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ऊना : खेतों के बाद अब घरों में घुसने लगे हैं बंदर, खौफजदा हैं नलवाड़ी के ग्रामीण

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 12, 2019, 2:58 PM IST
ऊना : खेतों के बाद अब घरों में घुसने लगे हैं बंदर, खौफजदा हैं नलवाड़ी के ग्रामीण
ऊना- नलवाड़ी के ग्रामीणों ने बंदरों की समस्या से निजात की उठाई मांग.

नलवाड़ी गांव के निवासियों की माने तो बंदर इतने खूंखार हो चुके हैं कि कई बार घर में घुसकर उत्पात मचाने लगते हैं. यही नहीं बंदरों के कारण वे अपने बच्चों को अकेले स्कूल भी नहीं भेज पा रहे हैं.

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ऊना. हिमाचल में ऊना (Una) जिले के कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के गांव नलवाड़ी (Nalbadi) के निवासी इन दिनों बंदरों के आतंक (Monkeys Terror) से खौफजदा हैं. पिछले कई सालों से बंदर नलवाड़ी में किसानों की फसलों को तो चट कर ही रहे थे, लेकिन अब बंदरों ने लोगों के घरों में घुस (Monkeys in House) कर भी उत्पात मचाना शुरू कर दिया है. बंदरों की वजह से गांव के अधिकतर किसान खेतीबारी छोड़ने को मजबूर होने लगे हैं. नलवाड़ी के लोगों ने सरकार से बंदरों की समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाई है.

ऊना जिला में इन दिनों बंगाणा उपमंडल में बंदरों के आतंक से नलबाड़ी गांव के लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण बंदरों के उत्पात से खेतीबारी का काम छोड़ने लगे हैं. ये बंदर फसलों की बिजाई के साथ ही बीजों को उखाड़ना शुरू कर देते हैं जिससे किसानों के खेत खाली हो जाते हैं. नलवाड़ी गांव के निवासियों की माने तो बंदर इतने खूंखार हो चुके हैं कि कई बार घर में घुसकर उत्पात मचाने लगते हैं. यही नहीं बंदरों के कारण वे अपने बच्चों को अकेले स्कूल भी नहीं भेज पा रहे हैं. बंदर बच्चों को काटने के लिए पीछे दौड़ पड़ते हैं. ये बंदर कई ग्रामीणों को अपना शिकार बना चुके हैं.

ये उत्पाती बंदर कई ग्रामीणों को अपना शिकार बना चुके हैं.


बंदरों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि

गौरतलब है कि हिमाचल सरकार (Himachal Government) ने बंदरों के आतंक से छुटकारा पाने के लिए बंदरों को बर्मिन घोषित करके इन्हें मारने से पाबंदी हटा दी है. इसके बावजूद आस्था के चलते बंदरों का शिकार करने की कोई जहमत नहीं उठा रहा है. ऐसे में प्रदेश में बंदरों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है. सरकार द्वारा बंदरों की संख्या में कमी लाने के लिए बंदर नसबंदी केंद्र (Monkey sterilization center) भी स्थापित किए गए हैं. बंदरों की नसबंदी के आंकड़े महज कागजों तक ही सीमित हैं. धरातल पर लगातार बंदरों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है. यह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रही है. ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से बंदरों की समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाई है.

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First published: October 12, 2019, 2:58 PM IST
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