दिवंगत सांसद रामस्वरूप शर्मा का राजकीय सम्मान से हुआ अंतिम संस्कार, अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़

पैतृक गांव में पंचतत्व में विलीन हुए दिवंगत सांसद रामस्वरूप शर्मा, सीएम समेत कई बड़े नेताओं ने दी श्रद्धांजलि.

पैतृक गांव में पंचतत्व में विलीन हुए दिवंगत सांसद रामस्वरूप शर्मा, सीएम समेत कई बड़े नेताओं ने दी श्रद्धांजलि.

बुधवार की सुबह सांसद रामस्वरूप शर्मा का शव दिल्ली के गोमती नगर स्थित सांसद अपार्टमेंट के 204 नंबर स्थित उनके फ्लैट में संदिग्ध हालातों में पाया गया. सुबह के वक्त जब रामस्वरूप शर्मा बाहर नहीं आये तो वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड को संदेह हुआ.

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कांगड़ा.  मंडी संसदीय क्षेत्र ( Mandi parliamentary constituency) से सांसद दिवंगत रामस्वरूप शर्मा ( Ramswaroop Sharma) का गुरुवार को हिंदू रिति रिवाजों के मुताबिक अंतिम संस्कार कर दिया गया है. रामस्वरूप शर्मा की पार्थिव देह को पहले जोगेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव जलपेहड़ में लाया गया. उसके बाद मछ्याल गांव स्थित श्मशान घाट में उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री उनके अंतिम संस्कार में पहुंचे. प्रदेशभर से हजारों की संख्या में उनको चाहने वालों का दिवंगत रामस्वरूप शर्मा के अंतिम दर्शन को तांता लगा रहा.

गौरतलब है कि बुधवार की सुबह सांसद रामस्वरूप शर्मा का शव दिल्ली के गोमती नगर स्थित सांसद अपार्टमेंट की सैकेंड फ्लोर के 204 नंबर स्थित उनके फ्लैट में संदिग्ध हालातों में पाया गया. सुबह के वक्त जब रामस्वरूप शर्मा बाहर नहीं आये तो वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड को संदेह हुआ. बार बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भी अंदर से रिस्पॉन्स नहीं मिला तो उन्होंने बाकि लोगों की मदद से दरवाजे को बाहर से तोड़ दिया. जब दरवाजा टूटा तो हर कोई सतब्ध था. अंदर रामस्वरूप शर्मा का शव बिस्तर के उपर रखे गये बैंच और पंखे के बीच झूल रहा था.

गुरुवार को उनकी पार्थिव देह को दिल्ली से उनके परिजन और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप उनके पैतृक गांव जलपेहड़ लेकर पहुंचे. सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही उनकी पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंची, चारों और शोक की लहर दौड़ गई. सभी की आंखे नम हो गईं.

दरअसल, राम स्वरूप शर्मा की समाज में एक अलग ही पैठ थी. 10 जून 1958 को जोगेंद्रनगर के जलपेहड़ गांव में पैदा हुए रामस्वरूप शर्मा ने साल 1976 से लेकर 1985 तक एनएचपीसी चम्बा में बतौर वेल्फेयर सुपरवाइजर अपनी सेवायें प्रदान की थी. उसके बाद साल 1980 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ जुड़ गये. उसके बाद साल 1995 में वो भाजपा में शामिल हो गये और संघ में रहते हुए कई दायित्वों में अपनी अहम भूमिका निभाई. शर्मा तीन मर्तबा मंडी क्षेत्र के महामंत्री भी रहे. इतना ही नहीं 2000 से 2004 तक प्रदेश के संगठन महामंत्री भी रहे. 2004 से 2006 तक प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भी रहे, साथ ही धूमल की सरकार के कार्यकाल में उन्हें खाद्य एवं आपूर्ति निगम का उपाध्यक्ष भी बनाया गया.
साल 2014 में उन्हें मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने टिकट देकर आम चुनाव लड़वाया गया था, जिसमें उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह को करीब 39795 मतों से शिकस्त दी. तो वहीं साल 2019 में हुये आम चुनावों में उन्हें दोबारा फिर आम चुनाव लडऩे का मौका दिया गया. इस बार उन्होंने 4 लाख 5 हजार मतों से जीत हासिल कर दोबारा लोकसभा चुनाव जीता. रामस्वरूप समाज में बेहद ही इमानदार और बेदाग छवि वाली शख्सियत के तौर पर देखे जाते थे. उनके यूं आकस्मिक गुजर जाने के बाद सियासी गलियारों में एक सूनापन सा महसूस किया जाने लगा है.

उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अपर्पित करने पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें अंतिम भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका यूं चला जाना हम सब के लिए बेहद ही बड़ी क्षति है. रामस्वरूप शर्मा जैसी शख्सियत आज के दौर में मिलना बेहद ही कठिन है. मुख्यमंत्री ने कहा रामस्वरूप शर्मा पार्टी के समर्पित सिपाही थे और समाज के लिये काम करने वाले शख्स थे उनके चले जाने से हम सबको गहरा सदमा पहुंचा है. उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी मौत पर किसी तरह की टीका-टिप्पणी करना जल्दबाजी होगा. क्योंकि दिल्ली पुलिस मामले की छानबीन कर रही है, जैसे ही उनकी रिपोर्ट आयेगी तभी कुछ कहा जा सकता है.

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