#जीवनसंवाद: दूसरों से दुखी!

पहले हम दूसरों के साथ सुखी होते थे, अब दूसरों के दुख से सुखी होते हैं. हमारे सुख में तुलना इतनी अधिक शामिल हो गई कि उसका मूल स्वाद ही बदल गया.

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:15 AM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:15 AM IST
#जीवनसंवाद दूसरों से दुखी! पहले हम दूसरों के साथ सुखी होते थे, अब दूसरों के दुख से सुखी होते हैं. हमारे सुख में तुलना इतनी अधिक शामिल हो गई कि उसका मूल स्वाद ही बदल गया. यह बात सुनने में बहुत अधिक कड़वी लग सकती है, लेकिन यह हमारे जीवन का स्वभाव बनता जा रहा है. हमें जैसे ही कोई खुशी मिलती है हम उस पर मुश्किल से कुछ पल ही प्रसन्न रह पाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम अगले ही क्षण उसके साथ अपनी हैसियत की गणना में लग जाते हैं. ‌ ‌‌‌

मैं आपको एक छोटा-सा अनुभव सुनाता हूं. कुछ साल पहले एक प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने के दौरान देर रात एक साथी का फोन आया. उन्होंने विनम्रता, आदर से कहा, 'मैं अपनी वेतन वृद्धि से बेहद खुश हूं. आपने मेरे साथ न्याय किया है. कुछ ही घंटे बाद उन्होंने मुझे फिर फोन किया. इस बार उसकी आवाज में गुस्सा था, परेशानी थी. उन्होंने कहा, 'मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा, मेरे लिए आपके साथ काम करना संभव नहीं है'.



मैं समझ नहीं पाया कि कुछ ही घंटों में ऐसा क्या बदल गया, जिसने उनके व्यवहार में इतना परिवर्तन ला दिया. बाद में मुझे बताया गया कि जैसे ही उन्हें दूसरे साथियों के बारे में सूचनाएं मिलीं, वह बेहद परेशान हो गए. ‌‌‌‌‌‌वह असल में अपने सुख से नहीं, बल्कि दूसरे के सुख से संचालित हो रहे थे. एक और मजेदार बात साझा करता चलूं कि आगे चलकर वह दूसरी कंपनी में मेरे साथ ही काम करने गए. संभव है कि कुछ साल बाद उन्हें इस बात का बोध हुआ कि सबकुछ किसी के हाथ में नहीं है. उन्हें अपने निर्णय को दूसरों से बहुत अधिक जोड़कर नहीं देखना चाहिए था. मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, यह बात और है कि कोशिश को सफल होने में लगभग दो बरस लग गए.

वह अकेले ऐसे नहीं हैं. हमारे आस-पास ऐसे साथियों, पड़ोसियों, मित्रों, शुभचिंतकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. जिनकी बहुत हद तक दिलचस्पी इस बात मेंं होती है कि आप उनसे कितने पीछे हैं. आत्मीयता, प्रेम और स्नेह की कमी से संबंधों की नमी सूखती जा रही है.

#जीवनसंवाद: सब कुछ तुरंत! यह हमारी जीवनशैली बन गई है

उन संबंधों की ओर देखिए, जो जीवन के अलग-अलग मोड़ पर आपसे अलग-अलग तरह से पेश आए. कुछ लोग ऐसे होंगे, जिन्होंने हमेशा आपका साथ निभाया. कुछ ऐसे होंगे, जो आपके उन दिनों के साथी होंगे, जब आप अपनी पहचान की खोज में थे. इनमें कुछ ऐसे भी होंगे, जिन्होंने आपसे इसलिए भी दूरी बना ली, क्योंकि आप उनसे जिंदगी की दौड़ में थोड़ा 'आगे' निकल गए. इसलिए, मैंने आरंभ में कहा कि पहले साथ में खुश रहते थे, अब दूसरों के दुख से सुखी होते हैं.
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#जीवनसंवाद: दूसरे की गलती को भी वैसे ही स्‍वीकार करें, जैसे हम अपनी करते हैं

आइए, छोटा सा अभ्यास करते हैं. आज से जब भी कोई आपसे अपनी प्रसन्नता, तरक्की, सुख की खबर साझा करे, तो उसे कुछ इस तरह लें कि जैसे वह आपके बारे में ही हो. दूसरों की प्रसन्नता को अपना स्वभाव बनाना , इतना कठिन भी नहीं है. हां, जैसे हर नई चीज़ सीखनी होती है, वैसे ही इसे भी सीखना है.

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First published: July 5, 2019, 8:12 PM IST
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