करगिल विजय दिवस: घरवाले सेहरा में देखना चाहते थे, शहीद अमोल कालिया तिरंगे में लिपटे आए

पिता ने कहा कि मुझे आज भी अमोल कालिया से अंतिम भेंट याद है. जो मेरे जन्मदिन पर 23 मई 1999 को हुई. अमोल मुझे दिल्ली से बर्थ-डे विश करने के लिए आया था.

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 26, 2019, 1:03 PM IST
करगिल विजय दिवस: घरवाले सेहरा में देखना चाहते थे, शहीद अमोल कालिया तिरंगे में लिपटे आए
हिमाचल के ऊना के अमोल कालिया 26 साल की उम्र में शहीद हो गए थे.
Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 26, 2019, 1:03 PM IST
कारगिल शहीद कैप्टन अमोल कालिया को नमन, कालिया ने पाक सैनिकों को दिया था करारा जबाब, कारगिल में 16000 फुट ऊंची चौकी संख्या 5203 को कराया मुक्त, कालिया सहित 14 सैनिकों ने शहीदी से पहले 25 को उतारा मौत के घाट, शहीद के पिता ने पाकिस्तान पर ठोस नीति बनाने का किया आग्रह

घर पर शादी को लेकर मंथन चल रहा था, घरवाले सेहरा को लेकर संपने संजोए बैठे थे, लेकिन वह तिरंगे में लिपटे आया. ये कहानी है करगिल वॉर में शहीद हुए हिमाचली सपूत अमोल कालिया की. आज देश करगिल विजय दिवस की 20 वर्षगांठ मना रहा है. इस युद्ध में हिमाचल के 50 से अधिक जवानों ने शहादत दी थी. इन्हीं में एक थे अमोल कालिया. शहीद विक्रम बत्रा, सौरभ कालिया और अमोल कालिया का नाम आज भी गर्व से लिया जाता है.

26 साल में शहीद हो गए थे अमोल
मूलत: ऊना के चिंतपूर्णी से संबंध रखने वाले कैप्टन अमोल कालिया का जन्म 26 फरवरी 1974 को शिक्षक सतपाल कालिया और ऊषा कालिया के घर हुआ. अमोल कालिया के बड़े भाई अमन कालिया भी भारतीय वायु सेना में हैं. अच्छे परिवार में जन्मे अमोल कालिया की प्रारंभिक शिक्षा नंगल (पंजाब) में हुई. पिता सतपाल कालिया का सपना साकार करने के लिए अमोल कालिया ने 1991 में एनडीए की परीक्षा पास की. 1995 आईएमई कमीशन प्राप्त करने के बाद भारतीय सेना में कमीशन मिला. युवा सेकंड लेफ्टिनेंट अमोल कालिया को 1996 में खेमकरण सेक्टर में पोस्टिंग मिली.

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पिता और भाई के साथ अमोल कालिया.


अमोल कालिया पहाड़ी युद्ध के विशेषज्ञ
स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानने वाले कैप्टन अमोल कालिया सदैव सैनिकों की वीरता की बातें करते थे. दुश्मन को सबक सिखाना उनका पैशन था. अमोल कालिया पहाड़ी युद्ध के विशेषज्ञ भी माने जाते थे. उनकी अधिकतर सेवाएं सियाचिन गलेशियर, कारगिल, द्रास व लेह जैसे कठिन क्षेत्रों में रही. सन् 1999 में कालिया कारगिल में तैनात थे. जून 1999 के पहले सप्ताह को विशेष निर्देश के तहत कैप्टन अमोल कालिया और उनके 13 साथियों को बटालिक सेक्टर में 16,000 फुट ऊंची बर्फ से ढकी चौकी-5203 पर दुश्मन से आजाद करवा तिरंगा लहराने की जिम्मेवारी सौंपी गई.
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सात घंटे का लंबा संघर्ष
9 जून 1999 को कैप्टन कालिया ने अपने 13 जवानों सहित दुश्मन के 25 सैनिकों व मुजाहीदीनों के साथ करीब 7 घंटे भीषण संघर्ष किया. दो जवानों की शुरूआती शहीदी के बाद कैप्टन अमोल कालिया ने मोर्चा संभाला. दुश्मन की ओर से आई गोली ने उन्हें घायल कर दिया. जख्मी हालत में एलएमजी गन उठाकर कै. कालिया ने दुश्मन पर ताबडतोड़ गोलियां बरसाईं. कालिया ने चार दुश्मनों को अपनी गोली का निशाना बनाया. सभी दुश्मनों को मार गिराकर और खुद शहीद हो गए. कैप्टन अमोल कालिया का पार्थिव शरीर 21 जून को नंगल लाया गया था, जहां से हजारों नम आंखों के बीच करीब 70 किलोमीटर का सफर तय कर चिंतपूर्णी तक ले जाया गया.

अमोल कालिया नंगल के इसी स्कूल में पढ़े थे.
अमोल कालिया नंगल के इसी स्कूल में पढ़े थे.


मरणोपरांत वीर चक्र
चिंतपूर्णी में उनके पैतृक गांव में कालिया का अंतिम संस्कार सैनिक सम्मान के साथ किया गया. भारत के राष्ट्रपति ने अमोल कालिया को मरणोपरांत वीर चक्र से अलंकृत कर सारे राष्ट्र की तरफ से अमोल के जज्बे को सलाम किया. शहीद कैप्टन अमोल कालिया के पिता को आज भी अपने बेटे पर नाज है, लेकिन कहीं न कहीं सरकारों से वीर सपूतों को भूलने का मलाल भी शहीद के पिता के दिल में है. शहीद कैप्टन अमोल कालिया के पिता ने बताया कि अमोल में शुरू से ही सेवा भावना का जज्बा था. उन्होंने बताया कि आधी रात को भी अगर किसी को उसकी जरूरत पड़ती थी, तो वो हमेशा तैयार रहता था. सतपाल कालिया की मानें  तो उनकी इच्छा थी कि उनके बेटे देश सेवा में करें, जिसे दोनों बेटों ने पूरा भी किया उन्होंने कहा कि छोटी सी उम्र में देश के लिए शहादत देकर उनके बेटे ने उनका नाम ऊंचा किया है.

आज भी ताजा है अंतिम मुलाकात: पिता
उन्होंने बताया कि मुझे आज भी अमोल कालिया से अंतिम भेंट याद है. जो मेरे जन्मदिन पर 23 मई 1999 को हुई. अमोल मुझे दिल्ली से बर्थ-डे विश करने के लिए आया था. 9 जून को मिले पत्र में अमोल ने वायदा किया था कि जून माह में अंत में आकर शादी की तिथि तय करूगां, लेकिन जून का वो अंत, आज तक न आया.

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First published: July 26, 2019, 12:23 PM IST
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