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जीनत के मां-बाप ने किन्नर होने पर छोड़ा, उसने गोद ली बेटी और फिर...

किन्नर जीनत महंत ने एक बच्ची गोद ली और उसके पर​वरिश के लिए नाचना और गाना छोड़ दिया

किन्नर जीनत महंत ने एक बच्ची गोद ली और उसके पर​वरिश के लिए नाचना और गाना छोड़ दिया

ऊना जिले के गगरेट कस्बे में रहने वाली किन्नर जीनत महंत लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गगरेट कस्बे में रहने वाली किन्नर जीनत महंत लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. दरअसल बेटे के जन्म और शादी ब्याह वाले घर में जाकर बधाई लेने वाली किन्नर जीनत महंत क्षेत्र में बेटी के जन्म पर शगुन के रूप में नकद राशि बेटी के परिवार को देती हैं. गौरतलब है कि ऊना जिला देश के उन सौ जिलों में शुमार था, जहां शिशु लिंगानुपात बहुत कम था. जिला ऊना में एक हजार बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या सिर्फ 875 थी. ऊना जिला के सिर से इस बदनुमा दाग को मिटाने के लिए एक ओर जहां राज्य की सरकार और प्रशासन ने कई योजनाएं चलाई, वहीं क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने भी शिशु लिंगानुपात के लिए बेहतरीन काम किया है. इन्ही में से एक है किन्नर जीनत महंत. जीनत महंत हमेशा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ-साथ गरीब बेटियों की शादियों और गरीबों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहती है.

जीनत गरीब लड़कियों को पढ़ने में करती है मदद

जीनत को उनके माता पिता ने बचपन में ही उनको इसलिये छोड़ दिया था क्योंकि वो किन्नर हैं. 70 साल की जीनत महंत को आज भी अपने माता पिता की कमी का अहसास होता है, इसलिये वह इस कमी को उन परिवारों में ढूंढती हैं, जहां लड़कियां पैदा होती हैं. हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गगरेट में रहने वाली जीनत ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ अभियान के तहत जहाँ बेटी के जन्म पर शगुन के रूप में नकद राशि देती है. वहीं गरीब लड़कियों के स्कूल की फीस भरने और उनकी पढ़ाई में मदद करती हैं.

गरीबों के इलाज में भी करती है मदद

वह अपने आसपास के गरीब लोगों का इलाज कराने में मदद करती हैं. जीनत महंत को उनके माता पिता ने छोड़ दिया था इसलिये वो किन्नरों के बीच ही पली बढ़ीं. यही वजह है कि माता पिता के प्यार से महरूम जीनत को इसकी काफी कमी खलती थी. वह जब बड़ी हुईं तो दूसरे किन्नरों की तरह जीनत भी अपनी रोजी रोटी के लिए दूसरों के घर घर जाकर बधाई लेने जाया करती थीं.

एक गरीब बच्ची को गोद लिया

जीनत ने अपने माता पिता के प्यार की कमी को करीब 14 साल पहले एक गरीब बच्ची में ढूंढने की कोशिश की और एक गरीबी बच्ची को गोद ले लिया. आज जीनत उस बच्ची की सभी जिम्मेदारियां निभा रही हैं. जीनत ने इस बेटी का नाम सिमरन रखा है. वह आज ऊना के एक प्राइवेट स्कूल में 9 क्लास में पढ़ती है. जीनत की ज़िदगी में जब से सिमरन आई है तब से उनकी ज़िदगी ही बदल गई. उन्होने उसे बहुत ही नाजों से परवरिश की है. वह कहती हैं कि अपनी बेटी की अच्छी परवरिश देने के लिए उन्होने नाचना और गाना छोड़ दिया.

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