#जीवनसंवाद: दुख का कारखाना!

‘किसी ने हमारे साथ बुरा, खराब व्‍यवहार किया. हमें धोखा दिया. छल किया. उसके बाद वह तो आजाद हो गया. आगे बढ़ गया, लेकिन हम उसके दिए दुख से चिपके रहें, यह अन्याय है, अपने प्रति!’

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:22 AM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:22 AM IST
आपने कभी महसूस किया है कि दुख की सप्लाई कहां से होती है! कौन है, जो रात-दिन हमारी ओर दुख धकेले जा रहा है. 'डियर जिंदगी- जीवन संवाद' के सफर में आपकी प्रतिक्रिया, ईमेल और संदेश को अगर हम एक छोटा सर्वे मान लें, तो इनका एक ही केंद्र है मन. इस पर हमारा नियंत्रण जैसे-जैसे कम होता जाता है, दुख का कारखाना तेजी से हमारी ओर दुख फेंकता जाता है. यह कुछ-कुछ वैसे ही है, जैसे किसी फैक्ट्री में काम होता है. सबकुछ उतना ही फार्मूला बंद है. एकदम सांचे में ढला हुआ, मुझे लगता है कि हमारा मन, दिमाग इतने वैज्ञानिक तरीके से काम करते हैं कि वह विज्ञान के साथ किसी भी समय आंख मिलाकर बात कर सकते हैं.

मन एकदम विज्ञान के नियमों की तरह सधा हुआ व्यवहार करता है, सारा अंतर केवल इस बात से पड़ता है कि हम उसकी भाषा पढ़ सकते हैं या नहीं. जो अपने मन की भाषा पढ़ सकते हैं, उनके लिए मन, दिल-दिमाग सब पर नियंत्रण करना किसी मशीन के साथ काम करने जैसा ही है. एकदम कंप्यूटर जैसा. कभी आपने कंप्यूटर को भावुक होते हुए देखा है. वह तभी भावुकता का प्रदर्शन करता है, जब आप उससे ऐसा करने के लिए कहते हैं. सही कमांड देते हैं.



हमारा मन भी कंप्यूटर के जितना ही वैज्ञानिक पद्धति से काम करने वाला है. इसलिए अगर आपको लगता है कि आप बहुत भावुक हैं, तो आपको मन के हार्डवेयर यानी बाहरी चीजों पर नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर यानी आंतरिक चीज पर काम करने की जरूरत है.

पाठक पूछते हैं कि दुख से कैसे लड़ा जाए! दुख से कैसे बचा जाए! इसके बदले में मैं उनसे केवल एक ही बात कहता हूं, एक नियम बनाइए- 'किसी को अपनी अनुमति के बिना स्वयं को दुखी करने की इजाजत मत दीजिए. यह ऐसा नियम है, जिससे आपकी जिंदगी में कोई चाहकर भी दुख का कारखाना नहीं लगा सकता.'

जब कारखाना नहीं लगेगा, तो प्रदूषण नहीं होगा और प्रदूषण नहीं होगा, तो स्वस्थ जीवन में बाधा पहुंचने के अवसर कम से कम होंगे. एक व्यक्ति आप पर क्रोधित हो रहा है, नाराज हो रहा है, तो इसे ऐसे समझना चाहिए कि वह अपनी फैक्ट्री से निकले हुए प्रदूषित तत्वों को आपकी ओर फेंक रहा है. इसलिए जरूरी है कि आपके पास सही मास्क हो. सही मास्क, एक मजबूत मन! जिस पर आपका नियंत्रण है. पूरी तरह से आपका. इसे आप चलाते हैं, आपके अतिरिक्त इस पर किसी और का नियंत्रण नहीं है. ‌

जरा सोचकर देखिए, हम अक्सर किन किन चीजों, बातों, के लिए दुखी होते रहते हैं. पड़ोसी के यहां गए.. उसका घर बहुत अच्छा लगा, पहली बार में सब ठीक था, लेकिन जैसे ही अपने घर का ख्याल आया, तुरंत एहसास हुआ कि अपने घर में कुछ कमी है. बड़े जतन से कार खरीदी, लेकिन कुछ दिन में वह छोटी लगने लगी. क्योंकि आपके मित्रों ने उससे बेहतर कुछ ले लिया. दुख का कारखाना सबसे अधिक तुलना के कारण चलता है. मेरे बेटे के नंबर कम हैं, इसलिए नहीं, क्योंकि जितने आने चाहिए थे उतने नहीं आए, बल्कि इसलिए क्योंकि वह दोस्तों और रिश्तेदारों से कम है. तुलना. मुझे कम वेतन नहीं मिलता लेकिन वह कम है, क्योंकि वह दूसरे भाइयों के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता.
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तुलना तुलना और तुलना. तुलना को सामान्य शब्दों में आप दुख के कारखाने की एनओसी समझिए. नगर में किसी भी चीज के निर्माण के लिए संबंधित संस्थाओं से जो अनुमति लेनी होती है, उसे सरल भाषा में आप एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) से समझ सकते हैं. जब तक आप अपने मन को तुलना रूपी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देंगे, वह दुख का कारखाना लगा ही नहीं सकता. इसलिए अगली बार जब भी कोई आपको दुखी करने का प्रयास करे, तो यह देखना चाहिए कि आपने उसे एनओसी दी थी या नहीं.

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First published: July 3, 2019, 7:31 PM IST
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