#BreakingSilence: उस रोज भैया ने कुछ ऐसा किया कि मेरा बचपन खत्म हो गया...

#BreakingSilence: उस रोज भैया ने कुछ ऐसा किया कि मेरा बचपन खत्म हो गया...
दुनियाभर की औरतें यौन-हिंसा झेलती आई हैं लेकिन अब चुप्पी तोड़ने का वक्त है

रास्ते पर चलती कम, दौड़ती ज्यादा हूं. घूरने को नजरअंदाज करने में मेरा सानी नहीं. भद्दे इशारे (sexual harassment) हों तो मोबाइल (mobile) में घुस जाती हूं. इससे भी काम न बने तो गाड़ियों से भरी सड़क पर आ जाती हूं. हादसे भी रेप (rape) से कुछ बेहतर ही होंगे!

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  • Last Updated: December 18, 2019, 4:47 PM IST
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यौन हिंसा पर देशभर की औरतों की कहानियां

"उस रोज तेज बारिश हो रही थी. पूरा मोहल्ला घरों में दुबका था, सिवाय उन 'भैया' के. गेट की आवाज से वो आए. दरवाजा खोला. मैं चुप थी. स्कूल के हादसे से डरी हुई. उसी रोज मेरी बेंच पार्टनर की मौत की खबर आई थी. दोस्तों ने कहा- 'उसका भूत तेरे पास आएगा. तू उसकी सहेली थी.' बारिश से हुआ अंधेरा 'भूत का डर' बढ़ा रहा था. उन 'भैया' के आने से राहत ही हुई. मैं खाना खा रही थी कि 'भैया' अचानक सामने खड़े हो गए. पैंट नीचे सरकी हुई. कौर हाथ से गिर गया. मैं चीख भी नहीं सकी. उसने पकड़ लिया. अरे, रोती क्यों हो...!" (इस सीरीज की पहली कहानी कल पढ़े.)

ये अकेला वाकया नहीं. ऐसी कितनी ही बातें हैं. मुझे घूरा गया. मैंने अश्लील इशारे देखे. जबरन छुआ गया. मनचाहे की कोशिश में उठाया-पटका गया. दुनिया देखी, तब जाना कि मैं अकेली नहीं. ज्यादातर औरतें हमेशा चुपचाप सहती रहीं.



News18 Hindi इसी चुप्पी की आवाज बनना चाहता है. #BreakingSilence सीरीज के तहत आप खुद या अपने आसपास छेड़छाड़ से लेकर बलात्कार तक हर वाकये को हमसे बांट सकते हैं.



भरोसा करना आपकी गलती नहीं (प्रतीकात्मक फोटो)


कितनी ही आधुनिक, कितनी ही मजबूत दिखें, लेकिन दुनियाभर की औरतें यौन-हिंसा झेलती आई हैं. हिंदुस्तान की गहरी काली आंखों वाली दक्षिणी औरतें, नींबू की फांक जैसी शोख उत्तर-पूर्वी लड़कियां, सूरज ने भी न छुआ हो, ऐसी दपदपाती पहाड़ी औरतें. ठहरी आवाज वाली अफ्रीकन औरतें. हर मौसम काले रंग ओढ़ती पश्चिमी लड़कियां. हरेक ने हमला झेला. सड़क पर. घर में. स्कूल में. दफ्तर में. किसी ने झपककर हमलावर को नोंच दिया. कोई दिनों बाद कह सकी. तो बहुतेरी हमेशा चुप रहीं. वे भी, जिन्हें आप सबसे ज्यादा सुरक्षित मानती हैं.

परखने के लिए, आइये, एक खेल खेलें.

आसपास के 'मर्दों' को टटोलते हैं. पिता, भाई, दोस्त, बेटा, जाननेवाला. उनसे पूछें- छेड़छाड़ से खुद को बचाने के लिए वो रोजमर्रा की जिंदगी में क्या करते हैं? शायद उन्हें ये कोई 'ट्रिक क्वेश्चन' लगे. शायद वे हंस पड़ें. या भड़क जाएं. हो सकता है एकाध कोई फुसफुसाती आवाज में कोई वाकया भी बता दे.

अब यही सवाल 'औरतों' से करें. जवाब आएंगे. इतने धड़ाधड़ कि आप सकते में आ जाएं. शाम की शिफ्ट टालती हूं... से लेकर मैं अपने बैग में क्या-क्या लेकर चलती हूं तक...

मैं अपनी बात सुनाती हूं. दफ्तर से लौटते हुए मेरी मुट्ठियां खास अंदाज में कसी होती हैं. एक 'अनएक्सपेक्टेड टच' और मैं हमला कर दूं, कुछ ऐसे. रास्ते पर चलती कम, दौड़ती ज्यादा हूं. घूरने को नजरअंदाज करने में मेरा सानी नहीं. भद्दे इशारे हों तो मोबाइल में घुस जाती हूं. इससे भी काम न बने तो गाड़ियों से भरी सड़क पर आ जाती हूं. हादसे भी रेप से कुछ बेहतर ही होंगे!

News18 Hindi इसी चुप्पी की आवाज बनना चाहता है (प्रतीकात्मक फोटो)


लगभग रोज ऐसे तमाम दिनों को जीती हूं. वक्त चेहरे बदल-बदलकर सामने आता है. पीछे चलता है. बगल में खड़ा कोंचता है. मेरी आदतें, मेरा पेशा और यहां तक कि मेरी हंसी भी उन सारे वक्तों ने मिलकर तय की. ढीले-ढाले कपड़े पहनती हूं. बाल नहीं बनाती. लिपस्टिक कभी नहीं लगाती.

ये सब कभी नहीं कहा.

फिर अब क्यों?

ताकि निर्भया, ..., और दिशा... अपने असल नामों के साथ जिंदा रह सकें. बोलना मामूली बात नहीं. चुप्पी तोड़ें. यकीन मानिए, आपकी गलती नहीं अगर आपने छोटी स्कर्ट पहनी. अगर आप देर रात बाहर थीं. अगर आप मर्दों से हंसी-ठट्ठा करती रहीं. भरोसा करना आपकी गलती नहीं. गलती है डर जाना. गलत है चुप रह जाना

बोलें... क्योंकि अभी नहीं, तो कभी नहीं.

#BreakingSilence सीरीज के तहत हम यौन हिंसा पर अलग-अलग तबकों और इलाकों की औरतों की कहानियां ला रहे हैं. आप भी अपनी कहानी हमसे शेयर कर सकते हैं. आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी. हमें इस पते पर email करें- Breakingsilence@nw18.com

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