एपीजी यूनिवर्सिटी के रिश्वत के पेट्रोल से चल रही पुलिसवाले की गाड़ी!

यूनिवर्सिटी प्रशासन पुलिसवालों की प्राइवेट गाड़ी में पेट्रोल भरवा रही है. इस खेल को यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस म्यूचल अंडरस्टेंडिंग का नाम दे रहे हैं.

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 21, 2019, 9:16 PM IST
Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 21, 2019, 9:16 PM IST
हिमाचल प्रदेश की एपीजी यूनिवर्सिटी और शिमला की स्मार्ट पुलिस के बीच पिछले काफी समय से गज़ब का खेल चल रहा है. यूनिवर्सिटी प्रशासन पुलिस वालों की प्राइवेट गाड़ी में पेट्रोल भरवा रही है. इस खेल को यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस म्यूचल अंडरस्टेंडिंग का नाम दे रहे हैं. अब सवाल यह उठता है कि क्या शिमला पुलिस इतनी गरीब है कि उसके पास पेट्रोल भरने के भी पैसे नहीं है, या फिर इस खेल के पीछे भी कोई खेल चल रहा है.

APG यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और डीएसपी के बीच बातचीत के अंश

Bribe of petrol-पेट्रोल की रिश्वत
एपीजी प्रशासन की ओर से एक वॉउचर काटा गया जिसमें यह लिखा गया कि HP 52 A 7443 नंबर की गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरा जाए.


APG यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार सहगल साहब पुलिस की शान में कसीदे पढ़े जा रहे हैं. शुक्ला साहब कह रहे हैं-मजबूरी है... जिस चौकी के अधिकार क्षेत्र में यह प्राइवेट यूनिवर्सिटी आती है, उस चौकी के पास कोई भी गाड़ी नहीं है. यह भी ताज्जुब की बात है कि सरकार ने चौकी के लिए कोई गाड़ी नहीं उपलब्ध कराई. अब ऐसे में यूनिवर्सिटी पुलिस वालों पर मेहरबानी कर रही है और उनकी गाड़ियों में पेट्रोल भरवा रही है.

एपीजी यूनिवर्सिटी ने इन नंबरों की गाड़ियों में भरवाया तेल

8 नवंबर 2016 ...HP 03 D-0471...2400 रुपये

16 जून 2019...HP 52 A 7443... 2220 रुपये
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11 जून 2019....HP 64 A 4689...2237 रुपये

28 मई 2019...HP 64 A 4689...2200 रुपये

तेल भरवाने का दिया गया आदेश

23 मई 2019 को एपीजी प्रशासन की ओर से एक वॉउचर काटा गया जिसमें यह लिखा गया कि HP 52 A 7443 नंबर की गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरा जाए. हुक्म तामिल की गई और उक्त नंबर की गाड़ी में 29 जून 2019 को 1440 रुपए का पेट्रोल भरा गया.

पेट्रोल भरवाते पुलिसवाले कैमरे में कैद हो गए

इन सभी नंबर की गाड़ियों में विकासनगर के एक पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाए गए हैं. हवाला इस बात का दिया जा रहा है कि चौकी के पास गाड़ियां नहीं है और यूनिवर्सिटी अपने इलाके में पेट्रोलिंग करवाने के लिए विश्वविद्यालय की मदद कर रहा है. इस बारे में पुलिस कह रही है कि जांच करेंगे कि इस पेट्रोल से पेट्रोलिंग हुई या नहीं. यह कैसे प्रूफ होगा. प्राइवेट गाड़ी में लॉग तो भरी ही नहीं जाती है. ऐसे में पुलिस कैसे जांच करेगी, इसका उत्तर पुलिस वाले ही दे सकेंगे.

यूनिवर्सिटी की अपनी मजबूरी

यूनिवर्सिटी कई कारणों से विवादों में रहती है. कई मामले इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी के खिलाफ दर्ज होते हैं और ऐसे में उन्हें पुलिसवालों की खिदमत करनी ही पड़ती है. यूनिवर्सिटी की बसें और दूसरी गाड़ियां बिना पासिंग के चल रही है. छात्रों और स्टाफ के सदस्यों को लाने और छोड़ने के लिए इन बसों और गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. यूनिवर्सिटी की सभी गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट 4 नवंबर 2016 तक ही के बने थे.

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First published: July 21, 2019, 2:47 PM IST
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