लाइव टीवी

#HumanStory: 'नौकरी से भगा दिया क्योंकि चेहरा देखकर लोग डर जाते थे', आपबीती- एसिड अटैक सर्वाइवर की

News18Hindi
Updated: January 13, 2020, 9:24 AM IST
#HumanStory: 'नौकरी से भगा दिया क्योंकि चेहरा देखकर लोग डर जाते थे', आपबीती- एसिड अटैक सर्वाइवर की
कहानी, एसिड अटैक सर्वाइवर अनमोल की

कांच-सा पारदर्शी चेहरा, बड़ी-बिल्लौरी आंखें, खड़ी नाक और तनी गर्दन. एसिड अटैक की शिकार (acid attack survivor) अनमोल का चेहरा इससे अलग है. चेहरे और गर्दन से लेकर तमाम देह पर झुलसने के निशान. बाईं आंख सोते हुए भी खुली रहती है. इस सबके बावजूद रैंप (ramp) पर चलती अनमोल (Anmol Rodriguez) जब मुस्कुराती हैं तो स्टेज जगमगा उठता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2020, 9:24 AM IST
  • Share this:
चलती हूं तो लोग रुक-रुककर देखते हैं. देखते हुए खुसपुसाते हैं. मान लेते हैं कि मेरा झुलसी लकड़ी जैसा चेहरा किसी नाकामयाब लव-स्टोरी (unsuccessful love story) की देन है. बस-ट्रेन में बैठूं तो लोग दूर हट जाते हैं जैसे मुझे कोई फैलने वाली बीमारी (contagious disease) हो. पहले नसों में खून की जगह आंसू बहते थे. अब रोती नहीं, देखकर बस मुस्कुरा देती हूं.

ये किस्सा है, 22 साल की अनमोल के जीवट का, जिनका शरीर जला लेकिन इरादे नहीं.

उस रोज पापा धड़धड़ाते हुए घर के भीतर आए. मैं यही कोई दो महीने की रही होऊंगी. मां की गोद में सो रही थी. तभी पापा ने मां पर एसिड की बोतल उड़ेल दी. मां से गिरता एसिड मुझे भी झुलसाता चला गया. जली हुई मां और बच्ची को पड़ोसियों ने अस्पताल पहुंचाया. इलाज के दौरान ही मां नहीं रही. मैं बच गई. अस्पताल मेरा घर बना. नर्सें मेरी मांएं. मैं इतनी छोटी थी कि मुझे कुछ भी याद नहीं. दर्द भी नहीं. नर्सों के मुंह से मैं अपनी मां की बात ऐसे सुनती, जैसे परियों की कोई कहानी सुन रही हूं. मेरे जख्म साफ करती नर्सें और डॉक्टर रोया करते. इन्हीं आंसुओं में मां का प्यार खोज लेती.

अस्पताल में आते लोग डरते हैं. किसी को फिनाइल की गंध आती है, किसी को खून देखकर बेहोशी. मेरा बचपन वहीं बीता. मरीज मेरे मेहमान थे और अस्पताल के गलियारे खेल का मैदान. 

पांच साल अस्पताल के गलियारों में खेलते, मरीजों को देखते बीते (प्रतीकात्मक फोटो)


5 साल की हुई तो अनाथालय भेज दिया गया. अनाथालय में मैं और बच्चों से अलग नहीं थी. बाकी बच्चों की तरह खेलती. उनकी तरह शरारतें करती और उन्हीं की तरह बोलती. किसी ने भी मुझे ये अहसास नहीं दिलाया कि मैं आम बच्चों से अलग हूं. गणेश-पूजा या कोई त्योहार होता तो मैं भी और लड़कियों की तरह सजा करती. बाल और होंठ सजाती. अच्छे कपड़े पहनती. बस दूसरे बच्चों और मुझसे एक ही फर्क था. मुझे कभी भी स्टेज पर जाना 'अलाऊ' नहीं किया गया जबकि मुझे डांस करना, पोज करना बहुत अच्छा लगता था. सालों बाद मुझे इसकी वजह पता चली.

उन्हें डर था कि जब मैं खुद को दूसरों से अलग जानूंगी तो सह नहीं सकूंगी. और यही हुआ भी. कॉलेज गई तभी जाना कि मैं 'अगली' (बदसूरत) हूं. ऐसा एक नहीं, कईयों बार सुनने को मिला. शुरुआत में कोई भी मुझसे दोस्ती के लिए तैयार नहीं था क्योंकि मैं सबसे अलग दिखती. कोने में बैठकर अकेली लंच करती. क्लास में सबसे आखिरी बेंच पर अकेली बैठती. मैं खुद को ज्यादा से ज्यादा अदृश्य रखने की कोशिश करती. दबे पांव क्लास में घुसती. लेक्चर के दौरान कोई सवाल नहीं करती थी.

मैं पढ़ने में पिछड़ने लगी. कॉलेज जाना बंद कर दिया. रिजल्ट आया. मैं फेल हो गई थी. तब पहली बार अनाथालय के लोगों को ये सब पता चला.

पहली बार अनाथालय के लोगों को ये सब पता चला (प्रतीकात्मक फोटो)


हिम्मतों का लेन-देन हुआ. और मैं दोबारा पढ़ने लगी. पहली बार नौकरी के लिए निकली तो पूरी तरह से तैयार थी. कॉर्पोरेट के कपड़े, उनकी-सी बोली और काम करने में फुर्ती. सब ठीक चल रहा था कि थोड़े दिनों बाद अनाथालय के ही लोगों ने मुझे काम पर जाने से रोकर दिया. वजह! दफ्तर के लोग मेरी वजह से 'फोकस' नहीं कर पाते थे.

