हादसों का हिमाचल! सूबे की सड़कों से रोज क्यों उठ रहे हैं ज़नाज़े?

साल 2019 के शुरुआती 5 महीनों में ही अब तक हिमाचल में 1168 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 430 लोगों की मौत हो चुकी है और 2155 लोग घायल हुए हैं.

News18 Himachal Pradesh
Updated: July 2, 2019, 12:56 PM IST
हादसों का हिमाचल! सूबे की सड़कों से रोज क्यों उठ रहे हैं ज़नाज़े?
हिमाचल में सड़क हादसे. (सांकेतिक तस्वीर.)
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Updated: July 2, 2019, 12:56 PM IST
तारीख 9 अप्रैल 2018. कांगड़ा के नरपुर में स्कूल बस हादसा. 24 मासूम बच्चों की मौत. 1 जुलाई 2019 को शिमला में स्कूल बस हादसा. दो छात्राओं की मौत. इन दो तारीखों के बीच हिमाचल में सड़क हादसों में अगर कुछ बदला है तो मौत का आंकड़ा. यह हादसा-दर-हादसा बढ़ता गया, लेकिन इसपर लगाम नहीं लगी.

20 जून 2019 को कुल्लू के बंजार में हादसा हुआ. बस खाई में गिरी. 46 लोगों की मौत हो गई. अब 1 जुलाई को शिमला में एचआरटीसी की स्कूल बस हादसे का शिकार हो गई और दो छात्राओं समेत तीन की मौत हो गई. पूरा प्रदेश गमजदा है, लेकिन हिमाचल में हादसे क्यों नहीं थम रहे हैं.

इस वजह से हादसे
सोशल वेलफेयर ऑफ इंडिया के सर्वे के अनुसार, हिमाचल में 80 फीसदी हादसों के पीछे ड्राइवर की लापरवाही और ओवरस्पीड मानी गई है. इसमें बड़े वाहन, खासकर, बसें हादसे का शिकार होती हैं. पांच फीसदी हादसे तकनीकी फैल्योर और बाकी 15 फीसदी हादसे सड़क की बदहाली की वजह से होता है.

यह महामारी से कम नहीं
हिमाचल में हादसों की अन्य वजहों की बात करें तो ब्लैक स्पॉट, सड़कों की खस्ता हालत, पैराफिट का न होना और कई बार मौसम की क्रूरता भी इंसानी जिंदगी को निगल लेती है. एक बड़ी वजह चालकों की सही तरीके से प्रशिक्षित न होना भी है. ड्राइविंग लाइसेंस देने में बड़ी धांधलियां होती हैं. लाइसेंस दिलवाने वाले एजेंट कुकरमत्तों की तरह उग आए हैं. खासकर HTV लाइसेंस पैसे के दम पर बनाए जाते हैं. अधिकतर निजी बसों और टैक्सी चालकों पैसे देकर ही लाइसेंस बनवाते हैं, तो कोई फर्जी लाइसेंस पर ही मौत के सफर निकल पड़ता है.

ये करें, ताकि कम हों सड़क हादसे
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हिमाचल में सड़क हादसों को रोकने के लिए खासा काम करने की जरूरत है. ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर उन्हें ठीक करना, पैराफिट लगाना, क्रैश बैरियर्स, सड़कों की हालत में सुधार, सड़क किनारों से अवैध पार्किंग हटाना जैसे जरूरी कदम उठाने की जरूरत है. इसके अलावा, लोगों की भी जिम्मेदारी है कि शराब पीकर गाड़ी ना चलाएं. ट्रैफिक नियमों का पालन करें. सड़कों से पुरानी बसें और खटारा वाहन हटाएं जाएं, तो हादसों पर लगाम लग सकती है.

हर साढ़े 3 घंटे में एक मौत, 3 घायल
हिमाचल प्रदेश में हर साढ़े तीन घंटे बाद हिमाचल में सड़क हादसे में एक मौत होती है, जबकि तीन लोग घायल होते हैं. साल 2015 में कुल 3010 हादसे हुए, जिसमें 1097 लोगों की मौत हुई और 5109 लोग घायल हो गए. साल 2015 के बाद हादसों की संख्या लगातार बढ़ती गई. साल 2016 में 3156 सड़क दुर्घटनाओं में 1163 लोगों ने जान गंवाई और 5587 लोग घायल हुए.

लगातार बढ़ रहे हादसे
वर्ष 2017 में 3119 सड़क हादसों में 1176 लोग मारे गए और 5338 लोगों ने जख्म खाए. साल 2018 में 3119 सड़क दुर्घटनाएं सामने आई, जिसमें 1168 लोगों की जान गई और 5444 लोग घायल हुए. इस वर्ष में 2019 5 महीनों में ही अब तक हिमाचल में 1168 हादसे हो चुके हैं, जिसमें 430 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 2155 लोग घायल हुए हैं.

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First published: July 2, 2019, 11:57 AM IST
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