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ऊना: 5 घंटे पहले हो गई थी मौत, निजी अस्पताल ने बच्चे को PGI किया रेफर, परिजनों का फूटा गुस्सा
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Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 26, 2020, 5:24 PM IST
ऊना: 5 घंटे पहले हो गई थी मौत, निजी अस्पताल ने बच्चे को PGI किया रेफर, परिजनों का फूटा गुस्सा
ऊना में निजी अस्पताल के बाहर बीते बुधवार को हंगामा हुआ था. (FILE PHOTO)

डाक्टर आशीष शर्मा ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. डाक्टर ने कहा कि दोनों बच्चे सीरियस कंडीशन में ही उनके पास आये थे और समय रहते उन्होंने उनको रैफर कर दिया था.

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ऊना. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊना जिला के मुख्यालय में निजी अस्पताल में दो बच्चों की मौत (Baby Death) पर परिजनों का गुस्सा फूटा. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बच्चों के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल (Hospital) परिसर में जमकर नारेबाजी की. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बच्चों की मौत के बाद उन्हें पीजीआई रैफर (PGI) करने का आरोप भी जड़ा है. परिजनों ने जिला प्रशासन से अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार भी लगाई.

सात दिन तक बच्चे को रखा
जानकारी के अनुसार, शामिल खान निवासी पीपलू ने कहा कि 15 फरवरी को उसकी पत्नी ने ऊना के एक निजी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया. लेकिन बीमार होने के चलते वह अपनी बच्ची को उपचार के लिए ऊना के नामी निजी अस्पताल में लाए. डॉक्टर ने बच्चे के सही उपचार का भरोसा दिया. सात दिन बच्ची को अस्पताल में उपचाराधीन रखा गया और गम्भीर हालत में भी रेफर नही किया गया.

पांच घंटे पहले हो चुकी थी मौत



डॉक्टर बच्ची के ठीक होने का आश्वासन देते रहे, लेकिन 22 फरवरी को डॉक्टर ने बच्ची को रेफर कर दिया. जब बच्ची को पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाया तो डॉक्टरों ने कहा कि उनकी बच्ची की मौत पांच घंटे पहले ही हो चुकी है, जिसे सुन उनके होश उड़ गए. परिजनों का आरोप है कि उनकी बच्ची की मौत ऊना निजी अस्पताल में ही हो गई थी तो मरने के बाद रेफर क्यों किया गया.



ऊना में अस्पताल के बाहर पुलिस.
ऊना में अस्पताल के बाहर पुलिस.


यह है दूसरा मामला
दूसरे मामले में कमलजीत निवासी हथलोण ने कहा कि उसकी पत्नी की डिलीवरी 15 फरवरी को हुई थी, लेकिन उनके बच्चे की तबियत बिगड़ने पर वह ऊना के इसी नामी अस्पताल में आए, चिकित्सक ने 7 दिन उनके बच्चे को उपचाराधीन रखा और 22 फरवरी को उनके बच्चे को रेफर कर दिया. उनके बच्चे की भी मौत हो गई. अगर डॉक्टर बच्चे का इलाज करने में असमर्थ था तो उसे उपचाराधीन क्यों रखा गया. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रसाशन ने जिस तरह बिल बनाए, उन्होंने उसे चुकता किया लेकिन उसके बावजूद भी उनके बच्चे की मौत हो गई.

ऊना में अस्पताल के बाहर परिजन.
ऊना में अस्पताल के बाहर परिजन.


डॉक्टर ने नकारे आरोप
डाक्टर आशीष शर्मा ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. डाक्टर ने कहा कि दोनों बच्चे सीरियस कंडीशन में ही उनके पास आये थे और समय रहते उन्होंने उनको रैफर कर दिया था.

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First published: February 26, 2020, 5:24 PM IST
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