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VIDEO : जंगली जानवरों से परेशान हैं 10 लाख किसान-बागवान, बंदरों ने किया नाक में दम

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 16, 2019, 3:49 PM IST
VIDEO : जंगली जानवरों से परेशान हैं 10 लाख किसान-बागवान, बंदरों ने किया नाक में दम
किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि बंदरों को मारना किसानों के बस में नहीं है.

किसान सभा ने बंदरों की नसबंदी को हास्यास्पद करार दिया. किसान सभा का कहना है कि एक तरफ बंदरों को मारने की इजाजत दी गई है और दूसरी तरफ नसबंदी की जा रही है.

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शिमला. प्रदेश के लाखों किसान बागवान जंगली जानवरों (Forest Animals) की समस्या से जूझ रहे हैं. जंगली जानवर हर साल करोड़ों की फसल (Crop) चट कर जाते हैं. हिमाचल प्रदेश किसान सभा (Himachal Pradesh Kisan Sabha) ने जंगली जानवरों की समस्या से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को नाकाफी बताया है. समस्या का निपटारा न होने के विरोध में जल्द ही बड़ा आंदोलन (Agitation) करने का एलान किया है. किसान सभा का कहना है कि प्रदेश के 10 लाख से ज्यादा किसान-बागवान (Ten lakh Farmers) जंगली जानवरों (Wild Animals) के उत्पात से परेशान हैं. विभिन्न तरह के जानवरों ने किसानों को परेशान कर रखा है. सबसे ज्यादा परेशानी बंदरों (Monkeys) से है. समस्या इतनी गंभीर है कि कई किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है. किसान सभा का कहना है कि बंदरों को वर्मिन घोषित करना मात्र समस्या का हल नहीं है. बंदरों को मारने के लिए ट्रेंड शूटर की तैनाती होनी चाहिए. शहरों और गांवों में नोडल एजेंसियों की तैनाती की जानी चाहिए.

बंदरों को मारना किसानों के बस में नहीं

किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर का कहना है कि बंदरों को मारना किसानों के बस में नहीं है. अब तक पूरे प्रदेश में 50 हजार से ज्यादा बंदरों को जहर देकर मारा गया है. यह कदम सही नहीं है. डॉ. तंवर ने सरकार से मांग की है कि बंदरों को मारने के बजाए बायोमेडिकल रिसर्च के लिए निर्यात करने पर विचार किया जाए. कई देशों में रिसर्च के लिए बंदरों की खासी मांग है. किसान सभा ने बंदरों की नसबंदी को हास्यास्पद करार दिया. किसान सभा का कहना है कि एक तरफ बंदरों को मारने की इजाजत दी गई है और दूसरी तरफ नसबंदी की जा रही है.

किसान सभा ने कहा कि एक तरफ बंदरों को मारने की अनुमति दी गई है दूसरी तरफ बंदूक लाइसेंस रिन्यू करने की फीस 300 से बढ़ाकर 1700 रुपए कर दिया गया.


बंदूक की लाइसेंस फीस बढ़ाने पर उठाए सवाल

साथ ही बंदूक की लाइसेंस फीस को लेकर भी सवाल उठाए हैं. किसान सभा का कहना है कि एक तरफ बंदरों को मारने की अनुमति दी गई है दूसरी तरफ बंदूक लाइसेंस को रिन्यू करने की फीस 300 से बढ़ाकर 1700 रुपए कर दिया गया है. प्रदेश में मात्र 65 हजार किसानों के पास बंदूकें है. इसके अलावा सोलर फेंसिंग से लेकर अन्य कई तरह के उपाय सरकार की ओर से किए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी योजना ऐसी नहीं है जो धरातल पर उतरी है और जंगली जानवरों की समस्या हल हो पाया है. अब किसानों के पास आंदोलन के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है.


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First published: November 16, 2019, 3:49 PM IST
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