सहस्त्रधारा में मिटतें हैं कष्ट, भगवान शिव ने यहां सहस्त्रबाहु को दिलाया था मोक्ष

सोलन व सिरमौर जिला की सीमा पर बसे मरयोग गांव में पहाड़ों से सहस्त्र धारा बहती है. मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां सहस्त्रबाहु को मोक्ष दिलाया था.

Sunil kumar | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 1, 2019, 10:43 AM IST
सहस्त्रधारा में मिटतें हैं कष्ट, भगवान शिव ने यहां सहस्त्रबाहु को दिलाया था मोक्ष
सहस्त्रधारा में स्नान का है बड़ा महत्व
Sunil kumar | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 1, 2019, 10:43 AM IST
हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन व सिरमौर की सीमा पर बसे मरयोग गांव में पहाड़ों से सहस्त्र धारा बहती है. पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान परशुराम ने राजा सहस्त्रबाहु का वध किया था तो सहस्त्रबाहु के शरीर से हजारों रक्त धाराएं यहां बहने लगी थीं और अपने अंतिम समय पर राजा सहस्त्रबाहु के आग्रह करने पर भगवान परशुराम ने उन्हें कहा था जो तुम्हारी रक्त धाराएं आज यहां बह रही हैं वह कलयुग में हजारों जल धाराओं के रूप मे बहेंगी और जो भी श्रद्धालु यहां स्नान करेंगे उनके सभी कष्ट दूर होंगे. तब से लेकर आज तक यही मान्यता है. आज तक सहस्त्र धाराएं ऐसे ही बह रही हैं और माघ व सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की खासी भीड़ जुटती है. जिस स्थान पर ये धाराएं निकल रही हैं वहीं सूर्य मुखी नदी भी है जो पूर्व की ओर बह रही है.

सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में जुटते हैं शिव भक्त


कुछ ही दूरी पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर भी है जो लोगों की आस्था का केंद्र है. इस मंदिर मे सैंकड़ों वर्ष पुरानी मूर्तियां मौजूद हैं. माना जाता है कि जब भगवान परशुराम ने राजा सहस्त्रबाहु का वध किया था तो उनका सिर इस स्थान पर पड़ा था और स्वयं भगवान शिव ने प्रकट होकर सहस्त्रबाहु को मोक्ष दिलाई  थी. सावन में यहां बड़ी तादाद में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं और यहां आकर अपने जीवन के कष्ट दूर करने के साथ अपनी मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं.

श्रद्धालु ने बताया कि इस स्थान की ऐसी मान्यता है कि यहां पर भगवान परशुराम ने सहस्त्रबाहू का वध किया था तो उनका सिर यहां गिरा था और सहस्त्रबाहु की क्षमा याचना पर भगवान परशुराम ने उन्हें वरदान दिया कि जो आज तेरे रक्त की धाराए बह रही हैं वो कलयुग मे जल के रूप मे बहेंगी और लोग तुम्हारी यहां आकर पूजा करेंगे और यहां लोगों के कष्ट दूर होंगे.

मंदिर के पुजारी योगी प्रकाश नाथ ने बताया कि यहां सावन में जल चढ़ाने का बड़ा महत्व है. यहां से कुछ ही दूरी पर सहस्त्र धारा नामक स्थान है जहां सहस्त्र बाहु का वध हुआ था. जहां हम खड़े हैं इसी स्थान पर भगवान शिव ने प्रकट होकर सहस्त्र बाहु को मोक्ष दिलाया था.

कांवड़ यात्रा कर यहां पहुचें श्रद्धालुओं ने बताया कि सावन माह मे इस स्थान का बहुत महत्व है और इसलिए हम हरिद्वार से कांवड़ यात्रा कर आलग अलग सथानों से यहां आए हैं और सहस्त्र धारा मे स्नान कर भगवान शिव के चरणों मे अपनी हाजरी लगाई है.

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First published: August 1, 2019, 9:49 AM IST
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