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हिमाचल की नौणी यूनिवर्सिटी ने बनाया हर्बल सेनेटाइजर, WHO के मापदंड किए हैं फॉलो
Solan News in Hindi

Sunil kumar | News18 Himachal Pradesh
Updated: March 23, 2020, 1:27 PM IST
हिमाचल की नौणी यूनिवर्सिटी ने बनाया हर्बल सेनेटाइजर, WHO के मापदंड किए हैं फॉलो
नौणी यूनिवर्सिटी में बनाया गया हर्बर सेनेटाइजर.

इसके उपयोग पर त्वचा मॉइस्चराइज भी रहती है और साथ में यह ठंडा और सुगंधित भी है.

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नौणी (सोलन). कोरोना वायरस (Corona Virus) के खौफ के बाद हिमाचल प्रदेश में सेनेटाइजर और मास्क की मांग बढ़ी है. अच्छी गुणवत्ता वाले सेनेटाइज़र (Sanitizer) की बढ़ती मांग को देखते हुए सोलन (Solan) की डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिकों ने हर्बल सेनेटाइज़र तैयार किया है. यह सेनेटाइज़र यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों और शोधकर्ताओं के उपयोग के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा.

सेनेटाइज़र को विश्वविद्यालय के वन उत्पाद विभाग के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. बीते शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने इसे लॉन्च किया.

यूनिवर्सिटी में ही किया विकसित
प्रिंसिपल फाइटोकेमिस्ट डॉ. यशपाल शर्मा की अगुवाई वाली टीम में वैज्ञानिक डॉ. मीनू सूद, डॉ. रोहित शर्मा और विश्लेषक चित्रलेखा भारद्वाज ने सेनेटाइज़र को बड़े ही कम समय में विश्वविद्यालय के अनुसंधान फार्म में विकसित किया है. इसमें हर्बल उत्पादों का उपयोग किया गया है. साथ ही इसे बनाने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सभी दिशानिर्देशों का पालन किया गया है.



यूनिवर्सिटी में फ्री में बंटेगा
पहले चरण में विश्वविद्यालय के सभी कार्यालयों और विभागों को सेनेटाइज़र मुफ्त में वितरित किए जाएंगे. नौणी विवि के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह गर्व का दिन है कि विश्वविद्यालय एक ऐसे समय में, जब सभी को ऐसे उत्पादों की आवश्यकता है, बनाने कामयाब हुआ है. उन्होंने वैज्ञानिकों से सभी मापदंडों पर और अध्ययन करने का आग्रह किया, जहां उत्पाद को और बेहतर बनाया जा सकता है. डॉ कौशल ने वैज्ञानिकों को ऐसे और इको-फ्रेंडली उत्पादों को विकसित करने का आग्रह किया, जिन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल से आसानी से विकसित किया जा सकता है.

यूनिवर्सिटी के पदाधिकारियों ने इसे लॉन्च किया.
यूनिवर्सिटी के पदाधिकारियों ने इसे लॉन्च किया.


डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार-डॉक्टर
डॉ. यशपाल शर्मा ने बताया कि सेनेटाइज़र को विश्वविद्यालय में उगाए गए स्थानीय हर्बल उत्पादों का उपयोग करके विकसित किया गया है. इस सेनेटाइज़र में अल्कोहल की मात्रा डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार है और इसका उपयोग वायरल और बैक्टिरियल स्ट्रेन से बचाने के लिए किया जा सकता है. इसमें हर्बल ऑइल और उत्पाद हैं, जो एंटीसेप्टिक गुणों को बढ़ाते हैं और बैक्टीरियल दूषण के खिलाफ कार्य करते हैं. इसके उपयोग पर त्वचा मॉइस्चराइज भी रहती है और साथ में यह ठंडा और सुगंधित भी है.

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First published: March 23, 2020, 1:27 PM IST
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