर मिल सकता है. संपर्क होते ही सुमित ऑक्सीजन कन्संट्रेटर लेकर पहुंच गए. इंद्रजीत ने कहा कि सुमित किसी भगवान से कम नहीं हैं, अगर वो नहीं होते तो शायद अपने मां-बाप को खो देते. कोरोना संक्रमित माता-पिता की सेवा करते रहे, पिता तो बिस्तर से हिल भी नहीं पाते, उनका डायलिसिस करने के अलावा हर काम इंद्रजीत ने किया. मां और पूरे परिवार का ख्याल रखने का जिम्मा उनकी पत्नी ने उठाया. कोरोना को मात दी और अब 8 दिन हो गए हैं ठीक हुए, लेकिन मां और बाप दोनों को अब भी ऑक्सीजन लगा हुआ है. इंद्रजीत ने बताया कि अपने डॉक्टर मित्रों की सलाह पर काम करते रहे, जैसे वो निर्देश देते गए वैसे ही पालन करते गए. उन्होंने कहा कि मैंने भगवान पर और खुद पर भरोसा रखा और अब राहत की सांस ले रहे हैं.

खुद को भी संभाले रखा

इंद्रजीत की पत्नी उमंग बंगा ने कहा कि शुरू के दो दिन बहुत ही बुरे रहे, लेकिन हमने ठंडे दिमाग से काम लिया. अपने परिवार के अलावा मित्रों और डॉक्टरों से मदद मांगी. दृढ़ निश्चय कर लिया था कि कोरोना को हराना है, हमने घर में अपने-अपने काम बांट लिए और अनुशासन के साथ काम किया, अपनी सास और ससुर के इलाज से लेकर देखभाल तक हर कार्य डॉक्टरों की सलाह से किया. बीच-बीच में हिम्मत जवाब दे जाती थी, लेकिन खुद को संभाले रखा और एक-दूसरे के सहयोग से इस लड़ाई को जीता. इंद्रजीत की मां ने इतना कहा कि भगवान ऐसी औलाद सबको दे. किसी भी परिस्थिती से घबराएं नहीं, उससे मुकाबला करें.



मैं भगवान नहीं हूं-सुमित

35 वर्षीय सुमित शर्मा को जब इंद्रजीत ने भगवान कहा तो सुमित शर्मा ने इतना कहा कि “मैं भगवान तो नहीं, लेकिन एक बेहतर इंसान बन जाऊं, ये काफी है.” सुमित शर्मा समरहिल के रहने वाले हैं, पेशे से वकील हैं और हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं. सुमित पिछले काफी समय से मिशन अगेंस्ट ट्यूबरक्लोसिस एंड कैंसर नाम की संस्था चला रहे हैं और वर्तमान में अकेले ही काम कर रहे हैं. अब तक किसी से कोई डोनेशन नहीं ली है और अपनी कमाई का 80 प्रतिशत हिस्सा समाजसेवा से जुड़े कामों में लगा रहे हैं.

सुमित को आ रहे कॉल्स

सुमित ने बताया कि “कोरोना के इस दौर में उन्हें हर रोज 40 से 50 फोन कॉल्स आ रही हैं. इस वक्त लोगों को ऑक्सीजन कन्सट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर की सबसे ज्यादा जरूरत है. इसी के संबंध में तीमारदार उनसे मदद मांग रहे हैं और कुछ लोग अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए सहायता मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस वक्त उनके पास 5 ऑक्सीजन कन्सट्रेटर हैं और 4 सिलेंडर हैं. मांग ज्यादा है और कई बार मदद पहुंचाने में असमर्थ हो जाते हैं, लेकिन जैसे तैसे मैनेज कर रहे हैं. बीते डेढ़ महीनों में 32 से ज्यादा परिवारों को मदद दे चुके हैं. बीते साल लॉकडाउन में इनकी संस्था ने करीब 2800 परिवारों को 70 दिनों तक मुफ्त राशन और खाना पहुंचाया. साथ ही मास्क,सेनिटाइजर और दवाइयों से लेकर फल-सब्जी तक वितरित की और जरूरतमंदों की मदद की.

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