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Tokyo Olympics-2020: हॉकी खिलाड़ी वरुण कुमार को हिमाचल सरकार देगी 75 लाख रुपये ईनाम

हॉकी खिलाड़ी वरुण कुमार चंबा जिले से हैं. (तस्वीर वरुण के ट्वीटर अकाउंट से ली गई है)

हॉकी खिलाड़ी वरुण कुमार चंबा जिले से हैं. (तस्वीर वरुण के ट्वीटर अकाउंट से ली गई है)

Tokyo Olympics 2021: चंबा जिले के डलहौजी उपमंडल की ओसल पंचायत के खलंदर गांव निवासी वरुण कुमार का जन्म 25 जुलाई 1995 को हुआ था. वर्तमान में वह परिवार सहित पंजाब के जालंधर में रह रहे हैं. वरुण ने पढ़ाई डीएवी स्कूल से की है.

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शिमला. टोक्यो ओलंपिक-2020 (Tokyo Olympics-2020) में भारतीय हॉकी टीम ने बीते करीब 50 साल का मेडल का सूखा खत्म किया है. गुरुवार को जर्मनी के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारत ने जीत हासिल की और 49 साल ओलंपिक में पदक जीता. देश भर में भारत की जीत पर लोगों ने जश्न मनाया. टीम में हिमाचल में जन्में और शुरुआती पढ़ाई करने वाले वरुण कुमार को सीएण जयरा ठाकुर ने इनाम देने का ऐलान किया है. ब्रॉंज मेडल जीतने वाली टीम इँडिया का हिस्सा रहे ‌वरुण के अलावा, भारतीय टीम को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बधाई दी.

शिमला में विधासभा परिसर में मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक लाने वाली हाकी टीम के खिलाड़ी वरुण कुमार मूलरूप से चंबा जिले के डलहौजी के रहने वाले हैं. वरुण कुमार को हिमाचल प्रदेश सरकार 75 लाख रुपये नकद देगी. सीएम ने कहा कि हमें प्रसन्नता है कि हाकी टीम ने ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन किया. वरुण परिवार सहित जालंधर के मिट्ठापुर गांव में रहते हैं. पंजाब सरकार भी उन्हें एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार देगी.

 चंबा से हैं वरुण कुमार

चंबा जिले के डलहौजी उपमंडल की ओसल पंचायत के खलंदर गांव निवासी वरुण कुमार का जन्म 25 जुलाई 1995 को हुआ था. वर्तमान में वह परिवार सहित पंजाब के जालंधर में रह रहे हैं. वरुण ने पढ़ाई डीएवी स्कूल से की है. पंजाब के जालंधर में शिक्षा ग्रहण करने के बाद वरुण अब भारत पेट्रोलियम कंपनी नोएडा में सेवाएं दे रहे हैं. उधर, बेटे की उपलब्धि से परिजनों में खुशी का माहौल है. परिवार ने पदक जीतने के बाद वीडियो कॉल पर वरुण से बात की है.

आशा ने रखी मांग

वरुण कुमार चंबा के डलहौजी से हैं और यहां की विधायक आशा कुमारी ने सरकार से मांग कि थी कि उन्हें सरकारी नौकरी और इनाम दिया जाए. हालांकि, बाद में सीएम जयराम ठाकुर ने इनाम की घोषणा कर दी थी. बता दें कि आज से ठीक 57 साल पहले भारत की टीम ने 1964 में गोल्ड मेडल जीता था और हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के पद्मश्री चरणजीत सिंह उस दौरान भारतीय टीम के कप्तान थे. उन्होंने भी भारत की जीत पर खुशी जताई और कहा कि भारतीय टीम ने दमदार प्रदर्शन किया.

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