धौम्येश्वर महादेव मंदिर: पांडवों के गुरू धौम्य ऋषि ने किया था तप, शिव ने दिए थे दर्शन

धौम्येश्वर मंदिर प्रबंधन में जुटी ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ गरीब और असहाय लोगों की मदद भी की जा रही है.

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 12, 2019, 3:21 PM IST
धौम्येश्वर महादेव मंदिर: पांडवों के गुरू धौम्य ऋषि ने किया था तप, शिव ने दिए थे दर्शन
ऊना का धौम्येश्वर शिव मंदिर.
Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 12, 2019, 3:21 PM IST
हिमाचल प्रदेश देवी देवताओं की पवित्र धरती है और जहां अनेकों मंदिर स्थापित है. इन्ही में से एक मंदिर है ऊना जिला के तलमेहड़ा में. धौम्येश्वर शिव मंदिर को लेकर पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडवों के पुरोहित धौम्य ऋषि ने इसी स्थान पर भगवान शिव को आराधना की थी.

भगवान ने तपस्या से प्रसन्न होकर धौम्य ऋषि द्वारा स्थापित शिव लिंग की सच्चे मन से पूजा अर्चना करने वालो की सभी मनोकामनाएं पूरी करने का वरदान दिया था. महाशिवरात्रि और सावन के माह के अलावा रोजाना दूर दराज से श्रद्धालु धौम्येश्वर शिव मंदिर में पहुंचते हैं. सावन माह के अंतिम सोमवार को भी धौम्येश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का खूब जमघट लगा और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा अर्चना की.

बंगाणा उपमंडल के तलमेहड़ा गांव में शिवालिक की पहाड़ियों पर स्थित धौम्येश्वर मंदिर स्थापित है, जो कि सदाशिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. इस मंदिर का निर्माण पचास के दशक में हुआ था.

ऊंचाई से दिखता है पूरा जिला

सदाशिव मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है कि पूरा वर्ष यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु नमन करने और भगवान शंकर की आराधना करने के लिए पहुंचते हैं. जिला के सबसे खूबसूरत स्थलों में से एक तलमेहड़ा की पहाड़ी में से सबसे ऊंचे पहाड़ ध्यूंसर जंगल पर स्थित सदाशिव मंदिर से पूरे जिला का आलौकिक नजारा देखने को मिलता. मंदिर चारों ओर जंगलों से घिरा हुआ है. मंदिर से न केवल जिला का ही नजारा दिखता है, बल्कि धौलाधार की पहाडिय़ां भी दिखाई देती है, जो कि अलग ही नजारा है.

ये है मान्यता
मान्यता है कि करीब 5500 वर्ष पहले महाभारत काल में पांडवों के पुरोहित श्री धौम्य ऋषि ने तीर्थ यात्रा करते हुए इसी ध्यूंसर नामक पर्वत पर शिव की तपस्या की थी. भगवान शिव ने प्रसन्न होकर दर्शन देते हुए वर मांगने को कहा. इस पर ऋषि ने वर मांगा कि इस पूरे क्षेत्र में आकर धौम्येश्वर शिव की पूजा करने वाले की मनोकामनाएं पूरी होगी. इसके बाद से जो भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच कर सच्चे मन से मन्नत मांगता है, तो उस भक्त की मुराद पूरी होती है.
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Una temple story
इस मंदिर का निर्माण पचास के दशक में हुआ था.


कई नामों से पुकारते हैं
मंदिर को धौम्येश्वर शिवलिंग, ध्यूंसर महादेव और सदाशिव के नाम से पुकारा जाता है. मंदिर ट्रस्ट के प्रधान प्रवीण शर्मा के मुताबिक 1937 में मद्रास के एक सैशन जज स्वामी ओंकारा नंद गिरी को स्वप्र में भगवान शिव ने दर्शन देते हुए कहा कि पांडवों के अज्ञातवास के समय उनके पुरोहित धौम्य ऋर्षि द्वारा स्वयंभू शिवलिंग अर्चना थी. शिवलिंग की खोज कर पूजा अर्चना करें. स्वामी ओंकारा नंद गिरी ने स्वप्र के आधार पर शिवलिंग को काफी जगह खोजा, लेकिन नहीं मिला. घूमते-घूमते सन् 1947 में स्वामी ओंकारानंद जी सोहारी पहुंच गए. सोहारी स्थित सनातन उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव प्रसाद शर्मा डबराल के सहयोग से  स्वामी ओंकारा नंद गिरी जी शिवलिंग के पास पहुंचे. उन्होंने कहा कि सबसे पहले आठ बाय आठ फुट का पहला मंदिर बनाया था, जोकि अब एक विशाल रूप धारण कर चुका है.

ट्रस्ट भी चला रहे हैं
धौम्येश्वर मंदिर प्रबंधन में जुटी ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ गरीब और असहाय लोगों की मदद भी की जा रही है. ऊंचाई पर स्थित शिवलिंग के दर्शन करने के लिए दिव्यांगों व वृद्धों को पेश आने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए लिफ्ट का प्रबंध किया गया है. ट्रस्ट द्वारा गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है, जिसमें 100 के करीब गौवंशों को आश्रय दिया गया है. वहीँ गरीब कन्याओं की शादी और गरीब मरीजों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता का बीड़ा मंदिर ट्रस्ट द्वारा उठाया गया है.
First published: August 12, 2019, 2:53 PM IST
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