हिमाचल में UG कक्षाओं के एग्जाम या प्रमोट होंगे छात्र? शिक्षा विभाग ने दिया ये जवाब

हिमाचल में कॉलेज के एग्जाम. (सांकेतिक तस्वीर)
हिमाचल में कॉलेज के एग्जाम. (सांकेतिक तस्वीर)

Under Graduate classes exam in Himachal: कैबिनेट की बैठक में यूजी के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों की परीक्षाओं को लेकर सरकार फ़ैसला लेगी और स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के कॉलेज के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों के भविष्य का फैसला अब सरकार के हाथों में है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि अभी केवल कॉलेज (College) के अंतिम सेमेस्टर की ही परीक्षाएं (Exams) हुई हैं. लेकिन एक बात ये भी देखी जा रही है कि परीक्षाएं करवाने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है और ऐसे में अगर परीक्षाएं करवाई जाती है तो छात्रों के समय पर परिणाम नहीं आ पाएंगे. ऐसे में कॉलेज के पहले और दूसरे वर्ष की परीक्षाएं होगी या नहीं इस पर फैसला आना अभी बाकी है.

कोरोना महामारी से पैदा हुई स्थिति के चलते प्रदेश में परीक्षाएं नहीं करवाई गई हैं, लेकिन हिमाचल में कॉलेज के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं सफलता पूर्वक पूरी की जा चुकी हैं. वहीं अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं होंगी भी या इन छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही अगली कक्षाओं में प्रमोट किया जाएगा. छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं.

विभाग ने भेजा प्रस्ताव



शिक्षा विभाग का कहना है कि उनकी ओर से प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया गया है. प्रस्ताव में ये विकल्प भी दिया गया है कि बिना परीक्षाओं के भी छात्रों को अगली कक्षा में प्रोमोट किया जा सकता है. अगर परीक्षाएं करवानी है तो उसके लिए जल्द से जल्द निर्णय लेने की बात भी शिक्षा विभाग की ओर से कही गई है, ताकि समय रहते परीक्षाएं करवाई जा सके और समय से ही छात्रों का परिणाम भी घोषित किया जा सके. अब जब परीक्षाओं को करवाने में पहले ही बहुत देरी हो चुकी है तो सरकार की ओर से यूजी के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही अगली कक्षाओं में प्रमोट करने का फैसला लेने की संभावना है, लेकिन इस पर अंतिम मुहर कैबिनेट की बैठक में ही लगाई जाएगी. ऐसे में छात्रों को कैबिनेट की बैठक का इंतजार करना होगा जिससे कि उनके भविष्य को लेकर फैसला हो सकें.
क्या कहते हैं अधिकारी

शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ अमरजीत कुमार शर्मा का कहना है कि अगर सरकार परीक्षाओं को करवाने का फैसला लेती है तो विभाग उसके लिए भी तैयार है. अगर इन छात्रों की भी परीक्षाएं करवानी है तो उसके लिए फैसला जल्दी होना चाहिए, जिससे कि समय रहते यह परीक्षाएं हो सके. नहीं तो, छात्रों को उनकी पिछली कक्षाओं के परफॉर्मेंस के आधार पर और इंटरनल एसेसमेंट के परफॉर्मेंस के आधार पर ही अगली कक्षाओं में प्रमोट किया जाना चाहिए. इसका विकल्प शिक्षा विभाग ने अपने प्रस्ताव में भी दिया है. सभी विकल्प शिक्षा विभाग की ओर से अपने प्रस्ताव में शामिल किए गए हैं. अब शिक्षा सचिव की ओर से सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा जाएगा, जिसके बाद अगली कैबिनेट की बैठक में यूजी के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों की परीक्षाओं को लेकर सरकार फ़ैसला लेंगे और स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी. अभी विभाग की ओर से इन छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही अगले कक्षाओं में इनरोल कर दिया गया है और इन्हें प्रोविजनली एडमिशन अगले कक्षाओं में दे दी गई है.
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