ओवरलोडिंग करने वालों की अब खैर नहीं, SC की गाइडलाइन्स के तहत होगा काम

नुरपूर हादसे ने पूरा प्रदेश झकझोर कर रख दिया है. बस हादसे ने 24 बच्चों की जान ले ली थी. अब इस हादसे से सबक लेते हुए सरकार ने निजी स्कूलों के लिए एडवाइजरी भी जारी कर दी है.


Updated: April 17, 2018, 4:51 PM IST
ओवरलोडिंग करने वालों की अब खैर नहीं, SC की गाइडलाइन्स के तहत होगा काम
एचआरटीसी की ओवरलोडिड बस.

Updated: April 17, 2018, 4:51 PM IST
हिमाचल में ओवरलोडिंग की बढ़ती घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है. नुरपूर हादसे के बावजूद भी सबक न लेते हुए कई स्थानों पर ओवरलोडिंग हो रही है. जो एक बड़ा खतरा बन गया है. ओवरलोड़िंग से निपटने के लिए परिवहन विभाग अब सुड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने जा रहा है.

नुरपूर हादसे ने पूरा प्रदेश झकझोर कर रख दिया है. बस हादसे ने 24 बच्चों की जान ले ली थी. अब इस हादसे से सबक लेते हुए सरकार ने निजी स्कूलों के लिए एडवाइजरी भी जारी कर दी है, लेकिन प्रदेश में ओवरलोडिंग के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं.

लगातार बढ़ रहे इन मामलों पर लगाम लगाने के लिए अब परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने सभी आरटीओ को निर्देश जारी किए हैं कि वे वाहनों की रूटीन चेकिंग करें. साथ ही सुप्रीम कोर्ट की 25 गाइडलाइन का सही तरीके से पालन करने के भी निर्देश जारी किए हैं.

23 से 30 अप्रैल तक सड़क सुरक्षा सप्ताह

हिमाचल में बढ़ रहे हादसों को देखते हुए 23 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने का भी फैसला किया गया है. इसमें जगह-जगह मैराथन दौड़े भी होंगी. वाहनों के चालकों के स्वास्थ्य की जांच भी की जाएगी. बच्चों में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी की जाएंगी. परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर का कहना है कि जागरूकता के जरिए भी सड़क सुरक्षा को लेकर काम किया जाएगा.

सड़क सुरक्षा बड़ा मुददा
हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में सड़क सुरक्षा एक बड़ा मुददा बन गया है. सड़क हादसे राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया है, जिसे देखते हुए असम के गोवाहाटी में सड़क सुरक्षा को लेकर ऑल इंडिया ग्रुप ऑफ मिनिस्टरर्ज की बैठक होने जा रही है.

18 और 19 अप्रैल को होने वाली इस बैठक को केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुलाया है. हिमाचल के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर भी गुवाहाटी रवाना हो गए हैं.

इस बैठक में नुरपूर हादसा भी चर्चा का विषय रह सकता है. देखना यह होगा कि सड़क सुरक्षा के लिए प्रदेश की पहल कितना कारगर साबित होती है और नियमों की अनुपालना कितनी गंभीरता से होती है?
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