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ऑपरेशन मुस्कान: फिर फरिश्ता बनी पुलिस, भटककर शिमला पहुंची सागर को परिवार से मिलाया
Shimla News in Hindi

Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 11, 2020, 10:43 AM IST
ऑपरेशन मुस्कान: फिर फरिश्ता बनी पुलिस, भटककर शिमला पहुंची सागर को परिवार से मिलाया
शिमला में मिली फरीदाबाद से लापता हुई सागर.(सांकेतिक तस्वीर)

अभियान के तहत 2020 तक 400 से ज्यादा बच्चों को उनके परिवार से मिलवाया जा चुका है. पंचकूला स्टेट क्राइम ब्रांच अब तक हिमाचल से 15 महिलाओं और करीब 12 बच्चों को रेस्क्यू कर चुका है.

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शिमला. फरीदाबाद से भटकते हुए करीब 385 किलो मीटर दूर शिमला (Shimla) पहुंची सागर कुमारी आखिरकार अपने घर वापिस जा रही है. सागर को घर पहुंचाने के लिए पंचकूला स्टेट क्राइम ब्रांच (Panchkula State Crime Branch) की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम फरिश्ता बन कर आई और उन्होंने 6 घंटे के अंदर ही सागर के परिवार को ढूंढ निकाला.

सागर के साथ बेटी भी लापता हुई थी
फरिदाबाद की सागर देवी को पता ही नहीं चल पाया कि वह कैसे घूमते हुए अपने घर से इतने दूर जा पहुंची है. 27 साल की सागर की मानसिक हालत कुछ ठीक नहीं है, ऐसे में वह अपने घर से चल तो पड़ी थी, लेकिन इतनी दूर आ पहुंचेगी, उसे पता न था. सागर जब घर से चली थी तो अपने साथ अपनी 7 महीने की बेटी राधिका को लेकर आई थी, लेकिन अब बच्ची कहां है, उसे याद नहीं हैं.

कुफरी में पुलिस ने किया था रेस्क्यू

नवंबर माह में कुफरी से जब शिमला पुलिस ने सागर को रेस्क्यू किया तो उस वक्त वह अकेली थी. बच्ची साथ में नहीं थी. सागर कुमारी का परिवार बहुत परेशान था. सागर के परिवार में उसके पति, तीन बच्चे और सास-ससुर हैं. पति फरीदाबाद में फैक्ट्री में काम करता है. वहां अपने तीन बच्चों अनीता, मनीष और सात महीने की बच्ची राधिका के साथ रहते थे. सागर के गुम होने पर पति मनोज ने फरीदाबाद पुलिस स्टेशन में 22 जून 2019 को पत्नी और बच्ची के गुम होने की एफआईआर दर्ज करवाई थी. लेकिन कोई सुराग न मिलने के चलते पुलिस ने केस बंद कर दिया था. नवंबर, 2019 को सागर को कुफरी से रेस्क्यू कर मशोबरा के नारी सेवा सदन में रखा गया. उस समय सागर की हालत काफी दयनीय थी।

दो फरवरी को मिली जानकारी
दो फरवरी 2020 को सदन की इंचार्ज सुषमा ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट पंचकूला के एएसआई राजेश कुमार को सागर की जानकारी दी. पुलिस ने 6 घंटे के अंदर ही सागर के परिवार को ढूंढ निकाला. यूनिट 10 फरवरी को सागर के पति को लेकर शिमला पहुंची और उसे उसके परिवार से मिलाया. सागर के पति मनोज अपनी पत्नी को ढूंढ निकालने की सारी उम्मीद छोड़ चुके थे. ऐसे में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट पंचकूला उनके लिए फरिशता बन कर आई है. ऐसे में उन्हें उन्हें से उम्मीद भी है कि उनकी बेटी राधिका को भी पुलिस ढूंढ निकालेगी.सात महीने की बेटी की तलाश
सागर कुमारी की जानकारी जब हरियाणा पुलिस को मिली तो पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसके बारे में जानकारी जुटाई. पता चला कि सागर बिहार के शताब्दीयारा गांव की रहने वाली है और पति मनोज के साथ फरीदाबाद में रह रही थी. स्टेट क्राइम ब्रांच के एएसआई राजेश कुमार ने पुलिस स्टेशन से सागर के पति का नम्बर लिया और शिमला नारी सेवा सदन में रह रही सागर को फोटो भेजा. पति ने उसे पहचान लिया. किसी को भी उम्मीद नहीं थी की सागर शिमला में इस तरह से मिलेगी. वहीं पुलिस ने 7 महीने की बच्ची राधिका को ढूंढने का जिम्मा भी उठा लिया है. राकेश कुमार, एएसआई, स्टेट क्राइम ब्रांच,पंचकूला ने बताया कि सबसे पहले हिमाचल प्रदेश के सभी शिशु गृह में बच्चे के बारे में पूछताछ की जाएगी. उसके बाद अन्य राज्यों में भी ये प्रकिया अपनाई जाएगी.

हरियाणा में 2015 में ऑपरेशन मुस्कान
हरियाणा में 2015 में ऑपरेशन मुस्कान शुरू किया गया था, जिसके तहत सभी जिलों के शेल्टर होम्स प्लैटफॉर्म, बस स्टेशनों, सड़कों और अन्य विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले बच्चों के संबंध में प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों द्वारा गहन छानबीन व आवश्यक सूचना ली जाती है. जो बच्चे लापता या गुमशुदा की श्रेणी में पाए जाते हैं, उन्हें उनके घर तक पहुंचाया जाता है. अभियान के तहत 2020 तक 400 से ज्यादा बच्चों को उनके परिवार से मिलवाया जा चुका है. पंचकूला स्टेट क्राइम ब्रांच अब तक हिमाचल से 15 महिलाओं और करीब 12 बच्चों को रेस्क्यू कर चुका है.

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First published: February 11, 2020, 10:43 AM IST
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