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#HumanStory: बच्चेदानी हटवाने पर कमर झुक गई, आदमी कहता है- 'साड़ी नहीं, लाठी खरीद'

उस रोज बच्चों की देखभाल का जिम्मा मेरा था. 7-8 बच्चे रहे होंगे. सबको संभाल रही थी, तभी ठेकेदार पहुंचा. गालियां देते हुए ...अधिक पढ़ें

    महाराष्ट्र में गन्ने के खेत में काम करने वाली महिलाएं कमउम्र में ही यूटरस का ऑपरेशन करवा रही हैं. वजह! गन्ना कटाई के वो 6 महीने. पीरियड्स के दौरान छुट्टी पर जुर्माना कटता है. अस्थायी बस्ती में छेड़छाड़, बलात्कार आम है. छुटकारा पाने के लिए वे 'झंझट' ही खत्म कर देती हैं. news18 ने उन महिलाओं से बात की. तीसरी कड़ी में पढ़ें, प्रभावती को.

    शिंदी गांव है मेरा. यहीं जन्मी. यहीं ब्याह हुआ. आस-पड़ोस के गांव जाने के लिए भी 'मौके' की बाट जोहनी पड़ती थी. शादी के बाद जब जाना कि यहां गन्ना कटाई के लिए दूसरे राज्य में जाने का रिवाज है तो मैंने तुरंत हां कर दी. हमेशा से मां को खेतों में काम करते ही देखा. मिट्टी में ही काम करते हुए जवान हुई. नहीं जानती थी, गन्ना कटाई इतनी भारी पड़ेगी.

    कटाई के कई कायदे हैं. प्रभावती बताती हैं- गन्ना काटने का काम जोड़े में ही मिलता है. मर्द गन्ने काटता है, औरत ढेरियां बनाकर ट्रक पर चढ़ाती है. बच्चे हैं तो साथ में काम करेंगे. ज्यादा छोटे हों तो सब एक साथ बस्ती में रहेंगे. उनकी देखभाल के लिए एक औरत रहेगी. ये वही औरत होगी, जो 'महीने' से है. उसे आराम मिल जाएगा और बच्चों की देखभाल भी हो जाएगी. उसका आदमी शहर घूमेगा, पिक्चर देखेगा, और तभी लौटेगा जब औरत काम करने लायक हो जाए. जब झुंड की कोई औरत महीने से नहीं होती थी, तब बारी-बारी से सारी औरतों को बच्चों की देखभाल करनी होती थी.

    गन्ना कटाई के लिए बनी इन अस्थायी बस्तियों में सबसे ज्यादा शोषण होता है (फोटो- फर्स्टपोस्ट)
    गन्ना कटाई के लिए बनी इन अस्थायी बस्तियों में सबसे ज्यादा शोषण होता है (फोटो- फर्स्टपोस्ट)


    तब मेरी बारी चल रही थी. ठेकेदार आया. जबर्दस्ती की और चला गया. अगले रोज भी आया और उसके अगले रोज भी. बाद के कई दिन डर में बीते. डरती थी कि कहीं पेट से न हो जाऊं. आदमी से बताने का कोई सवाल ही नहीं था. ठेकेदार या औरत में चुनना हो तो आदमी ठेकेदार को ही चुनता. उससे पैसे मिलते हैं.

    खेत में काम करती और ठेकेदार से नजरें मिलतीं तो वो मूंछों ही मूंछों में हंसता दिखता. थककर थोड़ा सुस्ताने लगो तो तुरंत गंदी गाली निकालता. मैं अकेली नहीं थी जिसके साथ उसने ज्यादती की. कई साल बाद जाना कि बहुतेरी औरतों के साथ ऐसा हुआ था. होता चला आ रहा है. कोई भी अपने आदमी से नहीं बताती लेकिन जानती सब हैं.

    मार्च के आखिरी तक गन्ना कटाई पूरी हो चुकी थी. अब बारी थी पैसों के हिसाब की. ठेकेदार अपने आदमियों के साथ ठसके से बैठा था. एक-एक करके हर जोड़े का नाम पुकार रहा था. हम पहुंचे तो ठेकेदार कुछ कागज देख रहा था. वही देखते हुए कहा- तुम्हारे 7 हजार रुपये 'हम पर' बकाया हैं. उस 'तीन-दिवसीय' वाकये के बाद पहली बार मैंने मुंह खोला- यानी? ठेकेदार ने कागज मेरी तरफ सरका दिया. ये पढ़ लो. मैं तब भी उसे देखती रही. मुझे या मेरे साथ की किसी औरत या किसी मर्द को पढ़ना नहीं आता था. वो ये बात अच्छी तरह जानता था. अंगूठा लगाकर पति मुझे बाहर ले आया. अगले साल भी हम वहां गए और 7 हजार की कटाई मुफ्त में की. ये वही 7 हजार थे जो मेरे पीरियड्स के दौरान काटे गए थे.

    गन्ना कटाई के मौसम में सीजनल माइग्रेशन आम है (प्रतीकात्मक फोटो)
    गन्ना कटाई के मौसम में सीजनल माइग्रेशन आम है (प्रतीकात्मक फोटो)


    बच्चेदानी निकलवाई तब मैं यही कोई 27 की थी. दुबला-पतला फुर्तीला शरीर. धूल में भी सुई ढूंढ निकालें, ऐसी तेज आंखें. 15 आदमियों का खाना 'यूं' बना लेती. भर्राई आवाज में प्रभा बताती हैं- अब शरीर 'भोथरा' गया है. चल नहीं पाती. आदमी मेरा मजाकिया है. कहता है- 'साड़ी नहीं, अब लाठी खरीदा कर'. पहले प्रभा कहता था, अब भदभदी बुलाता है. चलती हूं तो सांस फूलती है. कमर में दर्द रहता है. इतनी भदभदा गई हूं कि शादी-ब्याह में साथ चलने से मना करता है.

    बचपन में फुफेरे-मौसेरे भाई-बहनों की शादी की दुआ करती ताकि घूमने का मौका मिले. अब घर में कैद रहती हूं. गन्ना कटाई के मौसम में पूरा गांव खाली हो जाता है. सिवाय इक्का-दुक्का बूढ़े-बूढ़ियों को छोड़. गांव भर में ताले लटके होते हैं. मेरा आदमी भी औरंगाबाद चला जाता है. मेरे जिम्मे एक ही काम रहता है- गांव के मंदिर की साफ-सफाई. वो करते भी दम फूलता है.

    कभी-कभार वो ठेकेदार भी दिखता है. मेरे ही गांव का है. एकाध बार घर भी आया था. पति ने चाय-बीड़ी मंगवाई. देने गई तो लगा जैसे वो फिर से मूंछों के पीछे हंस रहा हो. मलाल हुआ कि उस रोज मैं चीखी क्यों नहीं. (निजता बनाए रखने के लिए पीड़िता का नाम बदल दिया गया है.) 

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    Tags: Human story, Maharashtra, Sexual Abuse, Sexual violence

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