स्वास्थ्य मंत्री को 'नारद मुनि' कहकर फंसे कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह, जानिए पूरा मामला

विक्रमादित्य सिंह ने कहा था,

विक्रमादित्य सिंह ने कहा था, "स्वास्थ्य मंत्री 'नारद मुनि' हैं, यहां गए तो यहां की बात वहां गए तो वहां की बात करते हैं."

शिमला ग्रामीण से कांग्रेसी विधायक विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.राजीव सैजल को कल 'नारद मुनि' कह दिया था. इस पर सियासी बबाल मच गया है. बीजेपी ने इस बयान को अनुसूचित जाति वर्ग का अपमान बताया है और विक्रमादित्य को स्वास्थ्य मंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग से माफी मांगने को कहा है.

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शिमला. हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल को 'नारद मुनि' कहने पर सियासी बबाल मच गया है. शिमला ग्रामीण से कांग्रेसी विधायक विक्रमादित्य सिंह ने सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री को 'नारद मुनि' कहा था. उन्होंने सरकार को कोरोना की स्थिती से निपटने में नाकाम करार दिया था और अस्पतालों की खस्ता हालत को लेकर स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधा था. विक्रमादित्य सिंह ने कहा था, "स्वास्थ्य मंत्री 'नारद मुनि' हैं, यहां गए तो यहां की बात वहां गए तो वहां की बात करते हैं." उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य मंत्री जिम्मेदारी के साथ काम नहीं कर रहे हैं और न ही संवदेनशील हैं और न ही उनके पास आंकड़े होते हैं.

बीजेपी ने इस बयान को अनुसूचित जाति वर्ग का अपमान बताया है और विक्रमादित्य को स्वास्थ्य मंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग से माफी मांगने को कहा है. भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा है कि वह विक्रमादित्य सिंह की मजबूरी और भावना को समझते हैं कि क्यों इस तरह का बयान दिया. उन्होंने कहा कि किसी मंत्री को इस तरह की संज्ञा देना किसी विधायक को शोभा नहीं देता, वो भी पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को.

शर्मा ने कहा कि राजीव सैजल तीसरी बार चुनाव जीतकर आए हैं और स्वास्थ्य जैसा महत्वपूर्ण विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं. वह बात करने में नहीं बल्कि काम करने में विश्वास रखते हैं. उन्होंने कहा कि राजीव सैजल उस वक्त पीपीई किट पहनकर कोरोना वार्ड में मरीजों का हालचाल जानने और वार्ड का जायजा लेने के लिए गए थे. जब कोरोना से हर कोई डर रहा था और अब भी घर-घर जाकर कोरोना संक्रमितों का हाल जान रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह काम करने वाले व्यक्ति का अपमान है. रणधीर शर्मा ने कहा कि राजीव सैजल अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और ये बयान अनुसूचित जाति वर्ग का भी अपमान है. ऐसे में विक्रमादित्य सिंह को मंत्री के साथ साथ अनुसूचित जाति वर्ग से भी माफी मांगनी चाहिए.

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