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Himachal News: नालागढ़ की काऊ सैंक्‍चुरी में ‘भूख’ से अब तक 180 गायों की मौत! उठे सवाल

Himachal News: नालागढ़ की काऊ सैंक्‍चुरी में ‘भूख’ से अब तक 180 गायों की मौत! उठे सवाल

आरोप- पशुओं को नहीं दिया जा रहा भरपेट चारा

आरोप- पशुओं को नहीं दिया जा रहा भरपेट चारा

गौ सेवा आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक शर्मा का कहना है कि काऊ सैंक्चुरी में जो भी सुविधाएं पशुओं को चाहिए वह उन्हें पूर्ण तौर पर दी जा रही है. उन्होंने कहा कि हरा चारा भी पशुओं को दिया जाता था. लेकिन लेबर की दिक्कत होने की वजह से आज कल कम हरा चारा पशुओं को दिया जाता है. उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में हरे चारे की भी कोई दिक्कत नहीं आएगी.

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नालागढ़. हिमाचल प्रदेश में आवारा पशु सड़कों पर घूम रहे थे और उन से निजात दिलाने के लिए उनके रहने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 3 करोड रुपए खर्च करके नालागढ़ के हांडा खुंडी में एक काऊ सैंक्चुरी का निर्माण करवाया गया था. इस काऊ सैंचुरी में 500 के करीब पशु रखे गए थे और इस काऊ सैंक्चुरी पर करीबन 3 करोड रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन काऊ सैंक्चुरी पहले ही दिन से विवादों में हैं. इस काऊ सैंक्चुरी में बाहर से पशुओं को उठाकर लाया जा रहा है, लेकिन गायों की लगातार काऊ सैंक्चुरी में मौत हो रही है. लोगों का कहना है कि अब तक करीब 180 पशुओं की मौत काऊ सैंक्चुरी में हो चुकी है.

लोगों ने इस काऊ सैंक्चुरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पशुओं को यहां भरपेट चारा नहीं दिया जा रहा है. मात्र उन्हें सूखा चारा ही खिलाया जा रहा हैस वह भी बहुत कम मात्रा में दिया जाता है. जिसके कारण भूख के चलते पशु लगातार मर रहे हैं.

लोगों का कहना है कि पशुओं की मौत होने के बाद भी उन्हें उठाकर कहीं दफनाया भी नहीं जाता है, जिसके कारण अन्य पशुओं में भी बीमारी फैल रही है. लोगों ने सरकार की काऊ सैंक्चुरी प्रबंधन कमेटी पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस हिसाब से पशुओं को चारा और मेडिकल सुविधाएं मिलनी चाहिए उस हिसाब से काऊ सैंक्चुरी में सुविधाएं नहीं दी जा रही है. बाहर से लाए जा रहे पशुओं की एक के बाद एक मौत होनी शुरू हो चुकी है. इस पर ना तो सरकार कोई ध्यान दे रही है और न ही प्रबंधन कमेटी कोई पुख्ता इंतजाम कर पा रही है.

लोगों ने सरकार व प्रशासन से मांग उठाई है कि काऊ सैंक्चुरी में रखे गए पशुओं की ठीक से देख रेख की जाए. उन्हें भरपेट खाना और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए ताकि पशुओं की मौत ना हो और वह ठीक रहे. लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री व स्थानीय प्रशासन से मांग उठाते हुए कहा है कि काऊ सैंक्चुरी के नाम पर दिखावे बंद किए जाएं और अगर पशुओं को इस काऊ सैंक्चुरी में इस तरह कैद करके रखना है तो उन्हें खुला छोड़ दिया जाए. ताकि वह बाहर अपनी मर्जी से हरा घास खाकर गुजारा कर सकें.

गौ सेवा आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक शर्मा का कहना है कि पशुओं की मौत होने का कारण जब पशुओं को बाहर से काऊ सैंक्चुरी में लाया जाता है तो पशुओं ने बाहर लिफाफे थैले अन्य रसिया खाई होती है जिसके कारण पशुओं की मौत हुई थी. उनका कहना है कि कई पशुओं के शवों के पोस्टमार्टम भी करवाए गए और उनके पेट से लिफाफे रस्सी एवं अन्य चीजें निकाली गई हैं. उन्होंने कहा कि काऊ सैंक्चुरी में पशुओं को हर संभव सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है.

काऊ सैंक्चुरी कमेटी के प्रधान राम प्रताप चौधरी का कहना है कि जिन पशुओं को बाहर से लाया जाता है और उनके द्वारा बाहर खुले में लिफाफे व अन्य चीजें खाने के कारण उनकी मौत हो रही है. या उन पशुओं की मौत हो रही है जो बीमार हो. उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन द्वारा पशुओं के लिए खाने पीने की पुख्ता व्यवस्था की गई है और उन्हें हफ्ते में तीन बार हरा चारा भी खिलाया जाता है.

Tags: Cow, Cow Rescue Operation, Cow Slaughter, Himachal news, Himachal Police, Himachal Politics

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