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शिमला जिले की आठ में से तीन सीटों पर माकपा व निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं खेल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा
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हिमाचल की राजनीति में माना जाता है कि सत्ता के गलियारों तक पहुंचना है तो उसका रास्ता कांगड़ा, मंडी और शिमला होते हुए जाता है. इसकी वजह यह है कि कांगड़ा, मंडी और शिमला में सबसे ज्यादा सीटें हैं.

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हिमाचल की राजनीति में माना जाता है कि सत्ता के गलियारों तक पहुंचना है तो उसका रास्ता कांगड़ा, मंडी और शिमला होते हुए जाता है. इसकी वजह यह है कि कांगड़ा, मंडी और शिमला में सबसे ज्यादा सीटें हैं.

कांगड़ा में 15, मंडी में 10 और शिमला में 8 सीटें हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक दल इन तीन जिलों पर ज्यादा फोकस करते हैं.

शिमला जिला में शिमला शहरी, शिमला ग्रामीण, ठियोग, चौपाल, कुसुम्पटी, जुब्बल-कोटखाई, रामपुर और रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, जिसमें रामपुर और रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने छह सीटों पर कब्जा जमाया था. एक सीट चौपाल में निर्दलीय उम्मीदवार बलवीर वर्मा जीते थे, जबकि बीजेपी को शिमला शहरी सीट से ही संतोष करना पड़ा था.



निर्दलीय उम्मीदवार बलवीर वर्मा ने पहले तो कांग्रेस सरकार को बाहर से समर्थन दिया लेकिन अब वे बीजेपी के टिकट पर चौपाल से चुनावी मैदान में उतरे हैं. इस बार भी शिमला की आठ सीटों पर रोचक जंग होना तय है. कांग्रेस-बीजेपी ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सीपीआईएम और निर्दलीय कई सीटों पर दोनों बड़े दलों के समीकरण बिगाड़ रहे हैं.
वर्ष 2012 के चुनाव में शिमला ग्रामीण से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार वीरभद्र सिंह जीते थे, जबकि शिमला शहरी से बीजेपी के सुरेश भारद्वाज, कुसुम्पटी में कांग्रेस के अनिरूद्ध सिंह, ठियोग से विद्या स्टोक्स, चौपाल से निर्दलीय बलवीर वर्मा, रामपुर से कांग्रेस के नंदलाल, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा और जुब्बल कोटखाई से रोहित ठाकुर चुनाव जीते थे.
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