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सर्वाइवर्स ऑफ लाहौल वैली: मां का जन्मदिन और वो ‘बेबसी’

 लाहौल वैली के टूर के दौरान अभिनव चंदेल. (फोटो उनकी फेसबुक वॉल से लिया गया है.)

लाहौल वैली के टूर के दौरान अभिनव चंदेल. (फोटो उनकी फेसबुक वॉल से लिया गया है.)

सेना की ओर से रोहतांग टनल और एयरफोर्स हेलिकॉप्टर से 305 लोगों को लाहौल वैली से निकाला गया है. वायुसेना के तीन चॉपर बचाव ...अधिक पढ़ें

    “11 दिन के थकाने वाले स्पीति के टूर के अंतिम चार दिन में मेरी प्राथमिकता थी कि मैं खुश और आशावादी रहूं. साथ ही घाटी में फंसे और मेरे आसपास मौजूद लोग किसी भी तरह से उम्मीद न खोएं.” कुछ ऐसा ही कहना था लाहौल घाटी से रेस्क्यू किए गए हिमाचल के धर्मशाला के अभिनव चंदेल का. वह भारी बर्फबारी के बाद चार दिन से लाहौल वैली में फंस गए थे.

    मंगलवार, 25 सितंबर को उन्हें सेना ने दूसरे लोगों के साथ रेस्क्यू किया. पेशे से फोटोग्राफर अभिनव चंदेल बताते हैं कि चार दिन के वक्त के दौरान कई बार उन्हें लगा कि वह बेबस महसूस कर रहे हैं, लेकिन 24 सिंतबर को उन्होंने सबसे ज्यादा बेबसी महसूस की, क्योंकि इस दिन उनकी मां का जन्मदिन था. मैं बस यही सोचता रहा कि मां काफी चिंतित होंगी, क्योंकि अब तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

    अभिनव अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि हाईपोथर्मियां की वजह से एक शख्स की हालत बिगड़ गई, जिसे उन्होंने किसी तरह बचाया.

    केवल खुश रहना है: अभिनव
    अभिनव कहते हैं कि चार दिन में मैंने खुद को खुश रखने की कोशिश की और सोचता रहा कि आखिरकार लाहौल घाटी को बर्फ की चादर ओढे़ देखना ही तो मेरा सपना था और इस दौरान जब भी मैं आसपास नजर दौड़ता तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान दौड़ जाती.

    स्थानीय लोगों ने की मदद
    अभिनव ने बताया कि इस आपात स्थिति में स्थानीय लोगों ने काफी मदद की. ग्रामीणों ने अपने घरों के दरवाजे फंसे हुए लोगों के लिए खोल दिए. मैं स्थानीय लोगों और इन पहाड़ों का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने यह निश्चित किया कि वादियों में फंसे हुए लोगों को जान जानें की चिंता नहीं करनी चाहिए.

    ‘96 घंटे के लिए लापता’
    दिल्ली की प्रियंका वोरा भी लाहौल घाटी में तीन दिन तक फंसी रहीं. 21 सितंबर को आखिरी बार उनका उनके परिवार से संपर्क हो पाया था. क्योंकि घाटी में दूरसंचार सेवाएं बर्फबारी से ठप हो गई थीं, इसलिए वह घर पर परिजनों से संपर्क नहीं कर पाई. उनके पिता ने सरकार से मदद की गुहार लगाई थी. प्रियंका को आखिरकार भारतीय सेना की ओर से घाटी से रेस्क्यू किया गया था. उन्हें 12 लोगों के साथ मनाली लाया गया था.

    प्रियंका कहती है कि 96 घंटे से हम लापता थे. घर परिवार से कोई संपर्क नहीं हो रहा था. मेरे लिए यह काफी चुनौतीपू्र्ण था. जब मौसम बदला तो हमें खुद को बचाने के लिए कुछ कड़े और तर्कसंगत फैसले लेने पड़े, लेकिन मौसम की बेरुखी नियंत्रण से बाहर थी.

    हमले केवल यह तय किया कि हमें जीने के लिए बस खाना, छत और बिस्तर मिल जाए. इस दौरान हमने लोगों से मदद मांगी और भगवान से भी प्रार्थना की. इस दौरान हम कई किलीमीटर पैदल चले और जब भी हम थोड़ा सा भी निराश होते तो अगले टूर की प्लानिंग करते.

    एक शख्स को बचाने की कोशिश, तीन रातें नहीं सोए
    प्रियंका अपनी फेसबुक वॉल पर लिखती हैं कि हमने एक शख्स को बचाने के लिए कोशिश भी की, लेकिन उसे हाईपोथर्मिया हो गया. प्रियंका लिखती हैं कि इस दौरान हम तीन दिन तक सोए नहीं. यही सोचते रहे कि हमारे परिवार वाले ठीक होंगे और वह हमारे बारे में क्या सोच रहे होंगे?

    भारतीय सेना का शुक्रिया
    प्रियंका को भारतीय सेना ने घाटी से रेस्क्यू किया. इसके लिए उन्होंने भारतीय सेना का आभार जताया और कहा, हम हमेशा सेना के कर्जदार रहेंगे. साथ ही हमारे परिवार का भी शुक्रिया, जिन्होंने हमें इस बदहाली से बाहर निकालने में मदद की.

    सितंबर में पहली बार हुई इतनी बर्फबारी
    हिमाचल प्रदेश में 21 से लेकर 23 सिंतबर तक हुई भारी बारिश और बर्फबारी की वजह से सैंकड़ों जानें मौत के मुंहाने पर थी. एक बार फिर से भारतीय सेना इनके लिए सहारा बनी और इन्हें रेस्क्यू किया. सीएम जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सितंबर महीने में 1955 के बाद लाहौल और रोहतांग पास में पहली बार इतनी बर्फबारी हुई है. बता दें कि रोहतांग और लाहौल घाटी में 4 से पांच फीट बर्फ शनिवार से लेकर सोमवार तक गिरी.

    25 सितंबर को 305 लोग बचाए गए
    सेना की ओर से रोहतांग टनल और एयरफोर्स हेलिकॉप्टर से 305 लोगों को लाहौल वैली से निकाला गया है. वायुसेना के तीन चॉपर बचाव अभियान में लगे हुए हैं. बुधवार को उम्मीद जताई जा रही है कि घाटी में फंसे हुए 400 से 500 और लोगों को निकाल लिया जाएगा. फिलहाल, हिमाचल में मौसम साफ हो गया है. बीते दो दिन से पूरे प्रदेश में धूप खिली हुई है.

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