Women's Day रियलिटी चेक: यहां मुखिया की जगह 'MP' करते हैं सारा काम

चिंता देवी

चिंता देवी

बिहार के कई पंचायतों की स्थिति ऐसी है कि मुखिया और सरपंच तो महिलाएं हैं लेकिन तो कार्यों का निष्पादन उनके पति यानि मुखिया पति (MP)और सरपंच पति (SP)करते हैं

  • Share this:

8 मार्च को मनाये जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर हर कोई आज महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकार की बात कह रहा है. हर तरफ महिला सशक्तीकरण की बात हो रही है। लेकिन, इन सबके आज हम आपको ऐसी महिलाओं के बारे में बताएंगे जिन्हें कहने के लिए अधिकार तो मिले हैं लेकिन उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी न के बराबर और उनके सारे अधिकारों का इस्तेमाल उनके पति ही करते हैं.

ETV/न्यूज 18 की टीम पटना के पंचायतों में मुखिया और सरपंच के पद पर काबिज महिलाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रियलिटी चेक करने पहुंची। इस दौरान जो भी देखने को मिला उससे तो यह साफ पता चलता है अभी भी महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी नहीं है और है भी तो वे इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं.

कई पंचायत की स्थिति ऐसी है कि मुखिया और सरपंच तो महिलाएं हैं लेकिन तो कार्यों का निष्पादन उनके पति यानि मुखिया पति (MP)और सरपंच पति (SP)करते हैं. पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के लखना पूर्वी पंचायत की मुखिया प्रमिला देवी हैं लेकिन प्रमिला देवी के सारे कार्यों को पूरा उनके पति यानि मुखिया पति द्वारिका पासवान करते हैं.



प्रमिला देवी सिर्फ हस्ताक्षर करने और प्रखंड में होने वाली बैठक में शामिल होने का काम करती हैं. आलम यह है कि प्रमिला देवी को यह तक नहीं पता कि उनके पंचायत की जनसंख्या और किन योजनाओं को मुखिया फंड के तहत पूरा किया गया.

women day
जन प्रतिनिधि

हां जबकि मुखिया पति द्वारिका पासवान को हर काम की जानकारी है. किन योजनाओं को पूरा किया गया है, कितना फण्ड खर्च हुआ है, लोगों से कैसे मिलना है ये सारी बातें द्वारिका पासवान बखूबी जानते हैं।

हमारी टीम जब लखना पूर्वी पंचायत में प्रमिला देवी से मिलने पहुंची तो उन्होंने बताया कि वो सिर्फ मीटिंग में जाती हैं जबकि अन्य कार्यों का संपादन उनके पति की करते हैं.

मीटिंग में जाने को लेकर भी मुखिया पति कहते हैं कि हमें अनुमति नहीं है इसलिए हम नहीं जा पाते हैं लेकिन वो बाहर जरूर खड़े रहते हैं. जब हमने प्रमिला देवी से अपने पंचायत संबधित कुछ जानकारी लेनी चाही मसलन पंचायत की योजना, फण्ड का खर्च होना, सात निश्चय, जनसंख्या तो इसकी कोई जानकारी प्रमिला देवी के पास नहीं थी.

उन्हें अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी, डीएम और सीएम का नाम तक नहीं पता था. ऐसी ही स्थिति पटना के लखनपार पंचायत में देखने को मिली जहां की सरपंच चिंता देवी भी महिला हैं लेकिन उनके अनुसार उन्हें सरपंच तो बना दिया गया है लेकिन उनके पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं.

चिंता देवी बताती हैं कि उप सरपंच और सरपंच पति यानि उनके पति ही कागजी कार्रवाई में उनकी मदद करते हैं. वो कहती हैं कि इतना बड़ा पद मिलने के बाद भी मैं खुद को मजबूत नहीं मानती. अभी भी मेरे पति और मैं मजदूरी करते हैं तो हमारे घर के जरूरी खर्चे पूरे होते हैं.

कुल मिलाकर जो तस्वीर दिखी वो कहीं न कहीं ये जरूर दर्शाती दिखी कि भले ही महिलाओं को पद पर बिठाकर या आरक्षण देकर पुरुषों के सामान अधिकार देने की बात कही जाती है लेकिन धरातल की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज