हिमाचल: कचरा प्लांट की वजह से नालागढ़ में कुआं का पानी हुआ जहरीला, CM हेल्पलाइन पर शिकायत

नालागढ़ में कुएं का पानी हुआ गंदा.

Himachal news: शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के सीओ अशोक शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि उनके प्लांट के अंदर से 1% भी वेस्ट पानी बाहर नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि उनके प्लांट के अंदर अगर वेस्ट ठोस कचरे को नष्ट करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है तो उसकी भी समय समय पर सैम्पलिंग कर जांच की जाती है.

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नालागढ़ (सोलन). देश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के तहत माजरा गांव में एक गरीब परिवार के कुएं का पानी खराब होने का मामला सामने आया है. कुछ महीने पहले कुएं से भी साफ पानी निकलता था, लेकिन अब उनके कुएं का पानी बिल्कुल ही दूषित हो चुका है. बीते दिनों उनके एक दुधारु पशु की भी कुएँ के जहरीले पानी को पीने से मौत हो चुकी है. परिवार के लोगों का कहना है कि जब उन्होंने गांव से बाहर निकल कर अपना मकान बनाया था तो करीबन 20 वर्ष पहले यहां पर एक पीने के पानी के लिए कुआं भी खुदवाया गया था. लगातार 20 वर्षों से वह इसी कुएं का पानी पी रहे हैं, जिससे उन्हेँ किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. लेकिन अब कुछ महीनों से कुएं का पानी जहरीला हो चुका है, जिसके कारण उनके पूरे परिवार में बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है.

कचरा प्लांट की वजह से पानी खराब

परिवार के लोगों ने कुएँ के पानी को दूषित होने का आरोप गांव में ही एक बने ठोस कचरा प्लांट पर लगाया है. पीड़ितों का कहना है कि सॉलिड वेस्ट प्लांट में ठोस कचरा पूरे हिमाचल से आता है और यहां पर उस कचरे को सही ढंग से ट्रीट नहीं किया जाता, जिसके कारण इस कचरे से निकलने वाला केमिकल युक्त जहरीला वेस्ट जमीन के अंदर पूरी तरह से समा चुका है और अब उसकी वजह से उनके कुएं का पानी जहरीला हो चुका है और अब इस कुएं का पानी पीने लायक नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि हर महीने सॉलिड बेल प्लांट से लोग उनके कुएं के सैंपल लेते थे, लेकिन कभी भी उन्हें लिए गए सैम्पलों की रिपोर्ट तक नहीं दी गई. पीड़ितों का कहना है कि सॉलिड वेस्ट प्लांट के लोगों द्वारा इस ठोस कचरे को सही ढंग से ट्रीट ना करके ऐसे ही लीपापोती करके जमीन के अंदर दफना दिया जाता है और जिसके कारण अब आसपास की जमीन का पानी दूषित होना शुरू हो चुका है.

परिवार ने लगाया आरोप

परिवार ने साफ तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके परिवार के एक व्यक्ति द्वारा भी इस कंपनी में करीबन 5 साल तक काम किया है और उन्हें पता है कि इस सॉलिड वेस्ट प्लांट के अंदर किस तरह से काम होता है उन्होंने यहां तक भी आरोप लगाया कि कई बार कैमिकल को अपने आप ही आग लग जाती है और जिस हिसाब से ठोस कचरे को वेस्ट करना होता है वह अंदर नहीं किया जाता, जिसकी वजह से अब यह कैमिकल जमीन के भीतर पूरी तरह से घुस चुके हैं और यहां का पानी दूषित होना शुरू हो चुका है. पीड़ित परिवार द्वारा सरकार व प्रशासन और सीएम जयराम ठाकुर से इस सॉलिड बेस्ट प्लांट को बंद करवाने की मांग उठाई गई है. साथ ही पीड़ितों ने सरकार व पॉल्यशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को चेतावनी देकर कहा है कि अगर जल्द ही इस सॉलिड वेस्ट प्लांट के ऊपर कार्रवाई नहीं की गई तो वह आने वाले दिनों में धरना प्रदर्शन करने को भी मजबूर होंगें.

क्या कहते हैं अधिकारी

शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के सीओ अशोक शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि उनके प्लांट के अंदर से 1% भी वेस्ट पानी बाहर नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि उनके प्लांट के अंदर अगर वेस्ट ठोस कचरे को नष्ट करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है तो उसकी भी समय समय पर सैम्पलिंग कर जांच की जाती है. उन्होनें कहा कि अगर किसी कुएं का पानी खराब हुआ है तो इसको लेकर वह भी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एवं प्रशासन से एक कुएं की नहीं, बल्कि आसपास के जितने भी कुएं है उनकी सैंपलिंग करके जांच की मांग कर रहे हैं. जानकार सूत्रों की माने तो उनका कहना है कि माजरा गांव में एकमात्र सॉलिड वेस्ट प्लांट ही लगा हुआ है और गांव में और किसी भी प्रकार का कोई उद्योग नहीं स्थापित हुआ है.

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