Remdesivir की कालाबाजारी: हिमाचल की दवा कंपनी के डायरेक्टर सहित 5 गिरफ्तार, 3 हजार इंजेक्शन सीज

कोई भी केमिस्ट, खुदरा विक्रेता, व्यापारी आदि  नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरूद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

कोई भी केमिस्ट, खुदरा विक्रेता, व्यापारी आदि नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरूद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

Black Marketing of Remdesivir in Baddi: विभाग ने इस मामले को लेकर दो तरह से जांच शुरू की है. कंपनी से जहां सारा रिकार्ड मांगा गया है. वहीं, पांच सदस्यीय टीम ज्वाइंट इंस्पेक्शन करके जांच रिपोर्ट ड्रग विभाग को सौंपेगी. कंपनी के पास एक्सपोर्ट लाईसेंस था, लेकिन डोमेस्टिक सेल की अनुमति कंपनी के पास नहीं थी.

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बद्दी (सोलन). कोरोना महामारी (Corona Virus) के गंभीर मरीजों को दिए जाने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर के चंडीगढ़ में होने वाले सौदे के तार हिमाचल से जुड़े हैं. जहां सरकार कोरोना के इंजेक्शन को कम दाम पर उपलब्ध करवा रही है, वहीं इसके निर्माता अवैध तरीके से मंहगे दामों पर इनको बेचकर लाभ लेने की फिराक में हैं. चंडीगढ़ पुलिस (Chandigarh Police) ने सेक्टर-17 के ताज होटल में दबिश देकर रेमडेसिविर इंजेक्शन के अवैध सौदे को भंडाफोड़ किया है, जिसमें एनएच बद्दी-नालागढ़ पर संडोली में स्थित दवा उद्योग के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया है.

लोकल मार्केट में बेचने की मंजूरी नहीं

जानकारी के अनुसार, हैल्थ बॉयोटेक उद्योग के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन के एक्सपोर्ट निर्माण की मंजूरी थी, जिसे 11 अप्रैल को रद्द कर दिया गया था. यानी के किसी देश से आर्डर आने के बाद ही उद्योग इस इंजेक्शन का निर्माण करके एक्सपोर्ट कर सकता था, जबकि कंपनी के पास स्थानीय बाजार (डोमेस्टिक मार्केट) में इसे बेचने की मंजूरी नहीं थी. पता चला है कि कंपनी ने डोमोस्टिक मार्केट में सेल के लिए अप्लाई भी किया है, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली थी. बावजूद इसके कंपनी के डायरेक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन को लोकल मार्केट में मंहगे दामों पर बेचने के लिए डील कर रहे थे, जिसका चंडीगढ़ पुलिस ने भंडांफोड़ कर दिया.

अप्रैल में उत्पादन का लेवल
एसआईटी ने हैल्थ बॉयोटेक के 3 हजार इंजेक्शन बरामद किए गए हैं, उस पर भी मैनूफैक्चरिंग अप्रैल माह की है. सोमवार को इस पूरे मामले की जांच कर रही चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी टीम ने ड्रग कंट्रोलर कार्यालय बद्दी में दस्तक दी और कंपनी के रिकार्डस खंगाले. पुख्ता जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले में बद्दी और सिरमौर के पांच उद्योग रेडार पर हैं.

पांच सदस्यीय कमेटी का गठन

रेमडेसिविर इंजेक्शन सौदे का प्रकरण सामने आने के बाद ड्रग विभाग ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. वहीं विभाग ने बद्दी स्थित उद्योग के स्टाफ को भी जहां ड्रग कार्यालय में तलब किया है. वहीं उद्योग के तीन महीने के रिकार्ड और स्टॉक की भी जांच की जा रही है. जांच के बाद पांच सदस्यीय कमेटी ड्रग विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जबकि इस प्रकरण के बाद सिरमौर और बद्दी के पांच उद्योग भी रेडार पर हैं, जो जांच के शिकंजे में आ सकते हैं. इस पूरे प्रकरण के बाद कोरोना इंजेक्शन के निर्माण और सेल को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.



चंडीगढ़ पुलिस ने किया था संपर्क

हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर नवनीत महवाहा ने बताया कि चंड़ीगढ़ पुलिस को इस मामले में लीड मिली थी जिसके बाद पुलिस ने ड्रग विभाग व बद्दी पुलिस से संपर्क किया था. 17 अप्रैल की चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई में ड्रग विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल थे. विभाग ने इस मामले को लेकर दो तरह से जांच शुरू की है. कंपनी से जहां सारा रिकार्ड मांगा गया है. वहीं, पांच सदस्यीय टीम ज्वाइंट इंस्पेक्शन करके जांच रिपोर्ट ड्रग विभाग को सौंपेगी. कंपनी के पास एक्सपोर्ट लाईसेंस था, लेकिन डोमेस्टिक सेल की अनुमति कंपनी के पास नहीं थी. इस सारे प्रकरण की जांच चल रही है और चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी टीम भी ड्रग कार्यालय जांच के पहुंची है, जिनका सहयोग किया जा रहा है.
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