अनसेफ भवनों को खाली करने के लिए पुलिस बल का भी होगा इस्तेमाल

कुम्मारहट्टी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन जागा है. शिमला के अनसेफ भवनों पर प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है.

Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 18, 2019, 4:45 PM IST
अनसेफ भवनों को खाली करने के लिए पुलिस बल का भी होगा इस्तेमाल
शिमला - असुरक्षित भवनों को चिन्हित करने के लिए बनाई गई है कमेटी
Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 18, 2019, 4:45 PM IST
कुम्मारहट्टी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन जागा है और तुरंत प्रभाव से कार्रवाई भी कर रहा है. राजधानी की बात की जाए तो शिमला के अनसेफ भवनों पर प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. बता दें कि कुम्मारहट्टी के बाद कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं कि अनसेफ भवनों को हटाया जाए. असुरक्षित भवनों की पहचान करने के लिए नगर निगम ने एक कमेटी तैयार की है. बुधवार को शिमला में कमेटी ने 11 और भवनों को असुरक्षित घोषित कर दिया है. अब शिमला में असुरक्षित भवनों की संख्या 60 से ऊपर पहुंच गई है. वहीं असुरक्षित भवनों के बिजली और पानी के काटने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं. लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं. अगर कोई भवन खाली नहीं करता है तो पुलिस बल का भी इस्तेमाल किया जाएगा.

असुरक्षित घरों को खाली करने के लिए नोटिस

लेकिन जिन असुरक्षित घरों को खाली करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं, उन्हें खाली कराने के लिए निगम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. भवनों में किराए पर रह रहे लोग घर खाली करने से इंकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि इतने कम किराए में उन्हें दूसरी जगह नहीं मिलगी. वहीं मकान मालिक चाहते हैं कि घर खाली हो जाए. लेकिन विवाद के चलते मामला कोर्ट में लम्बित पड़ा है. कुछ भवनों को रिपेयर करने के आवेदन भी निगम के पास आए हैं. जिन भवनों की रिपेयर हो सकती है, उन्हें अनुमति दी जा रही है. लेकिन जो भवन जर्जर हालत में हैं, उन्हें गिराने के अलावा निगम के पास कोई और चारा नहीं है.

जो भवन जर्जर हालत में हैं, उन्हें गिराने के अलावा निगम के पास कोई और चारा नहीं है.


असुरक्षित भवनों को हटाना एक सराहनीय कदम है. लेकिन जो लोग इन भवनों में रह रहे हैं या अपनी दुकानें चलाते हैं वो कहा जाएंगे. कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनके पास न तो कोई और ठिकाना है और न रोजगार का कोई और साधन. मकान मालिकों के साथ जो किराएदारों का कोर्ट में मामला चल रहा है वो अलग ही मसला है.

एक ओर जहां अनसेफ भवनों पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे भवनों में रहने वालों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है. नगर निगम ने भी साफ कह दिया है कि अनसेफ भवनों में रहने वालों के लिए उनके पास कोई प्रावधान नहीं है. ये भवन अभी नहीं बल्कि 4 साल पहले असुरक्षित घोषित कर दिए गए थे. यहां रहने वाले लोगों ने इतने समय से अपने लिए कोई प्रवधान क्यों नहीं किया. वहीं प्रशासन ने भी इतने समय से इन लोगों पर और भवनों को लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. ऐसे में सवाल दोनों तरफ से खड़े हैं. लेकिन समाधान कहीं नजर नहीं आ रहा है.

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First published: July 18, 2019, 4:45 PM IST
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