शहर से बाहर शिफ्ट करके करें सोलन के अस्‍पताल का विस्‍तार : सोफत

सोलन शहर की जनता उग्र आंदोलन करेगी और किसी भी सूरत में भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में अस्पताल का विस्तारीकरण नहीं होने देगी.

Kirti Kaushal
Updated: May 17, 2018, 8:03 PM IST
शहर से बाहर शिफ्ट करके करें सोलन के अस्‍पताल का विस्‍तार : सोफत
मीडिया से चर्चा करते हुए महेंद्र नाथ सोफत.
Kirti Kaushal
Updated: May 17, 2018, 8:03 PM IST
राजनीति में ऊंची पैठ रखने वाले भाजपा विचारधारा से जुड़े महेंद्र नाथ सोफत राजनीति में फिर से सक्रि‍य हो गए हैं. गुरुवार को महेंद्र नाथ सोफत ने जनता से जुड़े मुद्दे को लेकर एडीएम सोलन विवेक चंदेल को ज्ञापन सौंपा और मांग की है कि सोलन के अस्पताल को शहर के बीच से कहीं खुले में शिफ्ट करना चाहिए.

सोफत ने मीडिया से चर्चा में कहा कि अस्पताल के निर्माण के लिए दस करोड़ रुपए आए हैं, जिसे अस्पताल प्रशासन भीड़भाड़ वाले इलाके में ही खर्च करना चाहता है, जो सरासर गलत है. इस पैसे को वे किसी भी हाल में शहर के बीच खर्च नहीं होने देंगे. उन्‍होंने कहा कि सोलन का क्षेत्रीय अस्पताल करीब 58 वर्ष पहले लगभग 7000 लोगों के लिए बनाया गया था. तब न सोलन में आबादी थी और न ही पार्किंग की समस्या. अब सोलन की आबादी एक लाख तक पहुंच चुकी है और अस्पताल में रोगियों के लिए एक भी गाड़ी खड़ी करने की व्यवस्था नहीं है. यही नहीं, आपातकाल में एम्बुलेंस को जाम का सामना करना पड़ता है और रोगी एम्बुलेंस में ही तड़पता रहता है. इसलिए इस अस्पताल को खुले में शिफ्ट करने की बेहद जरूरत है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिज्ञ अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए अस्पताल को यहां से शिफ्ट नहीं करने देना चाहते, जो सोलन की जनता को स्वीकार्य नहीं है. इसलिए शहरवासियों ने यह फैसला किया है कि अगर अस्पताल प्रशासन राजनीतिक दबाव में आकर अपना फैसला नहीं बदलता है तो शहर की जनता उग्र आंदोलन करेगी और किसी भी सूरत में भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में अस्पताल का विस्तारीकरण नहीं होने देगी.

महेंद्र नाथ सोफत मुख्यमंत्री और कई मंत्रियों के बेहद करीब हैं और उनके साथ वह कार्य भी कर चुके हैं. कई मंत्रियों के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा भी है. यही कारण है कि कुछ राजनेता उनकी वापसी को लेकर खुश नजर आ रहे हैं, तो कई की नींद उड़ रही है. यही कारण है कि पार्टी में उनकी वापसी में विलंब हो रहा है. अगर उनकी वापसी होती है तो भाजपा, जो सोलन विधानसभा क्षेत्र रिजर्व होने के कारण बिंदल के जाने से नेताविहीन हो चुकी थी, को एक बेहतर लीडर मिल सकता है.
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