110 साल पुराने रिज टैंक में दरारें: विशेषज्ञों ने जल निगम को सौंपी रिपोर्ट
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110 साल पुराने रिज टैंक में दरारें: विशेषज्ञों ने जल निगम को सौंपी रिपोर्ट
शिमला के रिज मैदान. (सांकेतिक तस्वीर)

गौरतलब है कि जल निगम दरारों को भरने के लिए पिछले करीब एक साल से टेंडर प्रक्रिया कर रहा है. लेकिन दरारों को भरने के न तो कोई टेंडर न तो कोई टेंडर प्रक्रिया हुई है और न ही कोई दरार भरी गई.

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शिमला. शिमला (Shimla) के ऐतिहासिक रिज मैदान को बचाने के कवायद अब जल प्रबंधन निगम द्वारा शुरू किए जा रहे है. पंजाब इंजीनियरिंग कालेज (PEC Chandigarh) के विशेषज्ञ की रिपोर्ट आने के बाद जल प्रबंधन अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है. गुरुवार को शहरी विकास विभाग के सचिव रजनीश सहित चंडीगढ़ (Chandigarh) इंजीनियरिंग कालेज के विशेषज्ञों ने रिज का जायजा लिया और टैंक में पड़ी दरारों को भरने के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही.

अप्रैल में इसका कार्य शुरू
टीम ने रिज टैंक के आसपास के क्षेत्र दौरा किया. विशेषज्ञों की टीम दिसम्बर माह में टैंक के अंदर की दरारों को मुआयना कर चुका है और अब इन दरारों को कैसे भरे इसकी रिपोर्ट भी निगम को सौंप दी है. सचिव शहरी विकास विभाग ने कहा कि रिज मैदान के नीचे बने टैंक में दरारें आई हैं. इन दरारों को भरने को लेकर विशेषज्ञ ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और जल्द ही दरारों को भरने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और अप्रैल में इसका कार्य शुरू कर दिया जाएगा.

बता दें कि 110 साल पहले ब्रिटिशराज में रिज के नीचे वाटर टैंक बनाया गया है. ऐतिहासिक रिज मैदान पर पूरे शिमला शहर को जलापूर्ति करने वाला ब्रिटिशकालीन वाटर स्टोरेंज टैंक है, जिसमें करीबन 45 लाख लीटर पानी स्टोर करने की क्षमता है. ऐसे में रिज पर बढ़ती दरारों से वाटर टैंक को भी खतरा हो सकता हैं. टैंक में आर्क आकार के दस चैम्बर बनाए गए है जिसमे पानी स्टोर होता है. दस मीटर इस टैंक की ऊँचाई है और 5 एमएलडी यही पचास लाख लीटर पानी इसमें स्टोर होता है.
यहां-यहां होती है सप्लाई


अंग्रेजों के बनाए टैंक से मालरोड, लोअर बाजार, कृष्णानगर, कैथू, अन्नाडेल, लकड़बाज़ार, बस स्टेंड कर अलावा कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई होती है. अब इस टैंक में दरारें आने से शिमला जल निगम समेत नगर निगम और जिला प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है. बता दें कि करीब तीन साल पहले रिज टैंक के भीतर सफाई के दौरान दरारें देखी गई थी. निगम के बाद शहर में पानी का जिम्मा शिमला जल निगम के पास गया उसके बाद जल निगम ने दरारों को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. गौरतलब है कि जल निगम दरारों को भरने के लिए पिछले करीब एक साल से टेंडर प्रक्रिया कर रहा है. लेकिन दरारों को भरने के न तो कोई टेंडर न तो कोई टेंडर प्रक्रिया हुई है और न ही कोई दरार भरी गई.

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