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नमामि गंगे की तर्ज पर हिमाचल में सतलुज नदी का होगा पुनरुद्धार

सतलुज बेसिन पर विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे, घास एवं वनस्पतियां उगा कर भूमि कटाव की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाई जाएगी.

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हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला द्वारा सतलुज नदी का वानिकी गतिविधियों के माध्यम से पुनरूद्धार के लिए विस्तुत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए परामर्श बैठक का आयोजन किया गया. वन विभाग के अलावा विभिन्न विभागों से आए अधिकारियों से परामर्श लिए गए. सतलुज नदी बेसिन में विभिन्न प्रकार के वानिकीकरण से भूमि कटाव रोकने के लिए डीपीआर तैयार की जाएगी. सतलुज बेसिन पर विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे, घास एवं वनस्पतियां उगा कर भूमि कटाव की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाई जाएगी.

केंद्र सरकार की योजना के तहत नदी का होगा पुनरूद्धार

Satluj River-सतलुज नदी
सतलुज नदी के पुनरूद्धार के लिए विस्तार से परियोजना तैयार की जा रही है. यह केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है.




सतलुज नदी के पुनरूद्धार के लिए विस्तार से परियोजना तैयार की जा रही है. यह केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसे हिमाचल जैसे कठिन क्षेत्र में भी क्रियान्वित किया जाना है. इसकी डीपीआर आगामी मार्च तक तैयार कर केंद्र को भेजी जाएगी और मार्च 11 तक परियोजना कार्य आरंभ किया जा सकेगा.
नदी में सिल्ट की मात्रा पर भी लगाया जाएगा अंकुश

फार्मर को-आपरेटिब फेडरेशन हिमोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रणजीत मिन्हास ने हिमाचल प्रदेश जल संरक्षण की विभिन्न प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने परियोजना के महत्वपूर्ण तकनीकि पहलुओं के बारे में बताया और कई तरह के सुझाव भी दिए. उन्होंने बताया कि सतलुज बेसिन पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों, घास, औषधीय पौधे लगा कर भूमि कटाव को रोका जा सकता है. इससे सतलुज बेसिन का सौंदर्यीकरण भी होगा और नदी में सिल्ट की मात्रा पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा.

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