अनमोल याद करती हैं- ऑफिस स्टाफ ने HR से शिकायत की थी. उनका कहना था कि वे रोज ऐसी शक्ल नहीं देख सकते. मुझे देखने से उनके काम पर असर पड़ रहा था.

तब पहली बार मुझे अपने अलग होने का अहसास इतनी शिद्दत से हुआ. दो महीने की उम्र में अपना ही पिता एसिड फेंक दे. हमले में मां की मौत हो जाए. अनाथालय ही जिसका घर हो, और चेहरा भी बदसूरत हो. ऐसी लड़की के लिए दुनिया में कोई जगह नहीं. मैं परेशान रहने लगी.

बेरोजगारी और परेशानी के उन दिनों में मैंने फेसबुक पर पहली बार अपनी फोटो डाली. पहले मैं सोशल मीडिया पर तो थी लेकिन कभी फूल, कभी किसी फेक तस्वीर के साथ. अब कोई परदा नहीं रहा था.

मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने लगी


रात में फोटो डाली. सुबह जागी तो फेसबुक पर लाइक्स और कमेंट्स भरे पड़े थे. हिम्मत को सराहते हुए कमेंट्स. पहली बार अनाथालय से बाहर के लोगों से तारीफ मिली थी. मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने लगी. फिर एक यूनिवर्सिटी में एक प्रोजेक्ट के लिए मॉडलिंग का ऑफर आया. वो लड़की जिसकी शक्ल ने उसकी नौकरी छीन ली, उसे स्टेज पर चलना था. मैंने खूब तैयारी की. धीरे-धीरे मुझे और ऑफर आने लगे.

अब अनमोल सुपर मॉडल्स के बीच रैंप वॉक करती हैं. हालांकि फैशन इंडस्ट्री की दुनिया उतनी खूबसूरत नहीं, जितनी लगती है.

अनमोल बताती हैं- लोग खुद को नेकनीयत दिखाने के लिए रैंप पर चमकती मॉडलों के बीच किसी एसिड अटैक सर्वाइवर या वजनी शरीर वाली औरतों को लेते हैं. शो के बाद पेमेंट की बात चले तो कहते हैं- ऐसी शक्ल के साथ तुम्हें इतने बड़े लोगों के बीच चलने का मौका मिला. कोई कहता है- सर्वाइवर हो, कोई मॉडल नहीं, जो इतने पैसे मांगती हो. फैशन की दुनिया बहुत सतही है. यहां आपको पता ही नहीं चलता और अंदर ही अंदर आपको काट दिया जाता है.

हालांकि अनमोल को इससे खास फर्क नहीं पड़ता. वे कहती हैं- जबतक मुझे पता चला कि मैं दूसरों से अलग हूं, तब तक तो मैंने अपने लिए सपने चुन भी लिए थे. मुझे मॉडल बनना था. मैं मॉडल ही बनी. भले ही जले हुए शरीर के साथ.

और पढ़ने के लिए क्लिक करें-

#HumanStory: 'अब्बू यहीं जन्मे, औलादें यहीं पलीं, अब बुढ़ापे में अपना मुल्क छोड़ कहां जाऊं!'

#HumanStory: 70 की उम्र में जंगल में लकड़ियां काटा करती, आज इटली में सजी है इनकी पेंटिंग

#HumanStory: वो शख्स जो 'ऑर्डर' पर लिखता है इज़हार-ए-मोहब्बत के ख़त

#HumanStory: क्या होता है पाकिस्तानी जेल में हिंदुस्तानी के साथ, पढ़ें, वहां से लौटे जासूस को

#HumanStory: भाड़े पर रोनेवाली की दास्तां- दिनभर रोने के मिलते 50 रुपये

#HumanStory: सेक्सोलॉजिस्ट का क़बूलनामा: पहचान छिपाने को मरीज हेलमेट पहन आते और मर्ज़ बताते हैं

#HumanStory: 'लैट्रिन' साफ करने पर 2 बासी रोटियां और महीने के 5 रुपए मिलते

#HumanStory: लोग समझाते- लड़का गे होगा, तभी वर्जिनिटी जांचने से कतरा रहा है

#HumanStory: गटर साफ करते हुए कभी पैरों पर कनखजूरे रेंगते हैं तो कभी कांच चुभता है 

#HumanStory: दास्तां स्पर्म डोनर की- ‘जेबखर्च के लिए की शुरुआत, बच्चे देखकर सोचता हूं, क्या मेरे होंगे ये?’ 

#HumanStory: कहानी उस गांव की, जहां पानी के लिए मर्द करते हैं कई शादियां

#HumanStory: क्या होता है जेल की सलाखों के पीछे, रिटायर्ड जेल अधीक्षक की आपबीती

#HumanStory: सूखे ने मेरी बेटी की जान ले ली, सुसाइड नोट में लिखा- खेत मत बेचना 

#HumanStory: एक साथ 11 मौतों के बाद ये है 'बुराड़ी के उस घर' का हाल, मुफ्त में रहने से भी डरते हैं लोग

#HumanStory: अब्बू की उम्र का शौहर मिला, पिटने और साथ सोने में कोई फर्क नहीं था

#HumanStory: नशेड़ी का कुबूलनामा: सामने दोस्तों की लाशें थीं और मैं उनकी जेब से पैसे चुरा रहा था

(इस सीरीज़ की बाकी कहानियां पढ़ने के लिए human story पर  क्लिक करें.) 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए ह्यूमन स्‍टोरी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 13, 2020, 9:24 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर