#जीवनसंवाद: जीवनशैली!

‘जो चीजें जल्दी तैयार हो जाती हैं, उनमें अक्सर स्वाद की कमी होती है. पकी हुई चीज़ों का स्वाद के साथ जीवन में भी बहुत महत्व है.‘

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:32 AM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:32 AM IST
इस समय हम सब 'फास्ट फूड' के दौर से गुजर रहे हैं. यह केवल भोजन की बात नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है. सबकुछ तुरंत! यह हमारी जीवनशैली बन गई है. हमारे पास धैर्य नहीं है. अगर किसी के पास है तो इसे उसकी कमजोरी के तौर पर लिया जाता है. हम धैर्य, विनम्रता, भरोसे से दूर जाते हुए समाज की ओर बढ़ रहे हैं. हमें इस बात को समझने की जरूरत है कि जो चीजें जल्दी तैयार हो जाती हैं, उनमें अक्सर स्वाद की कमी होती है. पकी हुई चीजों का स्वाद के साथ जीवन में भी बहुत महत्व है. ‌‌‌‌‌‌‌

आज जितनी तेजी से रिश्ते बन रहे हैं, उतनी ही तेजी से टूट रहे हैं. बनते समय जल्दी है और तोड़ते समय उससे भी अधिक. यह तो सामने दिख रहा है, अचानक नहीं हुआ है. यह हमारी सामाजिक जीवनशैली में परिवर्तन के दो दशक बाद के प्रारंभिक लक्षण हैं. 'फास्ट फूड' ने केवल हमारे खान-पान की आदतों को ही नहीं बदला, बल्कि हमारे निर्णय लेने, सोचने, समझने और प्रतिबद्धता को भी बहुत तेजी से बदला है. यह संक्रमण काल है. तकनीक ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है. पूरी दुनिया एक गांव की शक्ल में धीरे धीरे सिमटती जा रही है. हम सबसे मिलने, सबको जानने और अपने दायरे बढ़ाने के चक्कर में स्वयं खुद से दूर होते जा रहे हैं. ‌‌‌‌‌‌



'सेल्फी' भी 'फास्ट फूड' की तरह हमारी जीवनशैली को तेजी से बदलने जा रही है. हम पूरे समय स्वयं के रंग में रंगे जा रहे हैं. इतने अधिक कि पति-पत्नी, परिवार के सोच विचार में एल्बम की जगह अब सेल्फी आ गई है. बच्चे हमारे जीवनमूल्यों से बहुत दूर नहीं होते हैं. धीरे-धीरे ही सही, लेकिन वह उसी ओर जाते हैं, जिस रास्ते या तो हम निकलना चाहते हैं, लेकिन किसी वजह से निकल नहीं पाते. अगर जीवन केे प्रति आस्था, विश्वास, परिवार और अपनों के प्रति प्रेम की भावना हमारे भीतर कम हो जाएगी तो यह बच्चों में भला कैसे बढ़ेगी! बच्चे हमारे कोरे उपदेेश के सहारे नहीं बढ़ने वाले. उन्हें उपदेश सेे अधिक जीने का उदाहरण देना ही सही जीवनशैली है.

#जीवनसंवाद: दूसरे की गलती को भी वैसे ही स्‍वीकार करें, जैसे हम अपनी करते हैं

बात थोड़ी पुरानी है. मेरे पसंदीदा क्रिकेटर में से एक राहुल द्रविड़ ने 2013 में जीवनशैली, जीवन के प्रति सोच पर बड़ी सुंदर बात कही थी. द्रविड़ ने कहा था, 'आप एक चाइनीज बैंबू का बीज लें और इसे जमीन के अंदर लगा दें. पूरे साल सींचें. आपको कोई कोपल दिखाई नहीं देगी, अगलेेे 5 साल तक. अचानक, एक छोटी सी शाखा जमीन से उगती है. अगले 6 हफ्तों में पौधा 90 फीट तक बढ़ता है. यह हर 24 घंटे में 29 इंच तेजी से बढ़ता है आप सचमुच पौधे को उगते हुए देखते हैं. 5 साल पौधा क्या कर रहा था? वह अपनी जड़ें बढ़ा रहा था, चुपचाप पूरे मन, मौन से. आस्था से !

इस मौन के प्रति आस्था, जीवन के प्रति गहरी दृष्टि, दूसरों के लिए स्नेह हमारी जीवनशैली से बहुत तेजी से गायब हो रहे हैं. दूसरों को हम कितना मना पाते हैं मुझे नहीं पता, लेकिन कम से कम हमें इनके लिए जतन करने चाहिए.
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First published: July 3, 2019, 7:31 PM IST
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