ऊना के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का टोटा, मरीज परेशान

कुत्ते के काटने पर पीड़ित को लगाए जाने वाले यह इंजेक्शन क्षेत्रीय अस्पताल के साथ-साथ जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी आउट ऑफ़ स्टॉक हो चुके है.

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 12, 2019, 12:34 PM IST
ऊना के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का टोटा, मरीज परेशान
ऊना के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का टोटा
Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 12, 2019, 12:34 PM IST
ऊना के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन की भारी कमी है. जिस कारण कुत्ते के काटने से पीड़ित मरीजों को अपनी जेब ढीली कर बाहर से इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे है. स्वास्थ्य विभाग इंजेक्शन की सप्लाई ना आने को इसकी मुख्य बजह बता रहा है. वहीं, विभाग टांडा मेडिकल कालेज से उधारी के 50 इंजेक्शन मंगवाकर विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में भेजने का दावा भी कर रहा है.

प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भरने वाले स्वास्थ्य महकमे के दावों की पोल ऊना जिला में खुलती नजर आ रही है. पिछले कई दिनों से एंटी रेबीज इंजेक्शन की किल्लत चल रही है. कुत्ते के काटने पर पीड़ित को लगाए जाने वाले यह इंजेक्शन क्षेत्रीय अस्पताल के साथ-साथ जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी आउट ऑफ़ स्टॉक हो चुके है.



340 रुपये करना पड़ रहा है भुगतान-

कुत्ते के काटने पर जहां सीएचसी व क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में एंटी रेबीज इंजेक्शन निशुल्क लग जाता है. वहीं स्टॉक खत्म होने के चलते अब यह बाहर से पीड़ितों को 340 रुपये में खरीदना पड़ रहा है. जबकि कुछ दिनों के अंतराल में पीड़ित को यह टीका चार बार लगवाना पड़ता है. जिससे सीधे तौर पर उन्हें पीढ़ा के साथ जेबें भी ढीली करनी पड़ रही है.

गरीबों के लिए परेशानी का सबब-

पीड़ितों की माने तो सरकार को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए और अस्पतालों में जरूरी दवाइयों का पूरा स्टॉक मौजूद रहना चाहिए. स्थानीय लोगों की माने तो साधन सम्पन्न लोग तो बाहर से खरीद कर भी इंजेक्शन लगवा सकते है लेकिन गरीब के लिए यह बहुत मुश्किल है.

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