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Coronavirus: हिमाचल के उद्योगों कच्चे माल की कमी, गिरने लगा उत्पादन
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Jagat Singh Bains | News18 Himachal Pradesh
Updated: March 6, 2020, 10:57 AM IST
Coronavirus: हिमाचल के उद्योगों कच्चे माल की कमी, गिरने लगा उत्पादन
नालागढ़ इंडस्ट्री ऐसोशिएसन के उपाध्यक्ष सुनील सोनी ने कहा कि फार्मा उद्योगों पर इसका असर पडऩा आरंभ हो गया है और यदि आगामी दिनों चीन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कच्चे माल की आपूर्ति न होने पाने की सूरत में फार्मा उद्योगों को संकट से जूझना पड़ेगा.

नालागढ़ इंडस्ट्री ऐसोशिएसन के उपाध्यक्ष सुनील सोनी ने कहा कि फार्मा उद्योगों पर इसका असर पडऩा आरंभ हो गया है और यदि आगामी दिनों चीन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कच्चे माल की आपूर्ति न होने पाने की सूरत में फार्मा उद्योगों को संकट से जूझना पड़ेगा.

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बद्दी (सोलन). चीन में फैले कोरोना वायरस (Corona) हिमाचल प्रदेश का उद्योगों को भी चपेट में लेने लगा है. उद्योगों में कच्चे माल (Raw material) की कमी के कारण उत्पादन (Production) के लिए स्टॉक किया माल समाप्त होने की कगार पर है. अभी तक करीब 20 फीसदी उत्पादन पर असर पड़ चुका है. यदि आगामी एक माह तक चीन (China) के हालात ऐसे ही रहते है तो खासतौर पर फार्मा उद्योगों पर संकट के बादल छा जाएंगे. उद्योगों का उत्पादन ठप्प पड़ जाएगा. अभी उद्योग अपने पास स्टॉक किए हुए कच्चे माल से ही काम चला रहा है.

दवा उद्योग पर पड़ेगी मार
दवा उत्पादन में हिमाचल ने अपनी अलग पहचान बनाई है और 45 फीसदी दवाओं का निर्यात होता है, लेकिन अब सूबे के करीब 750 फार्मा उद्योगों को कच्चे माल की कमी खलनी शुरू हो गई है. प्रदेश की फार्मा कंपनियों से सालाना 30 हजार करोड़ का कारोबार होता है, जिसमें से 15 हजार करोड़ की दवाओं का निर्यात किया जाता है. देश में दवा कंपनियों सहित बल्क ड्रग डीलरों के पास एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेटिएंट (एपीआई) का नाममात्र स्टॉक बचा हुआ है, जिसमें से मौजूदा समय में चीन से 67 तरह के एपीआई की आपूर्ति होती है.

यूरोप से महंगे दाम पर मंगवाना पड़ सकता है कच्चा माल



चीन के हालात में सुधार नहीं हुआ तो मजबूरन उद्योगों को यूरोप से कच्चा माल मंगवाने को लाचार होना पड़ेगा. यूरोप से आना वाला कच्चा माल मंहगा होता है, जिससे यहां निर्मित होने वाली दवाओं के दामों में भी बढ़ोत्तरी होगी, क्योंकि कच्चे माल की कीमतें बढ़ जाने से उत्पादन खपत अधिक होगी, जिससे उत्पाद भी मंहगे दामों पर आ जाएंगे. ऐसे में उद्योग अभी अपने पास संजोये हुए स्टॉक के प्रयोग करके ही अपना उत्पादन कर रहे है, लेकिन स्टॉक खत्म होने की कगार पर है, जिससे फार्मा उद्योगों पर संकट के बादल मंडरा सकते है.



फार्मा उद्योगों पर असर
नालागढ़ इंडस्ट्री ऐसोशिएसन के उपाध्यक्ष सुनील सोनी ने कहा कि फार्मा उद्योगों पर इसका असर पडऩा आरंभ हो गया है और यदि आगामी दिनों चीन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कच्चे माल की आपूर्ति न होने पाने की सूरत में फार्मा उद्योगों को संकट से जूझना पड़ेगा. यूरोप से मंहगे दामों पर कच्चा माल आयात करना पड़ेगा, जिससे दवाओं के दामों में भी वृद्धि होगी. अभी इसका 20 फीसदी असर पड़ चुका है, जो प्रतिदिन बढ़ता ही जाएगा, क्योंकि फार्मा उद्योगों के पास अपना स्टॉक खत्म हो जाएगा.

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First published: March 6, 2020, 10:57 AM IST
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