अधूरे हैं डॉ. परमार के सपने, किसानों के लिए शुरू की गई योजनाएं पूरी नहीं हुई

News18 Himachal Pradesh
Updated: August 22, 2019, 6:33 AM IST
अधूरे हैं डॉ. परमार के सपने, किसानों के लिए शुरू की गई योजनाएं पूरी नहीं हुई
सिरमौर - प्रथम मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए शुरू की थी कई योजनाएं, एक भी पूरी नहीं हुई.

हिमाचल निर्माता व प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार द्वारा जो सपने सिरमौर के किसानों की खुशहाली के लिए देखे गए थे, वे आज भी अधूरे हैं.

  • Share this:
हिमाचल निर्माता व प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह (Dr. Yashwant Singh Parmar) परमार द्वारा किसानों के लिए देखे गए सपनों को विभागीय अधिकारी व प्रदेश सरकार (Himachal Government) पूरा नहीं होने दे रहे हैं. सिरमौर के किसानों (Farmers of Sirmaur) की खुशहाली के लिए डॉ. वाई.एस. परमार द्वारा जो सपने देखे गए थे वो आज भी अधूरे हैं. हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार ने किसानों को प्रगति (Farmers progress) की राह पर ले जाने के लिए बागवानी की तरफ विशेष ध्यान दिया था. क्लाइमेट के हिसाब से प्रदेश भर के अलग अलग जिलों में विभिन्न प्रकार के उद्यान-बाग़ स्थापित किए गए, जिसे आज के समय में उद्यान विभाग देख रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार द्वारा बागवानी की तरफ विशेष ध्यान दिया गया था. जिला सिरमौर में भी कई जगह उद्यान-बाग़ स्थापित किए गए. इसके साथ फूड प्रोसेसिंग प्लांट (Food Processing Plant) भी लगाए गए. किसानों के ठहराव के लिए किसान भवन बनाए गए. लेकिन आज ये सभी संस्थान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

फूड प्रोसेसिंग यूनिट खंडहर बन गया

विधानसभा क्षेत्र पच्छाद (Pachhad assembly) के राजगढ़ में बनाया गया फूड प्रोसेसिंग यूनिट आज खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. यहां मशीने जंग खा रही हैं. कई महीनों से boiler खराब है, जिसके चलते फ़ूड प्रोसेसिंग का कार्य रुका हुआ है. साथ ही इस सरकारी संस्थान में दिन प्रतिदिन कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है. राजगढ़ क्षेत्र को पीच वैली के नाम से जाना जाता है. यहां का आडू फल एशिया में प्रसिद्ध था. लेकिन आज अधिकतर स्थानीय किसानों ने आडू के बगीचे लगाने बंद कर दिए हैं, क्योंकि, किसानों को दशकों से इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाया.

इतना ही नहीं लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में किसानों के लिए किसान भवनों का निर्माण करवाया गया था ताकि दूर दराज के क्षेत्र से पहुंचने वाले किसानों को रुकने के लिए अच्छी जगह मिल पाए. लेकिन जिला प्रशासन की बेरुखी और लापरवाही के चलते अधिकतर किसान भवन खंडहर बन गए हैं. जो किसान भवन बचे हैं उन्हें अन्य विभागों को रेंट आउट किया गया है. कुल मिलाकर कहना होगा कि डॉ. परमार ने जो सपने किसानों की बेहतरी के लिए देखे वे पूरे नहीं हो पाए.

ये भी पढ़ें - भू-वैज्ञानिकों की टीम भू-स्खलन रोकने की रिपोर्ट तैयार करेगी

ये भी पढ़ें - दिल्ली : गुरु रविदास का मंदिर तोड़ने पर नालागढ़ में प्रदर्शन

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए सोलन से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 22, 2019, 6:33 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...