हिमाचल में फिर सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ, बरसेंगे बादल-होगी बर्फबारी

मौसम में होने वाला परिवर्तन पूरी तरह से पश्चिमी विक्षोभ पर निर्भर करता है. मौसम के परिर्वतन होने के लिए पश्चिमी विक्षोभ का पूरी तरह सक्रिय होना जरूरी है.


Updated: February 15, 2018, 4:26 PM IST
हिमाचल में फिर सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ, बरसेंगे बादल-होगी बर्फबारी
शिमला में हाल ही में 12 फरवरी को बर्फबारी गिरी है.

Updated: February 15, 2018, 4:26 PM IST
बीते दो महीने से भी ज्यादा वक्त तक खामोश रहने वाले मौसम ने फरवरी में अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. एक बार फिर से हिमाचल में मौसम ने करवट ली है.

वीरवार को प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावनाएं जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, विटर सीज़न में इस बार करीब 90 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, जिसमें फरवरी में हुई बारिश और बर्फबारी से थोड़ी राहत जरूर हुई है.

प्रदेश में वीरवार को बारिश आर बर्फबारी की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, ऊपरी इलाकों में बर्फबारी की संभावना है. उधर,, तापमान न्यून्तम तापमान में एक से दो डिग्री बढ़ौतरी हुई है. शुक्रवार से प्रदेश में फिर से मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी. 20 फरवरी तक मौसम शुष्क बना रहेगा. मौसम विभाग के अनुसार, 21 से 23 फरवरी तक प्रदेश में फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा और बारिश और बर्फबारी होगी.

अब भी 37 फीसदी बारिश की जरूरत

मनीष राय, वैज्ञानिक, मौसम विभाग केंद्र शिमला, इन सर्दियों में प्रदेश में सामान्य से 90 फिसदी बारिश कम हुई दर्ज की गई थी. वहीं, फरवरी में बारिश और बर्फबारी से भी इसकी भरपाई नहीं हो पाई है. अब भी 53 प्रतिशत कम बारिश हुई है. सामान्य बारिश के लिए करीब 37 फीसदी बारिश की जरूरत है.

फरवरी में आने वाले दिनों में मौसम बिगडेगा. उससे प्रदेश में समान्य बारिश होने की संभावना है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि सर्दियों के मौसम में बारिश न हुई हो, इससे पहले 2011 में भी इस तहर का मौसम बना था.

विंटर सीजन में होनी चाहिए थी 147.1 मिमी बारिश
वर्ष 2018 में विंटर सीज़न की बात की जाए तो अब तक सामान्य से करीब 72 फीसदी कम बारिश हुई है. विंटर सीजन में 147.1 मिमी बारिश होनी चाहिए, लेकिन अब तक करीब 41.1 मिमी बारिश हुई है. जो सामान्य से करीब 72 प्रतिशत कम है. साल 2007, 2009, 2011 और 2016 में जनवरी में इसी तरह की स्थिति पैदा हो गई थी. इससे जल संकट गहरा गया था. ऐसे में सर्दियां बढ़ने की संभावनाएं पैदा हो जाती हैं.

विंटर सीजन में न्यूनतम तापमान बढ़ा
इस विंटर सीज़न में न्यूनतम तापमान में भी बढ़ौतरी दर्ज की गई है. आंकड़ों के अनुसार, इस बार जनवरी के महीने में सामान्य तापमान 2.4 होना चाहिए, लेकिन इस बार यह करीब 4.7 डिग्री रहा था.

मौसम में होने वाला परिवर्तन पूरी तरह से पश्चिमी विक्षोभ पर निर्भर करता है. मौसम के परिर्वतन होने के लिए पश्चिमी विक्षोभ का पूरी तरह सक्रिय होना जरूरी है. 2018 में पश्चिमी विक्षोभ स्ट्रांग नहीं हो पाया,जिस कारण इस वर्ष मौसम में कुछ खास बदलाव नहीं हो पाए हैं.
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