ऊना में बनी ‘मानवता की दीवार’, जरूरतमंद बिना किसी की अनुमति घर ले जा सकेंगे सामान

यहां लोग अपनी ज़रूरत के बाद बचे सामान रख सकते हैं, जिसे कोई ज़रूरतमंद वहां से बिना किसी अनुमति के ले जा सकता है.

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: April 6, 2019, 4:09 PM IST
Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: April 6, 2019, 4:09 PM IST
हिमाचल प्रदेश के ऊना में ईरान की तर्ज़ पर वॉल ऑफ़ ह्यूमैनिटी यानी मानवता की दीवार का निर्माण किया गया है. यहां लोग अपनी ज़रूरत के बाद बचे सामान रख सकते हैं, जिसे कोई ज़रूरतमंद वहां से बिना किसी अनुमति के ले जा सकता है. हिमाचल प्रदेश में इस तरह की पहली योजना के निर्माता और ऊना के डीएम राकेश प्रजापति ने भविष्य में अन्य स्थानों पर इस योजना को शुरू करने का दावा किया है. प्रशासन की इस पहल की जमकर सराहना हो रही है.

एक ओर जहां ऐसे लोग हैं जो रोज़मर्रा की ज़रूरत के लिए भी तरस रहे हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग ऐसे भी हैं जिनके पास बहुत कुछ ज़रूरत से ज्यादा है और वो उसे बेकार जाने देते हैं. समाज की इसी असमानता को दूर करने के लिए जिला ऊना में भी ईरान की तर्ज़ पर वॉल ऑफ़ ह्यूमैनिटी बनाई गई है. ऊना प्रशासन और नगर निगम के संयुक्त प्रयास और डीएम राकेश प्रजापति की सोच से दीवार का निर्माण किया गया है. इस दीवार का मकसद जरूरतमदों को बिना किसी रोकटोक के मदद देना है.

ऊना के संपन्न व मध्य वर्गीय परिवारों की मदद लेकर इस दीवार के शुभारम्भ के साथ ही ज़रूरतमंद लोगों को कपड़े, बर्तन व अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का क्रम भी शुरू कर दिया गया है. जबकि इस दीवार पर यह भी लिखा गया है कि जो आपके पास ज्यादा है, दे जाएं और जो कम है वह ले जाएं. वहीं मानवता की इस दीवार के एक तरफ वसुदेव कुटुंबकम भी लिखा गया है.

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इससे पहले ईरान में जरूरतमंदों की सहायता के लिए ऐसा प्रयास किया जा चूका है. ऊना जिला हिमाचल प्रदेश में ऐसी पहल करने वाला पहला जिला बन गया है. इस योजना को अमलीजामा पहनाने वाले ऊना डीएम ने मानवता की इस दीवार के पूरा होने के बाद जिला ऊना में अन्य स्थानों पर भी ऐसी दीवारों का निर्माण किये जाने का दावा किया है. वहीँ डीएम ने आने वाले समय में वॉल ऑफ़ बुक्स बनाने का भी दावा किया, जिससे लोग घरों में पड़ी बिना जरूरत की किताबों को रख सकते हैं. जबकि जरूरतमंद उन किताबों को वहां पढ़ने के साथ-साथ अपने घर भी लेकर जा सकेंगे.

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First published: April 6, 2019, 4:00 PM IST
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