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हिमाचल की दवा इंडस्ट्री पर कोरोना वायरस का असर, उत्पादन पर संकट
Solan News in Hindi

Jagat Singh Bains | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 10, 2020, 11:46 AM IST
हिमाचल की दवा इंडस्ट्री पर कोरोना वायरस का असर, उत्पादन पर संकट
हिमाचल में कोरोना वायरस का असर. (सांकेतिक तस्वीर)

Corona Virus impact on Himachal's Medical Industry: सीआईआई हिमाचल चैप्टर के चेयरमैन हरीश अग्रवाल ने कहा कि फार्मा उद्योगों पर कोरोना वायरस का असर पडऩा शुरू हो गया. आने वाले दिनों में अगर चीन में हालात नहीं सुधरे और कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हुई तो फार्मा उद्योगों को जूझना पड़ेगा.

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नालागढ (सोलन). हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की इंडस्ट्री पर चीन से फेले कोरोना वायरस (Corona Virus) असर दिखने लगा है. वायरस के कारण चीन (China) से कच्चे माल की सप्लाई में कमी आई है और इस कारण सूबे के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) पर प्रभाव पड़ा है.

दवा उद्योगों (Medicine Industry) के पास कच्चा माल (Raw Material) खत्म होने लगा है और अब तक उत्पादन में करीब 20 फीसदी कमी देखी जा रही है. यदि आगामी एक सप्ताह तक चीन के हालात ऐसे ही रहते हैं तो फार्मा उद्योगों पर संकट खड़ा हो सकता है और उत्पादन पूरी तरह से ठप पड़ सकता है.

सोलन जिले में होता है दवाओं का उत्पादन
दवा उत्पादन में हिमाचल अलग अलग पहचान रखता है. यहां से 45 फीसदी दवाएं निर्यात होती हैं. यहां करीब 750 फार्मा उद्योग हैं. इन फार्मा कंपनियों में सालाना 30 हजार करोड़ का कारोबार होता है. 15 हजार करोड़ की दवाएं निर्यात की जाती हैं. लेकिन चीन में कोरोना वायरस फैलने के बाद से अब दवा कंपनियों के पास कम स्टॉक बचा हुआ है. मौजूदा समय में चीन से 67 तरह का कच्चा मामला यहां भेजा जाता है.

दूसरी जगह से मंगवाना पड़ सकता है कच्चा माल
चीन के हालात में सुधार नहीं हुआ तो मजबूरन उद्योगों को यूरोप से कच्चा माल मंगवाना पड़ेगा, जो कि खासा मंहंगा पड़ेगा. इसस दवाओं के दामों में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है. क्योंकि कच्चा माल महंगा होगा तो कीमतें बढ़ेंगी.

20 फीसदी असर पड़ा: हरीशसीआईआई हिमाचल चैप्टर के चेयरमैन हरीश अग्रवाल ने कहा कि फार्मा उद्योगों पर कोरोना वायरस का असर पडऩा शुरू हो गया. आने वाले दिनों में अगर चीन में हालात नहीं सुधरे और कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हुई तो फार्मा उद्योगों को जूझना पड़ेगा. यूरोप से मंहगे दामों पर कच्चा माल आयात करना पड़ेगा, जिससे दवाओं के दामों में भी वृद्धि होगी. अभी इसका 20 फीसदी असर पड़ चुका है, जो प्रतिदिन बढ़ता ही जाएगा, क्योंकि फार्मा उद्योगों के पास अपना स्टॉक खत्म हो जाएगा.

यह मांग उठाई
हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि कच्चे माल की किल्लत से उत्पादन में संकट है. एचडीएमए ने केंद्र के समक्ष बल्क ड्रग एपीआई की आपूर्ति के ज्वलंत मुददे को उठाया है और दवाओं के कच्चे माल को भी ड्रग प्राईज कंट्रोल आर्डर (डीपीसीओ) के तहत लाने की मांग उठाई है, क्योंकि कच्चे माल की कीमतों में बेहाताशा वृद्धि हुई है.

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First published: February 10, 2020, 11:38 AM IST
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