नम आंखों से शहीद अनिल को विदाई, बहन बोली-खून का बदला-खून से लो

शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर पहुंचे सेना के अधिकारी अभिनव शर्मा ने बताया कि अनिल जसवाल एक जांबाज सैनिक था. उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिला में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में अनिल को गोलियां लग गई थी.

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 20, 2019, 11:10 AM IST
नम आंखों से शहीद अनिल को विदाई, बहन बोली-खून का बदला-खून से लो
शहीद अनिल और उसकी बहन सपना.
Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 20, 2019, 11:10 AM IST
जम्मू एवं कश्मीर के अनंतनाग में आंतकियों से लोहा लेते हुए शहादत पाने वाले हिमाचल के ऊना के बंगाणा के सरोह के अनिल जसवाल का अंतिम संस्कार बुधवार देर शाम पैतृक गांव सरोह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया. इस दौरान शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. अंतिम विदाई में आए लोगों की जहाँ आँखें नम थी, वहीँ जुबान पर पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भी था.

सरकारी नौकरी और 20 लाख मदद का ऐलान
शहीद अपने पीछे पांच माह के बेटे, पत्नी और माता पिता  छोड़ गया है. प्रदेश सरकार की ओर से पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर शहीद की अंतिम विदाई में शामिल हुए और सरकार की ओर से परिवारिक सदस्य को सरकारी नौकरी और 20 लाख की आर्थिक मदद का ऐलान किया.

छह माह का बेटा पीछे छूटा

वीरांगना पत्नी श्वेता की गोद में महज 6 महीने के बेटे को छोड़कर 27 वर्षीय शहीद अनिल जसवाल पंचतत्व में विलीन हो गया. शहीद के पांच महीने के बेटे वरुण ने शहीद के चचेरे भाई व अपने चाचा संदीप जसवाल की गोद में चढ़कर पिता की पार्थिव देह को घर पर नमन किया. मंजर देख कर कर कोई बिलख उठा. मासूम ने जन्म के बाद पिता की गोद में चंद घंटों का ही वक्त बिताया होगा. उसे क्या मालूम कि उसके जन्म लेने के चंद महीने बाद ही पिता देश पर कुर्बान हो कर स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम इतिहास दर्ज करवा लेंगे.

दो साल पहले हुई थी शादी
करीब 2 साल पहले ही अनिल श्वेता से परिणय सूत्र में बंधे थे. शहीद अनिल ने 7 जून को ही घर से ड्यूटी पर वापसी की थी और घर से जाते समय वादा किया था कि जल्द ही दोबारा लौटकर अपने बेटे के साथ जमकर समय बिताएंगे. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था.
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बुधवार तक नहीं दी पत्नी को सूचना
शहीद की वीरांगना पत्नी को बुधवार सुबह नौ बजे तक भी पति की शहादत की सूचना नहीं दी गई थी. शहीद का पार्थिव शरीर हैलीकॉप्टर के माध्यम से बुधवार सुबह चंडीगढ़ लाया गया. हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वार मैहतपुर में दोपहर करीब सवा एक बजे पहुंचे. इसके बाद डेढ़ बजे ऊना में पहुंचे, जहां पर डीसी ऊना संदीप कुमार व पुलिस अधीक्षक दिवाकर शर्मा ने शहीद को सलामी दी. करीब 45 किलोमीटर लंबे रास्ते में खुरवाई, थानाकलां, बंगाणा व लठियाणी में लोगों ने नारे लगाते हुए शहीद को श्रद्धांजलि दी.

पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे
युवाओं ने गुस्सा जाहिर करते हुए पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए. बुधवार को सवा तीन बजे शहीद अनिल जसवाल का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा. पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचते ही भारत माता की जय, शहीद अनिल जसवाल अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद गगनभेदी नारे गूंज उठे. सेना के जवानों ने शहीद के पार्थिव शरीर को गाड़ी से उतारा और शहीद के घर लाया गया. शहीद का पार्थिव शरीर देख पत्नी श्वेता, माता अनिता, पिता अशोक, बहन सपना बिलखते रहे. शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए हजारों ग्रामीणों का तांता लग गया.

शहीद को गॉर्ड ऑफ ऑनर
जैसे ही गांव के श्मशान घाट में शहीद अनिल जसवाल का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, वहां मौजूद हजारों नम आंखों ने शहीद को अंतिम विदाई दी. सेना व पुलिस के जवानों ने शहीद को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया. श्मशान घाट में सेना के जवानों ने शहीद के पिता अशोक को सम्मान स्वरूप वह तिरंगा भेंट किया, जिसमें शहीद का शव लिपटा हुआ था. शहीद अनिल जसवाल के पिता अशोक खुद पूर्व सैनिक है. बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है. अपने आंसुओं को बहादुरी के बावजूद पिता छिपा नहीं पाए.

आतंक से सख्ती से निपटे केंद्र
नम आंखों के साथ पिता अशोक ने कहा कि हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि वे आंतकवाद पर कड़ा प्रहार करे और सख्ती से निपटे. उन्होंने कहा कि अब समय है कि आंतकवाद के नासूर को कुचल दिया जाए, ताकि कोई भी जवान शहीद न हो.शहीद की माता अनीता और बहन सपना रो-रो कर खून का बदला खून से लेने की बात ही करती रही. माँ इस दुःख को सह नहीं पा रही है, वहीँ सपना भी अपने भाई को रोकर पुकारती रही और सरकार से अपने भाई के खून का बदला खून से लेने की मांग करती रही. प्रदेश सरकार की ओर से पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर शहीद की अंतिम विदाई में शामिल हुए. वीरेंद्र कंवर ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को हिमाचल सरकार की ओर से 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के अलावा परिवारिक सदस्य को सरकारी नौकरी ऐलान किया.

अनिल जसवाल एक जांबाज सैनिक था: सेना
शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर पहुंचे सेना के अधिकारी अभिनव शर्मा ने बताया कि अनिल जसवाल एक जांबाज सैनिक था. उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिला में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में अनिल को गोलियां लग गई थी, जिसके बाद उन्हें जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन अनिल जसवाल शहीद हो गए.

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First published: June 20, 2019, 10:15 AM IST
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