टीचर्स-डे: आर्कषण का केंद्र रहे चंबा के 26 वर्षीय शिक्षक युद्धबीर, इसलिए मिला सम्मान

News18 Himachal Pradesh
Updated: September 5, 2019, 5:14 PM IST
टीचर्स-डे: आर्कषण का केंद्र रहे चंबा के 26 वर्षीय शिक्षक युद्धबीर, इसलिए मिला सम्मान
चंबा के स्कूल शिक्षक युद्धबीर टंडन

1993 में जन्में युद्धबीर ने न्यूज-18 से बातचीत में बताया कि सितंबर 2016 में वह चंबा के हणोगा स्कूल में तैनात हुए थे. वहीं बीते तीन साल से कार्यरत हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) में गुरुवार को टीचर्स-डे (Teacher's Day) पर राज्यस्तरीय सम्मान समारोह में 13 टीचर्स को बेहतरीन कार्यों के लिए सम्मानित किया गया. इन तेरह शिक्षकों में 26 के शिक्षक युद्धवीर टंडन ने सबकी ओर अपना ध्यान खींचा. चंबा के प्राइमरी स्कूल हणोगा में तैनात युद्धवीर टंडन ने स्कूल में अलग प्रयास करते हुए अपनी पहचान बनाई और सरकार की ओर से उन्हें नवाजा गया.

2016 से पढ़ाना शुरू किया
शिमला में समारोह के बाद 1993 में जन्में युद्धबीर ने न्यूज-18 से बातचीत में बताया कि सितंबर 2016 में वह हणोगा स्कूल में तैनात हुए थे. वहीं बीते तीन साल से कार्यरत हैं. स्कूल में मुश्किलों के सवाल पर युद्धबीर कहते हैं कि ज्यादा परेशानियां तो नहीं हुई, लेकिन, क्योंकि यह इलाका काफी दुर्गम है और चंबा जिला मुखालय से दूर है. ऐसे में संसाधनों के यहां पहुंचाने में परेशानी आती है. हालांकि, युद्धबीर ने कहा कि अध्यापक सबसे बड़ा संसाधन है.

स्कूल में यह किया

युद्धीबर ने बताया कि देश के अलग-अलग कार्यं देशभर के स्कूलों में हो रहे हैं. उन्हें मैं अपने स्कूल में लागू करूं. उन्होंने बताया कि ‘नन्हें उस्ताद’ नाम से बाल समाचार पत्रिका शुरु किया है. इसे आठ महीने तक चलाया गया है. फिलहाल, यह प्रकाशित नहीं हो रहा है, लेकिन जल्द ही फिर से इसे शुरू किया जाएगा.

स्वच्छता को लेकर प्रयास
इसके अलावा, स्कूल में स्वच्छता को लेकर प्रोत्साहित किया है. स्कूल का जो भी बच्चा सबसे साफ कपड़े और साफ-सुथरा बनकर स्कूल में आता है तो प्रार्थना सभा में उसे सम्मानित किया जाता है. स्वच्छता मंत्री और बाल मंत्रीमंडल बच्चे का चयन करते हैं.
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ईमानदारी की दुकान
इसके अलावा, स्कूल में ईमानदारी की दुकान भी स्कूल में शुरू की है. यह कंसेप्ट जापान से लिया गया है, जहां दुकानदार दुकान में मौजूद नहीं होता है और ग्राहक सामान की कीमत दुकान के एक बॉ़क्स में छोड़ जाता है. इसी तरह की दुकान स्कूल में है और बाल बचत बैंक भी शुरू किया गया है. इससे बैंकिग की भी जानकारी बच्चों को मिलती है.युद्धबीर बताते हैं कि 2016 में जब उन्होंने स्कूल ज्वाइन किया था तो 7 बच्चे स्कूल में थे. लेकिन अब 25 बच्चे स्कूल में हो गए हैं.

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First published: September 5, 2019, 5:06 PM IST
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