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रिश्ता या सियासत? एक-दूसरे पर हमला करने से बच रहे ससुर और दामाद

प्रतीकात्मक तस्वीर.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

इस फ्रेंडली मैच को लेकर आम जनता का मानना है कि सोलन में महाभारत की तरह एक ही परिवार में धर्मयुद्ध लड़ा जा रहा है. जो राजेश कश्यप पिछले चुनाव में अपने ससुर के लिए वोट मांग रहे थे, आज उन्हीं के खिलाफ वोट मांगते नज़र आ रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 2, 2017, 3:38 PM IST
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डॉक्टरी पेशे को छोडक़र सोलन से चुनावी मैदान में कूदे भाजपा प्रत्याशी डॉ. राजेश कश्यप का मुकाबला अपने ही ससुर कांग्रेस प्रत्याशी कर्नल धनीराम शांडिल से है. संवेदनशील पारिवारिक रिश्ते के कारण दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बच रहे हैं.

ऐसे में सोलन का मुकाबला फ्रैंडली होता जा रहा है. एक-दूसरे को घेरने की बजाय दोनों प्रत्याशी अपनी-अपनी प्राथमिकताएं गिना रहे हैं. अंदर की बात है कि दोनों दलों के कार्यकर्ता इससे दुविधा में हैं कि विरोधी पार्टी के प्रत्याशी पर कोई वैचारिक हमला करन है या नहीं ?

अगर कोई गलती से कुछ कह देता है तो पार्टी की बैठक में कुछ देर तक सन्नाटा पसर जाता है. अब कार्यकर्ता महज डोर टू डोर चुनाव प्रचार पर तो जा रहे है लेकिन दोनों दलों के पास महज वोट मांगने के सिवाए कुछ कहने को नहीं है.



यहां तक कि मतदाता भी प्रत्याशियों के साथ खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहा हैं. क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी एक ही परिवार से हैं. दामाद-ससुर है. अब वह भला बुरा बोलें तो किसे बोलें?
इस फ्रेंडली मैच को लेकर आम जनता का मानना है कि सोलन में महाभारत की तरह एक ही परिवार में धर्मयुद्ध लड़ा जा रहा है. जो राजेश कश्यप पिछले चुनाव में अपने ससुर के लिए वोट मांग रहे थे, आज उन्हीं के खिलाफ वोट मांगते नज़र आ रहे हैं.

मतदाता और परिवार के लोग धर्म संकट में है कि आखिर वह ससुर को वोट दैं या दामाद को जिताएं. मतदाता भी इसके चलते साइलेंट मोड पर चला गया है. क्योंकि दोनों ही दल आज मुद्दविहीन नज़र आ रहे हैं. पेट्रोल के दाम बढ़ चुके हैं. महंगाई की मार लोगों पर पड़ रही है लेकिन दोनों बड़े राजनैतिक दल खामोश है.
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