शिमला: शहीद बेटे के नाम पर ट्रस्ट बनाकर पिता भर रहे गरीब बच्चों की फीस

घटना 15 सितंबर 2012 की है, जब द्रास-बटालिक सेक्टर में सीमा की रक्षा करते हुए हिमाचल के बिलासपुर के कैप्टन नितिन गौतम दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे. अब बेटे की पेंशन और दूसरी सुविधाएं भी देश के नाम कर दी हैं.

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पुलवामा आतंकी हमले में देश ने अपने कई वीर जवानों को खोया है. हर कोई उन जवानों की शहादत को याद कर रहा है. बहरहाल, इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक माता-पिता ने अपने बेटे को देश को समर्पित कर दिया और उस बेटे ने अपनी जान देश पर न्यौछावर कर दी. बता दें कि महज 25 साल की उम्र में देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले नितिन गौतम वर्ष 2012 में दुश्मनों से लोहा लेते वक्त वीरगति को प्राप्त हो गए थे.



घटना 15 सितंबर 2012 की है, जब द्रास-बटालिक सेक्टर में सीमा की रक्षा करते हुए हिमाचल के बिलासपुर के कैप्टन नितिन गौतम दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे. नितिन गौतम के पिता कामेश्वर गौतम ने न्यूज़ 18 से खास बातचीत में बताया कि एलओसी पर तनाव था और 14 सितंबर की रात को नितिन गौतम ने उन्हें फोन कर बताया कि आज रात को वो और उनकी पलटन पेट्रोलिंग पर रहेगी. इसलिए वो सुबह 9 बजे ही बात कर पाएगा, लेकिन अगले दिन 15 सितंबर को सुबह घर पर फोन आया कि नितिन वीरगति को प्राप्त हो गए हैं.



पिता कामेश्वर गौतम ने कहा कि वे खबर सुनने के बाद डगमगाए नहीं बल्कि गर्व उन्हें था कि बेटा देश के लिए शहीद हुआ है. मूल रूप से बिलासपुर से ताल्लुक रखने वाले नितिन गौतम को खोने के बाद भी माता और पिता ने अपने साहस को नहीं खोया. बता दें कि बेटे के जाने के बाद उसकी पेंशन और दूसरी सुविधाएं भी देश के नाम कर दी.





पिता कामेश्वर गौतम के प्रयासों के बाद कैप्टन नितिन गौतम के नाम का ट्रस्ट बनाया गया है, जो समाजसेवा में लगा है. पिता कामेश्वर गौतम ने बताया कि ट्रस्ट के माध्यम से अब तक कई बच्चों की फीस भरी गई है. सैनिक स्कूल टीहरा में ट्रस्ट की मदद से ही कैप्टन नितिन गौतम लिटरेरी ट्रॉफी शुरू की गई है. दो मंदिर भी बनाए गए हैं और बिलासपुर में पानी के स्थान का जीर्णोद्धार के अलावा बिलासपुर अस्पताल में फूड ट्रॉली दी. अब इस साल 4 गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा भी ट्रस्ट उठाने जा रहा है.
माता-पिता की मेहनत से शिमला स्थित घर में शहीद नितिन गौतम की यादों से भरा संग्रहालय तैयार किया गया है. यहां नितिन गौतम की बचपन से लेकर सैनिक बनने तक की वो सारी चीजें हैं, जिससे वो बड़ा प्यार करता था. मां सुमन गौतन का कहना है कि संग्रहालय में रखी तस्वीर में नितिन हमेशा हंसता रहता है, जिसे देखकर मैं भी हंसती हूं.



कैप्टन नितिन गौतम सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा से सैनिक बनकर निकले थे. वर्ष 2010 में आईएमए पासआउट हुए थे, लेकिन आज उनकी यादें ही बची हैं. माता-पिता उनकी यादों को संजोकर रखे हुए हैं. उन्हें अपने बेटे पर नाज भी है.



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