#जीवनसंवाद: आस्था!

हम दूसरों से सुख साझा करने से दूर हो रहे हैं, दुख कैसे बंटेगा! जरूरी काम. जरूरत से काम. इंच भर की मुस्कान! दूसरों की खुशी में भी उदास होने की वजह. हमें निरंतर अकेला कर रही है!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:20 AM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:20 AM IST
आपकी आस्था किसके प्रति है. सवाल पहली नजर में बहुत सामान्य लगता है. हमारी आस्था अनेक चीजों के प्रति होती है. किसी एक चीज के प्रति कैसे हो सकती है. कोई बात नहीं, बहुत सी चीजों के प्रति आस्था रखिए, लेकिन सबसे अधिक जिसके प्रति आपको आस्था रखनी चाहिए, आज इसके बारे में संवाद करते हैं.

बहुत संभव है कि आपमें बहुत से लोगों ने गुड़गांव की उस घटना के बारे में पढ़ा हो, जो हम सबके मन पर गहरा प्रभाव, चिंता छोड़ गई है. गुड़गांव के सेक्टर 49 स्थित सबसे चर्चित और महंगी सोसायटी में से एक उप्पल साउथ एंड में रहने वाले डॉ. प्रकाश की परिवार की हत्या, उसके बाद आत्महत्या, बहुत गंभीर सवाल खड़े करने वाली है. डॉ. प्रकाश के परिवार के बारे में जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार वह एक बेहद प्रतिष्ठित दवा कंपनी में बड़े पद पर थे. उनकी पत्नी दो स्कूलों का संचालन कर रही थीं. अभी तक जो जानकारी सामने आई उसके अनुसार नौकरी छूटने, दूसरे शहर में नौकरी मिलने, लेकिन वहां न जाने की इच्छा के बीच तनाव, गुस्से के बीच इस घटना का होना बताया जा रहा है.

#जीवनसंवाद:

दिल्ली, गुड़गांव, लखनऊ, इंदौर, जयपुर में ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. बहुत कम समय में. मैं बेहद विनम्रता से पाठकों से यह साझा करना चाहता हूं कि दो वर्ष पहले जब आपका प्रिय कॉलम 'डियर ज़िंदगी' आरंभ हुआ था, उस समय अनेक मित्र, शुभचिंतक, परिचित यह कह रहे थे कि यह संवाद के लिए बहुत प्रभावी विषय नहीं है. इसकी चपेट में बहुत थोड़े से लोग आते हैं, जिनकी पहचान मुश्किल है.

#जीवनसंवाद: दूसरे की गलती को भी वैसे ही स्‍वीकार करें, जैसे हम अपनी करते हैं

उस समय मेरा विनम्र विचार था कि यह समस्या कहीं तेजी से हमारे आस-पास बढ़ती जा रही है. यह जुकाम की तरह संक्रामक, तेजी से फैलने वाली है. लेकिन इसकी पहचान बहुत मुश्किल है. भीतर हम किस घुटन से जूझ रहे हैं, बाहर इसका पता लगना बहुत मुश्किल है. यह मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब हमारा संवाद दूसरों से सीमित होता जाता है. घर से ऑफिस. ऑफिस से घर. जरूरी काम. जरूरत से काम. इंच भर की मुस्कान! दूसरों की खुशी में भी उदास होने की वजह. हमें निरंतर अकेला कर रही है!

हम दूसरों से सुख साझा करने से दूर हो रहे हैं, दुुख कैसे बटेगा! हम खुद को सोशल मीडिया पर बांटते और निजी जिंदगी में अकेला करतेे जा रहे हैं. यह समझना बहुत जरूरी है कि सारी दिक्कतें, आर्थिक, सामाजिक संकट केवल आपके नहीं हैं. वह आपसे जुड़े सभी लोगों के हैं. इसलिए इनको किसी से कहनेे, सुनने में उनसे कभी भी संकोच न करें, जिनके लिए आप हैं, जिनसे आप हैं.
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#जीवनसंवाद: सब कुछ तुरंत! यह हमारी जीवनशैली बन गई है

एक ऐसी स्थिति जिसमें मनुष्य स्वयं को खत्म करने का फैसला लेता है, अपनों की हत्या करता है. जरूरी नहींं कि हमेशा उसका समाधान न हो. यह असल में बहुत हद तक हमारे भीतर गहरे धंसे अहंकार, प्रतिष्ठा, अपने होने को बहुत अधिक गंभीरता देने से है. इसीलिए जैसे ही हमारे स्टेटस में कोई कमी आती है, कुछ धन का संकट आता है, हमारे हाथ पांव फड़फड़ाने लगते हैं. ऐसे में हमेशा उनकी ओर देखना चाहिए, जो आपकी ओर आशा से देखते रहे हैं.

जीवन में जो भी संकट है वह जीवन से बड़ा नहीं है. काश डॉक्टर प्रकाश और उनके जैसे अनेक शिक्षित, सफल लोग यह समझ पाते कि सबकुछ खोकर भी, नई शुरुआत संभव है.

काश! हम जितनी जल्दी अपने होने के महत्व को समझ लेंगे, डिप्रेशन, उदासी और आत्महत्या के विचार हमसे उतनी ही दूर होते जाएंगे. जीवन के प्रति आस्था, सबसे बहुमूल्य विचार है. बहुत कुछ आपसे छीना जा सकता है, छल किया जा सकता है. लेकिन जीवन के प्रति आस्था से सबकुछ संभव है. याद करिए वह सारी कहानियां जो बचपन में आपने सुनी थीं, बड़े होकर भूूल गए. वह सब जीवन के प्रति आस्था की कहानियां थीं.

ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
पता : #जीवनसंवाद: (दयाशंकर मिश्र)

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First published: July 5, 2019, 7:58 PM IST
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